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घाघरा की कटान में छह मकान और 40 बीघा खेत समाहित
Updated Fri, 28 Jul 2017 12:19 AM IST
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राजीचौराहा/कैसरगंज। घाघरा नदी का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर है। दोपहर बाद से जलस्तर में एक सेंटीमीटर की कमी शुरू हुई है। लेकिन जलस्तर कम होने के साथ ही कटान तेज हो गई है। महसी और कैसरगंज क्षेत्र में नदी की लहरें तेज कटान कर रही हैं।
छह ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हो गए। 40 बीघा खेती योग्य जमीन भी कटी है। अभी तक राहत व बचाव के कोई उपाय नहीं हुए हैं। घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। नदी खतरे के निशान से सुबह आठ बजे 17 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। 12 बजे से जलस्तर में कमी शुरू हो गई।
केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में कमी दर्ज हो रही है। जिसके कारण शाम चार बजे नदी का जलस्तर 106.186 मीटर दर्ज हुआ। इसके साथ ही कटान तेज हो गई है।
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नदी की लहरों ने महसी के गोलागंज को निशाने पर ले लिया है। गांव निवासी बसंतलाल व कन्हैयालाल का मकान घाघरा की भेंट चढ़ गया है। वहीं कैसरगंज के कुम्हारपुरवा गांव में नदी की लहरों ने तेज कटान करते हुए राधे, मनमोहन, शिवकुमार समेत चार ग्रामीणों के मकान को लील लिया है।
घरों के साथ खेती योग्य जमीन भी नदी में समाहित हो रही है। रात से अब तक 40 बीघा खेत नदी की भेंट चढ़ा है। महसी के उप जिलाधिकारी नागेंद्र कुमार का कहना है कि राजस्वकर्मी क्षेत्र में कैंप कर रहे हैं। कटान पर नजर रखी जा रही है। सूची बन रही है। कटान पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा। उन्हें बसाने के इंतजाम शीघ्र ही होंगे।
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छह ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हो गए। 40 बीघा खेती योग्य जमीन भी कटी है। अभी तक राहत व बचाव के कोई उपाय नहीं हुए हैं। घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। नदी खतरे के निशान से सुबह आठ बजे 17 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। 12 बजे से जलस्तर में कमी शुरू हो गई।
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केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में कमी दर्ज हो रही है। जिसके कारण शाम चार बजे नदी का जलस्तर 106.186 मीटर दर्ज हुआ। इसके साथ ही कटान तेज हो गई है।
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नदी की लहरों ने महसी के गोलागंज को निशाने पर ले लिया है। गांव निवासी बसंतलाल व कन्हैयालाल का मकान घाघरा की भेंट चढ़ गया है। वहीं कैसरगंज के कुम्हारपुरवा गांव में नदी की लहरों ने तेज कटान करते हुए राधे, मनमोहन, शिवकुमार समेत चार ग्रामीणों के मकान को लील लिया है।
घरों के साथ खेती योग्य जमीन भी नदी में समाहित हो रही है। रात से अब तक 40 बीघा खेत नदी की भेंट चढ़ा है। महसी के उप जिलाधिकारी नागेंद्र कुमार का कहना है कि राजस्वकर्मी क्षेत्र में कैंप कर रहे हैं। कटान पर नजर रखी जा रही है। सूची बन रही है। कटान पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा। उन्हें बसाने के इंतजाम शीघ्र ही होंगे।