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हेपेटाइटिस के मरीजों का स्वास्थ्य महकमे के पास नहीं है डेटा बेस
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:02 PM IST
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बहराइच। अंतरराष्ट्रीय हेपेटाइटिस दिवस पर स्वास्थ्य विभाग ने हेपेटाइटिस को खत्म करने का संकल्प तो जरूर लिया, लेकिन हेपेटाइटिस जैसे गंभीर रोग के पीड़ितों का स्वास्थ्य महकमे के पास कोई भी डाटाबेस नहीं है। वहीं, अस्पतालों में हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता के भी कोई इंतजाम नहीं हैं।
हेपेटाइटिस की बीमारी काफी गंभीर मानी जाती है। हेपेटाइटिस के मरीजाें के शरीर में खून की कमी होने के साथ ही संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। लेकिन बहराइच का स्वास्थ्य महकमा इस रोग के प्रति बिल्कुल उदासीन है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस के मरीजों का सिर्फ ओपीडी में इलाज होता है।
लेकिन हेपेटाइटिस के मरीजों का श्रेणीवार कोई भी डाटाबेस स्वास्थ्य महकमे के पास उपलब्ध नहीं हैं। जिला अस्पताल के साथ ही जिला महिला अस्पताल में नवजात को टीकाकरण के दौरान हेपेटाइटिस का टीका लगाने की सुविधा जरूर उपलब्ध है। हालांकि इसके प्रचार-प्रसार की कोई व्यवस्था नहीं है।
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वहीं, जागरूकता की कमी है, जिससे लोगों को इस गंभीर बीमारी से बचाव की कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। रोग की चपेट में आने के बाद ही रोगी को हेपेटाइटिस के संक्रमण का पता चल पाता है।
हेपेटाइटिस के लक्षण
- पाचन क्रिया खराब होना।
- खून की कमी होना।
- पेट व शरीर में दर्द होना।
- कमजोरी महसूस होना।
- शरीर का पीला पड़ना और काफी कमजोर होना।
शुरुआती मरीजों का होता है इलाज
जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस से पीड़ित शुरुआती मरीजों का ही इलाज होता है। ए, बी व सी के स्टेज के मरीजों को अस्पताल प्रशासन द्वारा लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। यहां पर इस गंभीर रोग के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
वैक्सीन उपलब्ध, बचाव के हैं इंतजाम
हेपेटाइटिस से पीड़ित मरीजों के लिए जिला अस्पताल व सीएचसी पर वैक्सीन उपलब्ध है। साथ ही बच्चों को टीके स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा लगाए जा रहे हैं। रोकथाम के लिए सभी को जागरूक किया जाता है। हेपेटाइटिस डे के अवसर पर कार्यक्रम भी आयोजित होगा।
डॉ. अरुण पांडेय, मुख्य चिकित्साधिकारी
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हेपेटाइटिस की बीमारी काफी गंभीर मानी जाती है। हेपेटाइटिस के मरीजाें के शरीर में खून की कमी होने के साथ ही संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। लेकिन बहराइच का स्वास्थ्य महकमा इस रोग के प्रति बिल्कुल उदासीन है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस के मरीजों का सिर्फ ओपीडी में इलाज होता है।
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लेकिन हेपेटाइटिस के मरीजों का श्रेणीवार कोई भी डाटाबेस स्वास्थ्य महकमे के पास उपलब्ध नहीं हैं। जिला अस्पताल के साथ ही जिला महिला अस्पताल में नवजात को टीकाकरण के दौरान हेपेटाइटिस का टीका लगाने की सुविधा जरूर उपलब्ध है। हालांकि इसके प्रचार-प्रसार की कोई व्यवस्था नहीं है।
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वहीं, जागरूकता की कमी है, जिससे लोगों को इस गंभीर बीमारी से बचाव की कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। रोग की चपेट में आने के बाद ही रोगी को हेपेटाइटिस के संक्रमण का पता चल पाता है।
हेपेटाइटिस के लक्षण
- पाचन क्रिया खराब होना।
- खून की कमी होना।
- पेट व शरीर में दर्द होना।
- कमजोरी महसूस होना।
- शरीर का पीला पड़ना और काफी कमजोर होना।
शुरुआती मरीजों का होता है इलाज
जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस से पीड़ित शुरुआती मरीजों का ही इलाज होता है। ए, बी व सी के स्टेज के मरीजों को अस्पताल प्रशासन द्वारा लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। यहां पर इस गंभीर रोग के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
वैक्सीन उपलब्ध, बचाव के हैं इंतजाम
हेपेटाइटिस से पीड़ित मरीजों के लिए जिला अस्पताल व सीएचसी पर वैक्सीन उपलब्ध है। साथ ही बच्चों को टीके स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा लगाए जा रहे हैं। रोकथाम के लिए सभी को जागरूक किया जाता है। हेपेटाइटिस डे के अवसर पर कार्यक्रम भी आयोजित होगा।
डॉ. अरुण पांडेय, मुख्य चिकित्साधिकारी