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मानकों को धता बता धड़ल्ले से चल रहे नर्सिंग होम
Bahraich
Updated Mon, 20 Jan 2014 05:46 AM IST
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बहराइच। ऑपरेशन टेबल पर पेशेंट को कोई दिक्कत न हो और आईसीयू में एडमिट पेशेंट की पूरी केयर हो, इसमें एनेस्थेटिस्ट की भूमिका डॉक्टरों से कम नहीं है। लेकिन, जिले के किसी भी पंजीकृत नर्सिंग होम में एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर नहीं है। इसके बावजूद ऑपरेशन धड़ल्ले से किया जा रहा है। स्वास्थ्य महकमा भी इन नर्सिंग होमों को लाइसेंस देने में नहीं हिचक रहा। कभी-कभार छापेमारी अभियान चलाकर दायित्वों की पूर्ति कर ली जाती है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के यहां 29 निजी नर्सिंग होम पंजीकृत हैं, जिसमें सदर तहसील में 21, नानपारा में 4 व कैसरगंज तहसील में चार निजी नर्सिंग होम स्थापित हैं। सीएमओ डॉ. उमाकांत वर्मा कहते हैं कि नई गाइड लाइन के मुताबिक नर्सिंग होम का पंजीकरण करा पाना आसान नहीं है। उन्होंने बताया कि नए एक्ट में निजी चिकित्सालय का आकार, नर्सिंग होम में डॉक्टर, प्रसूति गृह, मरीज व बिस्तर, ऑपरेशन थिएटर के लिए कितनी जगह होनी चाहिए, संस्थान में किस तरह की सुविधाएं होनी चाहिए, आदि का निर्धारण कर दिया गया है। ट्रेंड स्टॉफ रखने होंगे। इसी आधार पर प्राइवेट अस्पताल का रजिस्ट्रेशन होगा और लाइसेंस मिल सकेगा लेकिन वास्तविकता के धरातल पर देंखे तो स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत नर्सिंग होम में किसी के यहां एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर नहीं है और निष्प्रयोज्य पदार्थों को नष्ट करने की समुचित व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में नर्सिंग होमों में धड़ल्ले से हो रहे ऑपरेशन, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणली व निगरानी तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं।
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जिले में स्वास्थ्य विभाग के यहां 29 निजी नर्सिंग होम पंजीकृत हैं, जिसमें सदर तहसील में 21, नानपारा में 4 व कैसरगंज तहसील में चार निजी नर्सिंग होम स्थापित हैं। सीएमओ डॉ. उमाकांत वर्मा कहते हैं कि नई गाइड लाइन के मुताबिक नर्सिंग होम का पंजीकरण करा पाना आसान नहीं है। उन्होंने बताया कि नए एक्ट में निजी चिकित्सालय का आकार, नर्सिंग होम में डॉक्टर, प्रसूति गृह, मरीज व बिस्तर, ऑपरेशन थिएटर के लिए कितनी जगह होनी चाहिए, संस्थान में किस तरह की सुविधाएं होनी चाहिए, आदि का निर्धारण कर दिया गया है। ट्रेंड स्टॉफ रखने होंगे। इसी आधार पर प्राइवेट अस्पताल का रजिस्ट्रेशन होगा और लाइसेंस मिल सकेगा लेकिन वास्तविकता के धरातल पर देंखे तो स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत नर्सिंग होम में किसी के यहां एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर नहीं है और निष्प्रयोज्य पदार्थों को नष्ट करने की समुचित व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में नर्सिंग होमों में धड़ल्ले से हो रहे ऑपरेशन, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणली व निगरानी तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं।
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