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घाघरा नदी की कटान जारी, 11 मकान 50 बीघा खेत नदी में समाहित
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महसी/बौंडी। महसी तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी ने कटान तेज कर दी है। टिकुरी नईबस्ती और मांझा दरिया बुर्द गांव में नदी ने कटान करते हुए 11 ग्रामीणों के आशियाने व 50 बीघे खेत को अपनी धारा में समाहित कर लिया है। दूसरी ओर ग्रामीण घर उजाड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं लेकिन पीड़ित ग्रामीणों को तहसील प्रशासन की ओर से अभी तक मदद नहीं दी गई है।
महसी तहसील क्षेत्र में घाघरा का जलस्तर स्थिर हो गया है लेकिन नदी ने कटान तेज कर दी है। तहसील के टिकुरी नईबस्ती गांव निवासी सुमेर, राजित, रीमा पत्नी शिवनरायन, कोयली व जगदीश के मकान कट गए हैं। इसके अलावा इन्हीं ग्रामीणों की 50 बीघा कृषि योग्य जमीन भी नदी में समाहित हो गई है।
ग्रामीणों में कटान को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है लेकिन तहसील प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं की जा रही है। ग्रामीण घर के बचे-खुचे सामान को समेटकर सुरक्षित स्थान की ओर ले जाने में लगे हुए हैं।
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उधर इसी तहसील क्षेत्र के मांझा दरिया बुर्द गांव निवासी गंगाराम, मिश्रीलाल, बालकराम, वीरेंद्र और मायावती के मकान भी नदी में समाहित हो गए। सभी के मकान फूस के बने हुए थे। वहीं नदी खेती योग्य जमीन को भी आगोश में ले रही है।
महसी के तहसीलदार राजेश वर्मा ने बताया कि ग्रामीणों के फूस के मकान नदी में कटे हैं। उनके खाते में अहेतुक सहायता राशि भेजी जा रही है। तहसील प्रशासन द्वारा पालिथीन उपलब्ध करा दी गई है। कोटेदारों को राशन आदि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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महसी तहसील क्षेत्र में घाघरा का जलस्तर स्थिर हो गया है लेकिन नदी ने कटान तेज कर दी है। तहसील के टिकुरी नईबस्ती गांव निवासी सुमेर, राजित, रीमा पत्नी शिवनरायन, कोयली व जगदीश के मकान कट गए हैं। इसके अलावा इन्हीं ग्रामीणों की 50 बीघा कृषि योग्य जमीन भी नदी में समाहित हो गई है।
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ग्रामीणों में कटान को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है लेकिन तहसील प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं की जा रही है। ग्रामीण घर के बचे-खुचे सामान को समेटकर सुरक्षित स्थान की ओर ले जाने में लगे हुए हैं।
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उधर इसी तहसील क्षेत्र के मांझा दरिया बुर्द गांव निवासी गंगाराम, मिश्रीलाल, बालकराम, वीरेंद्र और मायावती के मकान भी नदी में समाहित हो गए। सभी के मकान फूस के बने हुए थे। वहीं नदी खेती योग्य जमीन को भी आगोश में ले रही है।
महसी के तहसीलदार राजेश वर्मा ने बताया कि ग्रामीणों के फूस के मकान नदी में कटे हैं। उनके खाते में अहेतुक सहायता राशि भेजी जा रही है। तहसील प्रशासन द्वारा पालिथीन उपलब्ध करा दी गई है। कोटेदारों को राशन आदि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।