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चार घंटे तक फर्श पर तड़पी गर्भवती तब मिला बेड

Tue, 13 Jun 2017 09:47 PM IST
Updated Tue, 13 Jun 2017 09:47 PM IST
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चार घंटे तक फर्श पर तड़पी गर्भवती तब मिला बेड
चार घंटे तक फर्श पर तड़पीं गर्भवती
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प्रसव पीड़ा होने पर घर वाले दोनों महिलाओं को ले गए थे अस्पताल
परिवारीजनों के हंगामा करने के बाद किया भर्ती
बेड न होने का बहाना बना भर्ती करने में अस्पताल प्रशासन करता रहा हीलाहवाली
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महसी का मामला
राजीचौराहा (बहराइच)। गर्भवती महिलाओं के प्रति संवेदनहीनता कम नहीं हो रही है। मंगलवार को सुबह औराही गांव निवासी दो गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने पर परिवारीजनों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महसी पहुंचाया, लेकिन वहां उन्हें भर्ती नहीं किया गया। बेड के अभाव में दोनों गर्भवती महिलाएं चार घंटे तक अस्पताल के फर्श पर कराहती रहीं। परिवारीजनों ने जब हंगामा शुरू किया, तब आनन-फानन में बेड मुहैया कराया गया। इस दौरान अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी बेड के अभाव की बात कहते हुए किनारा कसते रहे।
जच्चा और बच्चा की सुरक्षा के लिए सरकार बेहद गंभीर है। इस मामले में जननी सुरक्षा समेत कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। गर्भवती महिलाओं को हरसंभव इलाज मुहैया कराने के निर्देश हैं, लेकिन महसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती महिलाओं के प्रति संवेदनहीनता बरती जा रही है। महसी तहसील अंतर्गत औराही गांव निवासी मोहम्मद वाहिद की पत्नी शेरबानो (28) व उत्तम कुमार की पत्नी मीरा देवी (26) गर्भवती हैं। दोनों महिलाओं को मंगलवार सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इस पर परिवारीजन वाहन का इंतजाम कर महिलाओं को करीब आठ बजे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। लेकिन अस्पताल ने बेड न खाली न होने की बात कहकर जिम्मेदारों ने किनारा कस लिया। करीब 12 बजे जब अमर उजाला संवाददाता अस्पताल पहुंचा और गर्भवती महिलाओं को फर्श पर कराहते देखा तो वहां मौजूद चिकित्सक डॉ. ए कुमार व डॉ. एके मिश्रा से पड़ताल शुरू की। सभी ने कहा कि छह बेड हैं। उन पर मरीज भर्ती हैं। इसके चलते बेड मुहैया नहीं हो सका है। हालांकि इसी दौरान परिवारीजन भी लचर व्यवस्था की बात कहते हुए बिफर पड़े। मामला बिगड़ता देख आनन-फानन में अस्पताल प्रशासन ने बेड का इंतजाम कर शेर बानो और मीरा देवी को भर्ती कर इलाज शुरू किया।
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संसाधन हैं नहीं, किसी तरह हो रहा काम
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद चिकित्सक डॉ. ए कुमार ने कहा कि संसाधनों की कमी है। इस समय प्रतिदिन 10 से 15 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें भर्ती करने की जरूरत होती है। लेकिन संसाधन के अभाव में भर्ती नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
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संसाधनों की नहीं है कमी, कराएंगे जांच
सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवस्थाएं मुकम्मल हैं। संसाधनों की तनिक भी कमी नहीं है। गर्भवती महिलाओं के फर्श पर चार घंटे तक पड़े रहने की जानकारी नहीं थी। अब पता चला है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।
डॉ. अरुणलाल, सीएमओ
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