{"_id":"5d0d07288ebc3e45b7451873","slug":"156113487317-bahraich-news14","type":"story","status":"publish","title_hn":"निशानगाड़ा रेंज में हाथियों के उत्पात से दहशत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निशानगाड़ा रेंज में हाथियों के उत्पात से दहशत
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बिछिया (बहराइच)। निशानगाड़ा रेंज में गुरुवार की रात नेपाली गजराज की चिंघाड़ रमपुरवा गांव के लोगों को रह-रह कर सुनाई पड़ती रही, जिससे लोग दहशत में रहे। निरंतर हाथियों की आमद से सभी को अपने घर व फसल की सुरक्षा की चिंता सता रही है। वन विभाग की ओर से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क से सटा हुआ है। दोनों देशों के घने जंगल के बीच खाता कारीडोर क्षेत्र है। इसी रास्ते से नेपाल के जंगलों के हाथी बीते चार दिनों से प्रतिदिन कतर्निया के जंगल में पहुंचा रहे हैं। गुरुवार रात करीब 10:30 बजे हाथियों का झुंड तिगड़ा बन चौकी के पास पहुंचा। यहां वन कर्मियों के शोर मचाने और हांका लगाने पर हाथियों का झुंड रमपुरवा गांव के निकट पुल संख्या 10 के पास पहुंच गया।
रात भर पुल के आसपास क्षेत्र में हाथी मौजूद रहे। उनकी चिंघाड़ रह-रह कर सुनाई द रही थी। जिससे गांव के लोग सहमे रहे। गांव निवासी रघुराज, सुख्खा, भगौती आदि ने बताया कि रात तीन बजे तक चिंघाड़ सुनाई पड़ती रही, जिससे वह सभी सो नहीं सके। सुबह हाथियों का झुंड नहर में नहाता दिखा।
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बिशुनापुर के ग्रामीणों का कहना है कि वनाधिकारियों को नेपाली हाथियों के दस्तक से अवगत करा दिया गया है। लेकिन अब तक सुरक्षा के समुचित इंतजाम नहीं हुए हैं। उधर, डीएफओ जीपी सिंह ने कहा कि नेपाल से आने वाले हाथी के झुंड को रोका नहीं जा सकता। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए 20 सदस्यीय टीम गठित है। टीम निरंतर गश्त कर रही है। ग्रामीणों को भी सजग रहकर अपनी सुरक्षा करनी होगी।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क से सटा हुआ है। दोनों देशों के घने जंगल के बीच खाता कारीडोर क्षेत्र है। इसी रास्ते से नेपाल के जंगलों के हाथी बीते चार दिनों से प्रतिदिन कतर्निया के जंगल में पहुंचा रहे हैं। गुरुवार रात करीब 10:30 बजे हाथियों का झुंड तिगड़ा बन चौकी के पास पहुंचा। यहां वन कर्मियों के शोर मचाने और हांका लगाने पर हाथियों का झुंड रमपुरवा गांव के निकट पुल संख्या 10 के पास पहुंच गया।
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रात भर पुल के आसपास क्षेत्र में हाथी मौजूद रहे। उनकी चिंघाड़ रह-रह कर सुनाई द रही थी। जिससे गांव के लोग सहमे रहे। गांव निवासी रघुराज, सुख्खा, भगौती आदि ने बताया कि रात तीन बजे तक चिंघाड़ सुनाई पड़ती रही, जिससे वह सभी सो नहीं सके। सुबह हाथियों का झुंड नहर में नहाता दिखा।
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बिशुनापुर के ग्रामीणों का कहना है कि वनाधिकारियों को नेपाली हाथियों के दस्तक से अवगत करा दिया गया है। लेकिन अब तक सुरक्षा के समुचित इंतजाम नहीं हुए हैं। उधर, डीएफओ जीपी सिंह ने कहा कि नेपाल से आने वाले हाथी के झुंड को रोका नहीं जा सकता। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए 20 सदस्यीय टीम गठित है। टीम निरंतर गश्त कर रही है। ग्रामीणों को भी सजग रहकर अपनी सुरक्षा करनी होगी।