फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   1900 new guests can knock 27 slugs

27 घोसलों से 1900 नए मेहमान दे सकते दस्तक

Sun, 04 Jun 2017 10:29 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
अमर उजाला/बहराइच Updated Sun, 04 Jun 2017 10:29 PM IST
विज्ञापन
तराई का अधिक तापमान घड़ियालों की नई जिंदगी में समस्या बन रहा है। इस बार सामान्य से अधिक तापमान के कारण निर्धारित समय से सप्ताह भर पूर्व घड़ियालों के अंडे खुल सकते हैं। इसके लिए निगरानी टीम गठित की गई है।
विज्ञापन


यह टीम कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी में घड़ियालों के 27 घोसलों में अंडों की सुरक्षा में लगी है। वनाधिकारी व जलीय जीव विशेषज्ञ निरंतर घोसलों की निगरानी कर रहे हैं। 27 घोसलों से 1900 नए मेहमानों के कतर्निया में दस्तक देने की उम्मीद जताई जा रही है।
विज्ञापन


कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियालों के कुनबों को बढ़ाने में मददगार मानी जाती है। इस समय अनुमान के मुताबिक नदी में लगभग 300 वयस्क घड़ियाल मौजूद हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रति वर्ष मार्च के अंत में घड़ियाल नदी के टॉपू वाले स्थानों पर अंडे देकर उन्हें बालुओं में सहेज कर घोसला बना देते हैं। एक घोसले में 45 से 50 अंडे होते हैं। बालुओं में ढकने के बाद मादा घड़ियाल अंडों के प्रति निश्चिंत हो जाती है। 15 जून का समय अंडों से बच्चों के निकलने का होता है। लेकिन इस बार तराई का मौसम अधिक सख्त है।

सूरज की तपिश से गेरुआ नदी के टॉपुओं पर भी सामान्य से ज्यादा गर्मी है। जिसके चलते समय से सप्ताह भर पूर्व अंडों से बच्चे निकलने की संभावना विशेषज्ञ जता रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह का कहना है कि चार वन रक्षकों की टीम गठित की गई है, जो मोटरबोट व नाव के सहारे गेरुआ नदी में टॉपुओं पर बने घड़ियालों के घोसलों पर नजर रख रही हैं।

विश्व प्रकृति निधि भारत (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि अंडों की प्रतिदिन सुबह-शाम निगरानी हो रही है। बालू हटाकर अंडों की स्थिति जांची जा रही है। जैसे ही बच्चों के निकलने की शुरुआत होगी, उन्हें सुरक्षित नदी में छोड़ा जाएगा। डीएफओ ने बताया कि कतर्नियाघाट रेंज में भवानीपुर घाट और आंबा घाट में दो किलोमीटर के दायरे में टॉपुओं पर बालू में अंडे सुरक्षित हैं।

कतर्नियाघाट के रेंजर आरकेपी सिंह ने बताया कि अंडों से बच्चों के निकलने के लिए नदी क्षेत्र का तापमान 42 डिग्र्री होना चाहिए। इस बार तापमान कुछ इसी अंदाज में चढ़-उतर रहा है। ऐसे में गर्मी अधिक होने से आगामी सप्ताह में नन्हे मेहमान आंखें खोल सकते हैं। 


प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह ने बताया कि अधिक गर्मी पड़ने पर अंडों से निकलने वाले बच्चों में नर अधिक होते हैं। सामान्य मौसम होने पर नर और मादा की संख्या लगभग बराबर होती है। डीएफओ ने बताया कि टॉपू पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed