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घाघरा की कटान, डीएम का मुआयना
Updated Tue, 31 Jul 2018 10:33 PM IST
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बहराइच। घाघरा की कटान थम नहीं रही है। मिहींपुरवा और महसी क्षेत्र में नदी की लहरें तबाही का सबब बनी हुई हैं। मिहींपुरवा के गिरगिट्टी गांव निवासी तीन ग्रामीणों के आशियाने नदी की कटान की भेंट चढ़ गए।
तनाजा गांव में बाढ़ के बीच फंसे ग्रामीणों को नाव की सहायता से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। महसी क्षेत्र में भी नदी की लहरों ने 80 बीघा खेती योग्य जमीन की कटान की।
यहां पर जिलाधिकारी ने भी दौरा कर बाढ़ व कटान प्रभावितों का हालचाल जाना। तराई व नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बरसात से घाघरा नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर ऊपर है।
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मिहींपुरवा क्षेत्र के गांवों में बाढ़ की स्थिति है। तनाजा गांव सोमवार को बाढ़ के पानी से घिर गया था। ग्रामीण बाढ़ में फंसे हुए थे।
तहसीलदार केशव प्रसाद की अगुवाई में राजस्व टीम ने गांव पहुंचकर नाव की सहायता से फंसे 23 परिवारों को निकलवाकर ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया। गिरगिट्टी गांव अब नदी के निशाने पर आ गया है।
गांव निवासी सांवली प्रसाद, पेशकार और बद्री के मकान सोमवार रात को नदी की लहरों में समाहित हो गए। जैसे-तैसे परिवारीजनों की जान बच सकी।
उधर, महसी के पिपरी, पिपरा, गोलागंज और कोठार गांव के निकट नदी की लहरें कटान कर रही हैं। उफनाई घाघरा की सूचना पाकर जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव ने मंगलवार को अपर जिलाधिकारी रामसुरेश वर्मा के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया। समस्याओं को सुनकर निराकरण का आश्वासन दिया।
डीएम से बोले ग्रामीण, अभी तक पिछले वर्ष का नहीं मिला मुआवजा
जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव मंगलवार को बाढ़ व कटान प्रभावित गोलागंज गांव पहुंच गईं। गांव निवासी कृपाराम, रामलौटन आदि ने बताया कि बीते वर्ष बाढ़ के दौरान फसलें तबाह हो गई थीं लेकिन अभी तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला।
इस पर डीएम अधिकारियों पर बिफर पड़ीं। तत्काल पीड़ितों को मुआवजा देने के निर्देश दिए। बसंतलाल व बहोरी ने बाढ़ में ठहरने की समुचित व्यवस्था न होने की समस्या बताई। टीकाकरण न होने की भी जानकारी दी।
इस पर डीएम ने सभी व्यवस्थाएं तत्काल करवाने के निर्देश दिए। प्रधान गोलागंज ओंकार सिंह ने डीएम को बताया कि राजापुरवा, लोनियनपुरवा, खेल्लूपुरवा व थड़बेहना नदी के उस पार हैं, जहां स्थिति भयावह है। वहां के ग्रामीणों के लिए डीएम ने नदी के इस पार भूमि आवंटन के निर्देश दिए।
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तनाजा गांव में बाढ़ के बीच फंसे ग्रामीणों को नाव की सहायता से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। महसी क्षेत्र में भी नदी की लहरों ने 80 बीघा खेती योग्य जमीन की कटान की।
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यहां पर जिलाधिकारी ने भी दौरा कर बाढ़ व कटान प्रभावितों का हालचाल जाना। तराई व नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बरसात से घाघरा नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर ऊपर है।
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मिहींपुरवा क्षेत्र के गांवों में बाढ़ की स्थिति है। तनाजा गांव सोमवार को बाढ़ के पानी से घिर गया था। ग्रामीण बाढ़ में फंसे हुए थे।
तहसीलदार केशव प्रसाद की अगुवाई में राजस्व टीम ने गांव पहुंचकर नाव की सहायता से फंसे 23 परिवारों को निकलवाकर ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया। गिरगिट्टी गांव अब नदी के निशाने पर आ गया है।
गांव निवासी सांवली प्रसाद, पेशकार और बद्री के मकान सोमवार रात को नदी की लहरों में समाहित हो गए। जैसे-तैसे परिवारीजनों की जान बच सकी।
उधर, महसी के पिपरी, पिपरा, गोलागंज और कोठार गांव के निकट नदी की लहरें कटान कर रही हैं। उफनाई घाघरा की सूचना पाकर जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव ने मंगलवार को अपर जिलाधिकारी रामसुरेश वर्मा के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया। समस्याओं को सुनकर निराकरण का आश्वासन दिया।
डीएम से बोले ग्रामीण, अभी तक पिछले वर्ष का नहीं मिला मुआवजा
जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव मंगलवार को बाढ़ व कटान प्रभावित गोलागंज गांव पहुंच गईं। गांव निवासी कृपाराम, रामलौटन आदि ने बताया कि बीते वर्ष बाढ़ के दौरान फसलें तबाह हो गई थीं लेकिन अभी तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला।
इस पर डीएम अधिकारियों पर बिफर पड़ीं। तत्काल पीड़ितों को मुआवजा देने के निर्देश दिए। बसंतलाल व बहोरी ने बाढ़ में ठहरने की समुचित व्यवस्था न होने की समस्या बताई। टीकाकरण न होने की भी जानकारी दी।
इस पर डीएम ने सभी व्यवस्थाएं तत्काल करवाने के निर्देश दिए। प्रधान गोलागंज ओंकार सिंह ने डीएम को बताया कि राजापुरवा, लोनियनपुरवा, खेल्लूपुरवा व थड़बेहना नदी के उस पार हैं, जहां स्थिति भयावह है। वहां के ग्रामीणों के लिए डीएम ने नदी के इस पार भूमि आवंटन के निर्देश दिए।