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Bahraich News: कागजों पर बने गए 12 हजार शौचालय, हजम हो गए 14 करोड़
Sun, 09 Jun 2024 01:58 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sun, 09 Jun 2024 01:58 AM IST
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ग्राम पंचायतों में सामने आया शौचालय निर्माण का घपला
मिहींपुरवा ब्लॉक में जमकर हुआ खेल, मामला सामने आने के बाद सीडीओ ने जांच के लिए गठित की कमेटी
बहराइच। ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण में बड़ा घालमेल सामने आया है। करीब 12 हजार शौचालय कागजों में ही बना दिए गए। इस काम के करीब 14 करोड़ रुपये हजम हो गए। अफसरों ने जब संबंधित गांवों में दौरा किया तो लोगों ने शिकायत किया कि शौचालय बने ही नहीं है। इसके बाद सीडीओ ने पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की है। डीपीआरओ द्वारा संबंधित गांवों में जाकर इस मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है। यदि सही तरीके से जांच हुई तो इसमें कइयों की गर्दन नप सकती है।
सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में रहने वाले प्रत्येक परिवार को शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। लेकिन जिले में इसके नाम पर ब्लॉक के बीडीओ, ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम प्रधान से लेकर अन्य लोग अपनी जेब गर्म करने में जुटे है। यहां पर 14 ब्लॉक हैं। इनमें से मिहींपुरवा ब्लॉक ऐसा है जहां पर सबसे ज्यादा घपला शौचालय निर्माण में हुआ है। जिला प्रशासन से जुड़े विश्वस सूत्रों की मानें तो करीब आधा दर्जन ब्लॉक ऐसे हैं जहां करीब 12 हजार शौचालय कागजों में ही बनाकर इसका करीब 14 करोड़ रुपये हजम कर लिया गया है। यह मामला करीब दो साल पुराना बताया जाता है। लेकिन अब जब घपले की बात सामने आई है तो पंचायती राज से लेकर संबंधित विभागों में में अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया है। हालांकि जिला प्रशासन के स्तर से पूरे मामले की जांच शुरू कराई गई है। जांच पूरी होने के बाद यह पता लग सकेगा कि यह घपला कितना बड़ा है। संवाद
मिहींपुरवा ब्लॉक में सबसे ज्यादा घपला
ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्य व शौचालय निर्माण में सबसे ज्यादा घपला जिले के मिहींपुरवा ब्लॉक में हुआ है। यहां तमाम ऐसे गांव है जहां पर कागजी कोरम पूरा कर शौचालय निर्माण का पैसा हजम कर लिया गया। संबंधित विभाग से जुडे़ लोगों की जेब खूब गर्म होती रही जिससे मामले को दबाए रखा गया। बीते दिनों तमाम ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की। इसके बाद सीडीओ ने इस मामले के लिए जांच शुरू कराई है। इस पूरे मामले की शिकायत ग्रामीणों द्वारा शासन स्तर पर भी की गई है। इसी तरह बलहा, शिवपुर, महसी, कैसरगंज, रिसिया आदि जगहों पर भी जमकर खेल किया गया है। लेकिन अब जांच में कौन फंसता है और जांच सही होती है या फिर घोटालेबाजों को बचाने का प्रयास होता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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बाक्स-
पहले भी हुआ घालमेल, डीपीआरओ हो चुके निलंबित
पंचायती राज विभाग में घालमेल का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी विभाग में शौचालय व कोरोना के समय गांवों में जागरूकता होर्डिंग्स लगाने में घपला हो चुका है। इस पूरे मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी शंभू कुमार ने शासन को पत्र भी लिखा था। इसके बाद जांच हुई। करीब एक साल पहले जिले में तैनात रहे तत्कालीन डीपीआरओ उमाकांत पांडेय को शासन ने निलंबित भी किया था। लेकिन इसके बाद फिर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।
सोनवा गांव में जाकर की जांच
कागजों में शौचालय निर्माण होने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसको लेकर जांच शुरू कर दी गई है। मिहींपुरवा ब्लॉक के सोनवा गांव में जाकर जांच की गई है। गड़बड़ियां मिली हैं। जांच पूरी होने के बाद ही जानकारी सामने आ सकेगी। राघवेंद्र द्विवेदी, डीपीआरओ
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मिहींपुरवा ब्लॉक में जमकर हुआ खेल, मामला सामने आने के बाद सीडीओ ने जांच के लिए गठित की कमेटी
बहराइच। ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण में बड़ा घालमेल सामने आया है। करीब 12 हजार शौचालय कागजों में ही बना दिए गए। इस काम के करीब 14 करोड़ रुपये हजम हो गए। अफसरों ने जब संबंधित गांवों में दौरा किया तो लोगों ने शिकायत किया कि शौचालय बने ही नहीं है। इसके बाद सीडीओ ने पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की है। डीपीआरओ द्वारा संबंधित गांवों में जाकर इस मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है। यदि सही तरीके से जांच हुई तो इसमें कइयों की गर्दन नप सकती है।
सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में रहने वाले प्रत्येक परिवार को शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। लेकिन जिले में इसके नाम पर ब्लॉक के बीडीओ, ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम प्रधान से लेकर अन्य लोग अपनी जेब गर्म करने में जुटे है। यहां पर 14 ब्लॉक हैं। इनमें से मिहींपुरवा ब्लॉक ऐसा है जहां पर सबसे ज्यादा घपला शौचालय निर्माण में हुआ है। जिला प्रशासन से जुड़े विश्वस सूत्रों की मानें तो करीब आधा दर्जन ब्लॉक ऐसे हैं जहां करीब 12 हजार शौचालय कागजों में ही बनाकर इसका करीब 14 करोड़ रुपये हजम कर लिया गया है। यह मामला करीब दो साल पुराना बताया जाता है। लेकिन अब जब घपले की बात सामने आई है तो पंचायती राज से लेकर संबंधित विभागों में में अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया है। हालांकि जिला प्रशासन के स्तर से पूरे मामले की जांच शुरू कराई गई है। जांच पूरी होने के बाद यह पता लग सकेगा कि यह घपला कितना बड़ा है। संवाद
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मिहींपुरवा ब्लॉक में सबसे ज्यादा घपला
ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्य व शौचालय निर्माण में सबसे ज्यादा घपला जिले के मिहींपुरवा ब्लॉक में हुआ है। यहां तमाम ऐसे गांव है जहां पर कागजी कोरम पूरा कर शौचालय निर्माण का पैसा हजम कर लिया गया। संबंधित विभाग से जुडे़ लोगों की जेब खूब गर्म होती रही जिससे मामले को दबाए रखा गया। बीते दिनों तमाम ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की। इसके बाद सीडीओ ने इस मामले के लिए जांच शुरू कराई है। इस पूरे मामले की शिकायत ग्रामीणों द्वारा शासन स्तर पर भी की गई है। इसी तरह बलहा, शिवपुर, महसी, कैसरगंज, रिसिया आदि जगहों पर भी जमकर खेल किया गया है। लेकिन अब जांच में कौन फंसता है और जांच सही होती है या फिर घोटालेबाजों को बचाने का प्रयास होता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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पहले भी हुआ घालमेल, डीपीआरओ हो चुके निलंबित
पंचायती राज विभाग में घालमेल का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी विभाग में शौचालय व कोरोना के समय गांवों में जागरूकता होर्डिंग्स लगाने में घपला हो चुका है। इस पूरे मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी शंभू कुमार ने शासन को पत्र भी लिखा था। इसके बाद जांच हुई। करीब एक साल पहले जिले में तैनात रहे तत्कालीन डीपीआरओ उमाकांत पांडेय को शासन ने निलंबित भी किया था। लेकिन इसके बाद फिर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।
सोनवा गांव में जाकर की जांच
कागजों में शौचालय निर्माण होने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसको लेकर जांच शुरू कर दी गई है। मिहींपुरवा ब्लॉक के सोनवा गांव में जाकर जांच की गई है। गड़बड़ियां मिली हैं। जांच पूरी होने के बाद ही जानकारी सामने आ सकेगी। राघवेंद्र द्विवेदी, डीपीआरओ