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आलू और मक्का के किसानों को फूड प्रोसेसिंग यूनिट न होने से हो रहा नुकसान
Updated Sun, 10 Sep 2017 10:03 PM IST
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बहराइच। जनपद में मक्का की फसल की पैदावार अधिक रहती है। वहीं केले की भी अच्छी पैदावार होती है। आलू का उत्पादन भी जिले में बेहतर होता है। मगर फूड प्रोसेसिंग यूनिट नहीं होने से किसानों को औन-पौने दामों में अपनी फसल बेचने को मजबूर होना पड़ता है। बहराइच में भी प्रतिदिन बाहर की मंडियों से पांच हजार क्विंटल आलू पहुंच रहा है।
बहराइच जनपद की जमीन काफी उपजाऊ है। घाघरा नदी के कछार से लगे इलाकों में सब्जी और फलों की अच्छी पैदावार होती है तो वहीं जिले में गेहूं और धान की पैदावार भी काफी बेहतर रहती है। इसके अलावा बहराइच जनपद का मक्का काफी प्रसिद्ध है। बहराइच जनपद में 80 हजार हेक्टेयर में मक्के की बोआई की गई है। जिससे लगभग डेढ़ लाख क्विंटल से अधिक मक्का उत्पादन होने की संभावना है। मक्के के भारी उत्पादन के बाद भी बहराइच में इसकी कोई फूड प्रोसेसिंग यूनिट नहीं है। जिसके चलते किसानों को अपनी उपज बाहर की मंडियों में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। बहराइच में लगभग 60 हजार क्विंटल आलू की पैदावार भी होती है। लेकिन आलू के लिए बाजार नहीं उपलब्ध होने से किसानों की लागत भी नहीं निकल पाती। अब यूपी सरकार ने ग्रामीण अंचलों में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाने का निर्णय लिया है। इसके चलते किसानों में काफी उम्मीद जगी है।
बिजली आपूर्ति बन सकती मुसीबत
फूड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना के लिए मूलभूत संसाधनों की जरूरत होती है। जनपद में बिजली की आपूर्ति काफी बदहाल है। प्रशासन के दावों के बाद भी महज 14 से 16 घंटे की आपूर्ति ही मिल पा रही है। ऐसे में यूनिट की स्थापना होने पर समस्या पैदा हो सकती है। इसके साथ ही सड़कों की स्थिति भी बदहाल है। ग्रामीण इलाकों में वाहनों का संचालन करने में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह भी प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना में रोडे़ पैदा कर रहा है। यही कारण है कि व्यापारी यूनिट स्थापना के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
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मक्का यूनिट स्थापना के लिए कई बार किए प्रयास
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि जनपद में मक्के की पैदावार काफी अच्छी होती है। इसको देखते हुए कृषि गोष्ठी और किसान मेले में कई बार व्यापारियों को आमंत्रित कर उन्हें जागरूक करने का प्रयास किया गया। लेकिन व्यापारियों ने मूलभूत सुविधाओं का हवाला देते हुए किनारा कस लिया। जबकि यूनिट की स्थापना किए जाने से काफी रोजगार और व्यापार की संभावनाएं हैं।
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बहराइच जनपद की जमीन काफी उपजाऊ है। घाघरा नदी के कछार से लगे इलाकों में सब्जी और फलों की अच्छी पैदावार होती है तो वहीं जिले में गेहूं और धान की पैदावार भी काफी बेहतर रहती है। इसके अलावा बहराइच जनपद का मक्का काफी प्रसिद्ध है। बहराइच जनपद में 80 हजार हेक्टेयर में मक्के की बोआई की गई है। जिससे लगभग डेढ़ लाख क्विंटल से अधिक मक्का उत्पादन होने की संभावना है। मक्के के भारी उत्पादन के बाद भी बहराइच में इसकी कोई फूड प्रोसेसिंग यूनिट नहीं है। जिसके चलते किसानों को अपनी उपज बाहर की मंडियों में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। बहराइच में लगभग 60 हजार क्विंटल आलू की पैदावार भी होती है। लेकिन आलू के लिए बाजार नहीं उपलब्ध होने से किसानों की लागत भी नहीं निकल पाती। अब यूपी सरकार ने ग्रामीण अंचलों में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाने का निर्णय लिया है। इसके चलते किसानों में काफी उम्मीद जगी है।
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बिजली आपूर्ति बन सकती मुसीबत
फूड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना के लिए मूलभूत संसाधनों की जरूरत होती है। जनपद में बिजली की आपूर्ति काफी बदहाल है। प्रशासन के दावों के बाद भी महज 14 से 16 घंटे की आपूर्ति ही मिल पा रही है। ऐसे में यूनिट की स्थापना होने पर समस्या पैदा हो सकती है। इसके साथ ही सड़कों की स्थिति भी बदहाल है। ग्रामीण इलाकों में वाहनों का संचालन करने में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह भी प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना में रोडे़ पैदा कर रहा है। यही कारण है कि व्यापारी यूनिट स्थापना के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
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मक्का यूनिट स्थापना के लिए कई बार किए प्रयास
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि जनपद में मक्के की पैदावार काफी अच्छी होती है। इसको देखते हुए कृषि गोष्ठी और किसान मेले में कई बार व्यापारियों को आमंत्रित कर उन्हें जागरूक करने का प्रयास किया गया। लेकिन व्यापारियों ने मूलभूत सुविधाओं का हवाला देते हुए किनारा कस लिया। जबकि यूनिट की स्थापना किए जाने से काफी रोजगार और व्यापार की संभावनाएं हैं।