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घाघरा नदी में कटान शुरू, 52 बीघा सब्जी व फल की खेती नदी में समाहित
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बौंडी (बहराइच)। मंझारा तौकली गांव के निकट घाघरा नदी ने बुधवार को सुबह से कटान शुरू कर दी है। सुबह से दोपहर बाद तक किसानों की लगभग 52 बीघा सब्जी और फलों की खेती घाघरा की लहरों में समा गई। इससे परेशान किसानों ने कटान रोकने के लिए तहसील को सूचना दी, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई उपाय नहीं किए जा सके हैं। किसान अपनी आंखों के सामने ही लहलहा रहे खेतों को नदी में समाते हुए देखने को मजबूर हैं।
कैसरगंज तहसील अंतर्गत मंझारा तौकली गांव घाघरा नदी के तट पर बसा हुआ है। दो दिन पूर्व चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज पर क्लोजर के चलते नदी में अचानक काफी मात्रा में पानी आ गया था। अब नदी के जलस्तर में गिरावट शुरू हुई है। इसके साथ ही नदी में कटान तेज हो गई है। मंझारा तौकली गांव के 25 से अधिक किसानों ने नदी के तट पर खीरा, ककरी, तरबूज, खरबूजा, परवल, लोबिया, तरोई, कद्दू लौकी आदि की फसलें लगा रखी हैं।
सुबह से ही घाघरा नदी के जलस्तर में गिरावट के साथ ही खेतों में कटान शुरू हो गई है। गांव निवासी भगीरथ, बुद्धिचंद, जोखन, नारद, राजाराम, वीरेंद्र कुमार, गंगाराम, राधेश्याम, रामशंकर, बनारसी, भगौती, रामानंद, जगदीश समेत 25 से अधिक किसानों की 52 बीघा फल और सब्जी की खेती घाघरा की लहरों ने समा गई है। बेबस किसन अपनी आंखों के सामने खेतों को नदी में समाहित होते देखने को मजबूर हैं।
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पीड़ित किसानों ने कहा कि सुबह कटान शुरू होने की सूचना तहसील को दी गई थी। लेकिन अब तक कटान से बचाव के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। कटान रोकने के उपाय न किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। किसानों ने कहा कि यदि जल्द ही कटान रोकने के उपाय नहीं किए गए तो उनकी कीमतें जमीन नदी में समा जा जाएगी। नदी में जमीन कटने से उन्हें परिवारीजनों के भरण पोषण में परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
वर्जन
सिंचाई विभाग को दी जानकारी
घाघरा नदी में अभी अधिक पानी नहीं है। हल्की फुल्की कटान की सूचना मिली है। ऐसे में सिंचाई विभाग को अवगत करा रहे हैं। जिससे कि कटान रोकने के उपाय किए जा सकें। राजस्व विभाग की टीम को भी मौके पर भेजा जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी।
- रामजीत मौर्या, उप जिलाधिकारी
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कैसरगंज तहसील अंतर्गत मंझारा तौकली गांव घाघरा नदी के तट पर बसा हुआ है। दो दिन पूर्व चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज पर क्लोजर के चलते नदी में अचानक काफी मात्रा में पानी आ गया था। अब नदी के जलस्तर में गिरावट शुरू हुई है। इसके साथ ही नदी में कटान तेज हो गई है। मंझारा तौकली गांव के 25 से अधिक किसानों ने नदी के तट पर खीरा, ककरी, तरबूज, खरबूजा, परवल, लोबिया, तरोई, कद्दू लौकी आदि की फसलें लगा रखी हैं।
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सुबह से ही घाघरा नदी के जलस्तर में गिरावट के साथ ही खेतों में कटान शुरू हो गई है। गांव निवासी भगीरथ, बुद्धिचंद, जोखन, नारद, राजाराम, वीरेंद्र कुमार, गंगाराम, राधेश्याम, रामशंकर, बनारसी, भगौती, रामानंद, जगदीश समेत 25 से अधिक किसानों की 52 बीघा फल और सब्जी की खेती घाघरा की लहरों ने समा गई है। बेबस किसन अपनी आंखों के सामने खेतों को नदी में समाहित होते देखने को मजबूर हैं।
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पीड़ित किसानों ने कहा कि सुबह कटान शुरू होने की सूचना तहसील को दी गई थी। लेकिन अब तक कटान से बचाव के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। कटान रोकने के उपाय न किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। किसानों ने कहा कि यदि जल्द ही कटान रोकने के उपाय नहीं किए गए तो उनकी कीमतें जमीन नदी में समा जा जाएगी। नदी में जमीन कटने से उन्हें परिवारीजनों के भरण पोषण में परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
वर्जन
सिंचाई विभाग को दी जानकारी
घाघरा नदी में अभी अधिक पानी नहीं है। हल्की फुल्की कटान की सूचना मिली है। ऐसे में सिंचाई विभाग को अवगत करा रहे हैं। जिससे कि कटान रोकने के उपाय किए जा सकें। राजस्व विभाग की टीम को भी मौके पर भेजा जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी।
- रामजीत मौर्या, उप जिलाधिकारी