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बरुआ कोड़र में बिना मदद फंसे 200 परिवार
बहराइच
Updated Thu, 13 Jul 2017 10:20 PM IST
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गोलागंज में बैलगाड़ी पर मचान बनाकर बैठे लोग
- फोटो : अमर उजाला
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बाढ़ से महसी क्षेत्र में त्राहि-त्राहि मची हुई है। घाघरा और सरयू नदी के बीच में बसे बरुआ कोड़र गांव में तीसरे दिन भी राहत सहायता नहीं पहुंची। उन्हें निकालने के इंतजाम नहीं हो सके हैं। 200 परिवार फंसे पड़े हैं। वहीं पचासा गांव में भी 250 परिवारों के बाढ़ से जूझने की खबर मिल रही है।
जिलाधिकारी ने बाढ़ क्षेत्र का मुआयना कर तबाही देखी। राहत-बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। क्षेत्र के लेखपाल को सही सूचना न देने पर फटकार लगाई। एसडीएम को भी बाढ़ क्षेत्र में नजर बनाए रखने की हिदायत दी। वहीं नदी का पानी भोर से कम होने लगा है। जलस्तर में गिरावट के साथ कटान तेज हो गई है। नौ मकान घाघरा नदी में समाहित हुए हैं।
तराई में वर्षा का क्रम दो दिन से थमा हुआ है लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर वर्षा हो रही है। इसके चलते घाघरा नदी उफान पर बनी हुई है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुनील कुमार शुक्ला ने बताया कि गुरुवार भोर से नदी का जलस्तर 106.176 मीटर पर ठहरा हुआ है। हालांकि अभी भी नदी खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर ऊपर है।
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इसका नतीजा महसी क्षेत्र में बाढ़ के रूप में दिख रहा है। 16 गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। बाढ़ के विभीषिका की सूचना पाकर गुरुवार सुबह जिलाधिकारी अजयदीप सिंह ने गोलागंज, कायमपुर, जरमापुर, पिपरी, कोरिनपुरवा, नगेसरपुरवा आदि गांवों का दौरा किया।
तटबंध पर कार खड़ी कर डीएम दो किलोमीटर तक पैदल गए। हालांकि आगे बाढ़ होने के चलते वह नहीं जा सके। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याएं सुनीं। बाढ़ की विभीषिका देखकर डीएम ने कायमपुर के लेखपाल हरि प्रसाद को फटकार लगाई। सही सूचना न देने पर नाराजगी जतायी।
हालांकि लेखपाल ने हाल ही में ज्वाइनिंग की बात कही। इस पर जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी महसी को व्यवस्थाएं दुरुस्त करवाने के निर्देश दिए। प्रतिदिन की रिपोर्टिंग भी देने की बात कही। जिलाधिकारी ने कहा कि बरुआ कोड़र में फंसे 200 ग्रामीणों को निकालने के लिए एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर सुधीर कुमार को निर्देश दिए गए हैं।
मोटर बोट से गांव के लोगों को मदद पहुंचायी जाएगी। वहां फंसे लोगों को बाहर निकाला जाएगा। हालांकि तीसरा दिन होने के बावजूद देर शाम तक एनडीआरएफ की मोटर बोट बरुआ कोड़र गांव नहीं पहुंच सकी। वहीं मांझा दरिया बुर्द के पचासा ग्राम में भी 250 लोगों के फंसे होने की सूचना मिली है।
अभी तक उन्हें भी निकालने के कोई उपाय नहीं हुए हैं। इस समय नदी की लहरें गोलागंज, कायमपुर, पिपरी, जरमापुर क्षेत्र में कटान हो रही है। गांव निवासी संतराम, पृथ्वीनाथ, किशनलालसमेत नौ ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हुए हैं।
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जिलाधिकारी ने बाढ़ क्षेत्र का मुआयना कर तबाही देखी। राहत-बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। क्षेत्र के लेखपाल को सही सूचना न देने पर फटकार लगाई। एसडीएम को भी बाढ़ क्षेत्र में नजर बनाए रखने की हिदायत दी। वहीं नदी का पानी भोर से कम होने लगा है। जलस्तर में गिरावट के साथ कटान तेज हो गई है। नौ मकान घाघरा नदी में समाहित हुए हैं।
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तराई में वर्षा का क्रम दो दिन से थमा हुआ है लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर वर्षा हो रही है। इसके चलते घाघरा नदी उफान पर बनी हुई है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुनील कुमार शुक्ला ने बताया कि गुरुवार भोर से नदी का जलस्तर 106.176 मीटर पर ठहरा हुआ है। हालांकि अभी भी नदी खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर ऊपर है।
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इसका नतीजा महसी क्षेत्र में बाढ़ के रूप में दिख रहा है। 16 गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। बाढ़ के विभीषिका की सूचना पाकर गुरुवार सुबह जिलाधिकारी अजयदीप सिंह ने गोलागंज, कायमपुर, जरमापुर, पिपरी, कोरिनपुरवा, नगेसरपुरवा आदि गांवों का दौरा किया।
तटबंध पर कार खड़ी कर डीएम दो किलोमीटर तक पैदल गए। हालांकि आगे बाढ़ होने के चलते वह नहीं जा सके। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याएं सुनीं। बाढ़ की विभीषिका देखकर डीएम ने कायमपुर के लेखपाल हरि प्रसाद को फटकार लगाई। सही सूचना न देने पर नाराजगी जतायी।
हालांकि लेखपाल ने हाल ही में ज्वाइनिंग की बात कही। इस पर जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी महसी को व्यवस्थाएं दुरुस्त करवाने के निर्देश दिए। प्रतिदिन की रिपोर्टिंग भी देने की बात कही। जिलाधिकारी ने कहा कि बरुआ कोड़र में फंसे 200 ग्रामीणों को निकालने के लिए एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर सुधीर कुमार को निर्देश दिए गए हैं।
मोटर बोट से गांव के लोगों को मदद पहुंचायी जाएगी। वहां फंसे लोगों को बाहर निकाला जाएगा। हालांकि तीसरा दिन होने के बावजूद देर शाम तक एनडीआरएफ की मोटर बोट बरुआ कोड़र गांव नहीं पहुंच सकी। वहीं मांझा दरिया बुर्द के पचासा ग्राम में भी 250 लोगों के फंसे होने की सूचना मिली है।
अभी तक उन्हें भी निकालने के कोई उपाय नहीं हुए हैं। इस समय नदी की लहरें गोलागंज, कायमपुर, पिपरी, जरमापुर क्षेत्र में कटान हो रही है। गांव निवासी संतराम, पृथ्वीनाथ, किशनलालसमेत नौ ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हुए हैं।