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काव्यगोष्ठी
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बहराइच। शहर के मोहल्ला हमजापुरा में स्थित श्रीराम जानकी मंदिर के परिसर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर जनपद के कवियों व साहित्यकारों अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। गोष्ठी की अध्यक्षता गयाप्रसाद मिश्र ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुमार अनुज व विशिष्ट अतिथि कृष्ण कुमार अवस्थी किशन रहे। संचालन विमलेश कुमार जायसवाल ने किया।
कार्यक्रम का आरंभ करते हुए योगेंद्र कुमार मिश्र ने पढ़ा - अगर है दु:ख में जीवन कभी आनंद भी होगा, सुनिश्चित है युवाओं में विवेकानंद भी होगा। विनोद कुमार पांडेय विनोद ने पढ़ा - जिंदगी का जिंदगी में कोई मतलब नहीं होता, कुछ करके ही जिंदगी का मकसद संवरता है। तिलकाराम अजनबी ने पढ़ा - जानते धर्म का सार नहीं वह वंदेमातरम क्यों बोले, जिनको इस देश से प्यार नहीं वह वंदेमातरम क्यों बोले।
डॉ. राकेश कुमार दूबे कुणाल ने योग दिवस पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुये पढ़ा - आओ योग के पथ पर चलकर पुन: नया निर्माण करें। तन-मन-धन संग राष्ट्र रतन धन जन गण का कल्याण करें। अर्चना श्रीवास्तव अर्चन ने पढ़ा - जा न सकेंगे लौट के आयेंगे बार-बार, हम उनको याद और भी आयेंगे बार-बार। कवि पीके प्रचंड ने पढ़ा - अपने सिर के बोझ सदा दूसरे के सिर मढ़ा कीन, हम प्यार मुहब्बत का जानी जस आवा जू मा गढ़ा कीन। बस हमसै पढ़ा में भवा गलती, लव लेटर वहिकै रोज मिले, ऊ इलू इलू लिखा किहिस हम उल्लू-उल्लू पढ़ा कीन।
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कार्यक्रम संयोजक गुलाबचंद्र जायसवाल ने पढ़ा - वंदे मातरम भारत मां का नारा है आजादी का, इसमें ताकत है शत्रु और गद्दारों की बर्बादी का। आशुतोष श्रीवास्तव ने पढ़ा - खोजने चले थे सुबह हम शाम पा गये, अमृत कलश की जगह हम जाम पा गये। काव्य गोष्ठी में माहिर अली माहिर, शिवकुमार सिंह रैकवार, कुमार अनुज, विमलेश जायसवाल विमल, गयाप्रसाद मिश्र मधुकर, कृष्ण कुमार अवस्थी किशन, रमेशचंद्र तिवारी, यज्ञप्रसाद शुक्ला ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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कार्यक्रम का आरंभ करते हुए योगेंद्र कुमार मिश्र ने पढ़ा - अगर है दु:ख में जीवन कभी आनंद भी होगा, सुनिश्चित है युवाओं में विवेकानंद भी होगा। विनोद कुमार पांडेय विनोद ने पढ़ा - जिंदगी का जिंदगी में कोई मतलब नहीं होता, कुछ करके ही जिंदगी का मकसद संवरता है। तिलकाराम अजनबी ने पढ़ा - जानते धर्म का सार नहीं वह वंदेमातरम क्यों बोले, जिनको इस देश से प्यार नहीं वह वंदेमातरम क्यों बोले।
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डॉ. राकेश कुमार दूबे कुणाल ने योग दिवस पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुये पढ़ा - आओ योग के पथ पर चलकर पुन: नया निर्माण करें। तन-मन-धन संग राष्ट्र रतन धन जन गण का कल्याण करें। अर्चना श्रीवास्तव अर्चन ने पढ़ा - जा न सकेंगे लौट के आयेंगे बार-बार, हम उनको याद और भी आयेंगे बार-बार। कवि पीके प्रचंड ने पढ़ा - अपने सिर के बोझ सदा दूसरे के सिर मढ़ा कीन, हम प्यार मुहब्बत का जानी जस आवा जू मा गढ़ा कीन। बस हमसै पढ़ा में भवा गलती, लव लेटर वहिकै रोज मिले, ऊ इलू इलू लिखा किहिस हम उल्लू-उल्लू पढ़ा कीन।
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कार्यक्रम संयोजक गुलाबचंद्र जायसवाल ने पढ़ा - वंदे मातरम भारत मां का नारा है आजादी का, इसमें ताकत है शत्रु और गद्दारों की बर्बादी का। आशुतोष श्रीवास्तव ने पढ़ा - खोजने चले थे सुबह हम शाम पा गये, अमृत कलश की जगह हम जाम पा गये। काव्य गोष्ठी में माहिर अली माहिर, शिवकुमार सिंह रैकवार, कुमार अनुज, विमलेश जायसवाल विमल, गयाप्रसाद मिश्र मधुकर, कृष्ण कुमार अवस्थी किशन, रमेशचंद्र तिवारी, यज्ञप्रसाद शुक्ला ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।