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22 बच्चे खसरे की चपेट में
अमर उजाला/बहराइच
Updated Tue, 11 Apr 2017 11:58 PM IST
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खसरा पीड़ित बच्ची
- फोटो : अमर उजाला
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तराई में मौसम परिवर्तन के साथ ही खसरा तेजी से फैल रहा है। नानपारा तहसील अंतर्गत विकास खंड नवाबगंज के सरवनतारा और देवरा गांव में खसरे से 22 बच्चे बीमार हैं, जिसमें छह की हालत नाजुक बताई जा रही है। सूचना के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव नहीं पहुंची है, जिससे खसरे से पीड़ित बच्चों के परिवारीजन परेशान हैं।
तराई में बदल रहा मौसम खसरे का संवाहक बन गया है। सरवनतारा और देवरा गांव का कोई ऐसा परिवार नहीं होगा, जिसमें घर का कोई न कोई सदस्य खसरा व अन्य संक्रामक बीमारियों की चपेट में न हो। हालात यह हैं कि लोगों को तेज बुखार के साथ शरीर पर दाने निकल रहे हैं। यह दाने पककर जख्म का रूप ले रहे हैं। जिसके चलते रोगी असहनीय पीड़ा से कराहते रहते हैं। इनमें अधिकांश बालक और किशोर शामिल हैं।
सरवनतारा गांव में इस समय मंजीता (12), राजखेवन (3), शिवा (3), अर्चना (13), मीना (22), खुशी (9), उमेश (10), बच्चे (12), किशन (8), माही (3) खसरे से पीड़ित हैं। वहीं, पड़ोस के देवरा गांव में श्वेता (22), शेरा (3), मर्री (8), अनुराग (3), अतुल (4), करन (2), अर्जुन (4), अजय (5), राजाराम (एक) समेत 22 बच्चे व किशोर खसरे की चपेट में हैं।
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गांव निवासी राजितराम, फौजदार और केशवराम का कहना है कि परिवार के सदस्यों के खसरा पीड़ित होने की जानकारी दो दिन पहले हुई है। इस मामले में बाबागंज स्वास्थ्य केंद्र, नानपारा सीएचसी और सीएमओ कार्यालय को सूचना दी गई है, लेकिन अब तक कोई भी स्वास्थ्यकर्मी गांव नहीं पहुंचा है। जिसके चलते माही, शिवा, उमेश, श्वेता, मर्री और अनुराग की हालत नाजुक बताई जा रही है। स्थानीय डॉक्टरों से जैसे-तैसे इलाज चल रहा है, लेकिन लाभ नहीं हो सका है।
इस मामले में बाबागंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अर्चित कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सूचना मिली है। लेकिन टीम क्यों नहीं भेजी गई, इस बात पर चुप्पी साध गए। बोले कि जल्द ही व्यवस्था करेंगे।
संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष की टीम करेगी कैंप
देवरा और सरवनतारा गांव में खसरा फैलने की जानकारी नहीं थी। अब पता चला है। संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष की टीम गांव भेजी जा रही है। चिकित्सक दोनों गांव में कैंप कर पीड़ितों का इलाज करेंगे। जिन रोगियों की हालत गंभीर होगी, उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा।
डॉ. अरुण लाल, मुख्य चिकित्साधिकारी
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तराई में बदल रहा मौसम खसरे का संवाहक बन गया है। सरवनतारा और देवरा गांव का कोई ऐसा परिवार नहीं होगा, जिसमें घर का कोई न कोई सदस्य खसरा व अन्य संक्रामक बीमारियों की चपेट में न हो। हालात यह हैं कि लोगों को तेज बुखार के साथ शरीर पर दाने निकल रहे हैं। यह दाने पककर जख्म का रूप ले रहे हैं। जिसके चलते रोगी असहनीय पीड़ा से कराहते रहते हैं। इनमें अधिकांश बालक और किशोर शामिल हैं।
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सरवनतारा गांव में इस समय मंजीता (12), राजखेवन (3), शिवा (3), अर्चना (13), मीना (22), खुशी (9), उमेश (10), बच्चे (12), किशन (8), माही (3) खसरे से पीड़ित हैं। वहीं, पड़ोस के देवरा गांव में श्वेता (22), शेरा (3), मर्री (8), अनुराग (3), अतुल (4), करन (2), अर्जुन (4), अजय (5), राजाराम (एक) समेत 22 बच्चे व किशोर खसरे की चपेट में हैं।
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गांव निवासी राजितराम, फौजदार और केशवराम का कहना है कि परिवार के सदस्यों के खसरा पीड़ित होने की जानकारी दो दिन पहले हुई है। इस मामले में बाबागंज स्वास्थ्य केंद्र, नानपारा सीएचसी और सीएमओ कार्यालय को सूचना दी गई है, लेकिन अब तक कोई भी स्वास्थ्यकर्मी गांव नहीं पहुंचा है। जिसके चलते माही, शिवा, उमेश, श्वेता, मर्री और अनुराग की हालत नाजुक बताई जा रही है। स्थानीय डॉक्टरों से जैसे-तैसे इलाज चल रहा है, लेकिन लाभ नहीं हो सका है।
इस मामले में बाबागंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अर्चित कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सूचना मिली है। लेकिन टीम क्यों नहीं भेजी गई, इस बात पर चुप्पी साध गए। बोले कि जल्द ही व्यवस्था करेंगे।
संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष की टीम करेगी कैंप
देवरा और सरवनतारा गांव में खसरा फैलने की जानकारी नहीं थी। अब पता चला है। संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष की टीम गांव भेजी जा रही है। चिकित्सक दोनों गांव में कैंप कर पीड़ितों का इलाज करेंगे। जिन रोगियों की हालत गंभीर होगी, उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा।
डॉ. अरुण लाल, मुख्य चिकित्साधिकारी