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बरवलियाघाट गांव के 101 घर राख
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 03 Feb 2016 09:42 PM IST
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जरवलरोड/जरवल। बरवलियाघाट गांव में बुधवार सुबह घूर के ढेर से भड़की चिन्गारी तबाही का सबब बन गई। आग की लपटों ने कुछ ही पल में पूरे गांव को आगोश में ले लिया। 165 में से 101 मकान राख हो गए हैं।
संपत्ति और मवेशियों को बचाने में चार ग्रामीण गंभीर रूप से झुलस गए। छह मवेशी भी घायल हुए हैं। सूचना के बावजूद तीन घंटे बाद दमकल मौके पर पहुंचा।
तब तक ग्रामीण काफी हद तक आग पर काबू पा चुके थे। हादसे में लगभग एक करोड़ की संपत्ति के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
जरवलरोड थाना क्षेत्र के बरवलियाघाट गांव निवासी रामचंदर यादव ने बुधवार सुबह अलाव तापने के बाद राख को घर के पास ही घूर पर फेंक दिया।
आठ बजे के आसपास ज्यादातर ग्रामीण मेहनत-मजदूरी करने जरवलरोड बाजार और जरवल निकल गए। दस बजे के करीब घूर पर पड़ी राख में दबी चिन्गारी तेज हवा के कारण भड़क उठी।
पल भर में ही लपटों ने रामचंदर और उनके पड़ोसी राजू के मकान को आगोश में ले लिया। घर में मौजद महिलाएं और बच्चे जान बचाकर भागे।
शोर सुनकर ग्रामीण दौड़े लेकिन तब तक लपटों ने आधे से अधिक गांव को आगोश में ले लिया। चीख-पुकार मच गई। सूचना पाकर ग्राम परसा के प्रधान दुर्गेश चौधरी मौके पर पहुंचे।
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उन्होंने थाने पर सूचना दी लेकिन दमकल तीन घंटे बाद मौके पर पहुंच सका। तब तक 101 आशियाने आग की भेंट चढ़ गए। सूचना पाकर जरवलरोड बाजार काम करने गए ग्रामीण भी भागकर घर पहुंचे।
घर से संपत्ति निकालने में शिव प्रसाद, राममूरत, राजू और रामचंदर झुलस गए। वहीं, रामचंदर के घर में बंधी चार भैंसें भी झुलस गई हैं। राजू के दो मवेशी भी झुलस गए हैं।
आग से गृहस्थी को बचाने के लिए 50 से अधिक ग्रामीणों ने तत्काल अपने आशियाने खुद उजाड़ लिए। अब पूरा गांव खंडहर में तब्दील नजर आ रहा है।
आग से लोगों के घर में अनाज, कपड़ा, बर्तन, जेवर, नकदी सब राख हो गया है। सूचना पाकर तहसीलदार डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी, थानाध्यक्ष धनंजय सिंह, क्षेत्रीय लेखपाल बुद्धिराम, राजस्व निरीक्षक गिरधारी लाल ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया।
पूर्व विधायक रामतेज यादव, सपा नेता नूर हुसैन समेत अन्य ने भी पीड़ितों को ढांढस बंधाया।
चारों तरफ मची चीख-पुकार
अग्निकांड की भेंट चढ़े 101 आशियानों में से 65 आवासीय मकान होने की पुष्टि तहसीलदार डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी ने की है। इन मकानों में रहने वाले 600 से अधिक लोग खुले आसमान तले गुजर-बसर करने को मजबूर हो गए हैं।
अपनी पूरी संपत्ति को जला देखकर महिलाओं के आंसू थम नहीं रहे हैं। अग्निकांड में झुलसे ग्रामीणों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाकर प्राथमिक उपचार कराया गया है। पीड़ित परिवारों के पास न तो खाने को अनाज बचा न ही ठंड से बचने के लिए बिस्तर।
चार बार हुए धमाके
मकान जब जल रहे थे तो रह-रह कर चार बार धमाके हुए। यह धमाके गांव निवासी विनोद कुुमार व रामू के घरों में हुए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोनों घरों में रसोई गैस सिलेंडर फटने के चलते धमाका हुआ। हालांकि, इन धमाकों में कोई घायल नहीं हुआ।
वर्ष 2008 में जले थे 130 मकान
जरवलरोड का पश्चिमी हिस्सा बाढ़ व कटान प्रभावित है। बीते वर्षों में अहाता, नासिरगंज और रेतीहाता गांव में बाढ़ व कटान पीड़ित परिवारों ने आदमपुर रेवली तटबंध के पास बरवलिया घाट पर शरण ली थी।
बरवलियाघाट गांव को वर्ष 1995 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत परसा परिक्षेेत्र में ग्राम समाज की जमीन पर बसाया था।
इसके बाद लगभग 165 परिवारों ने अपना आशियाना बरवलिया घाट पर बना लिया। आधे दशक से बरवलियाघाट गांव आबाद है। इस गांव में ज्यादातर मकान फूस के हैं। मार्च 2008 में भी अग्निकांड की घटना हुई थी, जिसमें 130 मकान जले थे।
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संपत्ति और मवेशियों को बचाने में चार ग्रामीण गंभीर रूप से झुलस गए। छह मवेशी भी घायल हुए हैं। सूचना के बावजूद तीन घंटे बाद दमकल मौके पर पहुंचा।
तब तक ग्रामीण काफी हद तक आग पर काबू पा चुके थे। हादसे में लगभग एक करोड़ की संपत्ति के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
जरवलरोड थाना क्षेत्र के बरवलियाघाट गांव निवासी रामचंदर यादव ने बुधवार सुबह अलाव तापने के बाद राख को घर के पास ही घूर पर फेंक दिया।
आठ बजे के आसपास ज्यादातर ग्रामीण मेहनत-मजदूरी करने जरवलरोड बाजार और जरवल निकल गए। दस बजे के करीब घूर पर पड़ी राख में दबी चिन्गारी तेज हवा के कारण भड़क उठी।
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पल भर में ही लपटों ने रामचंदर और उनके पड़ोसी राजू के मकान को आगोश में ले लिया। घर में मौजद महिलाएं और बच्चे जान बचाकर भागे।
शोर सुनकर ग्रामीण दौड़े लेकिन तब तक लपटों ने आधे से अधिक गांव को आगोश में ले लिया। चीख-पुकार मच गई। सूचना पाकर ग्राम परसा के प्रधान दुर्गेश चौधरी मौके पर पहुंचे।
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उन्होंने थाने पर सूचना दी लेकिन दमकल तीन घंटे बाद मौके पर पहुंच सका। तब तक 101 आशियाने आग की भेंट चढ़ गए। सूचना पाकर जरवलरोड बाजार काम करने गए ग्रामीण भी भागकर घर पहुंचे।
घर से संपत्ति निकालने में शिव प्रसाद, राममूरत, राजू और रामचंदर झुलस गए। वहीं, रामचंदर के घर में बंधी चार भैंसें भी झुलस गई हैं। राजू के दो मवेशी भी झुलस गए हैं।
आग से गृहस्थी को बचाने के लिए 50 से अधिक ग्रामीणों ने तत्काल अपने आशियाने खुद उजाड़ लिए। अब पूरा गांव खंडहर में तब्दील नजर आ रहा है।
आग से लोगों के घर में अनाज, कपड़ा, बर्तन, जेवर, नकदी सब राख हो गया है। सूचना पाकर तहसीलदार डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी, थानाध्यक्ष धनंजय सिंह, क्षेत्रीय लेखपाल बुद्धिराम, राजस्व निरीक्षक गिरधारी लाल ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया।
पूर्व विधायक रामतेज यादव, सपा नेता नूर हुसैन समेत अन्य ने भी पीड़ितों को ढांढस बंधाया।
चारों तरफ मची चीख-पुकार
अग्निकांड की भेंट चढ़े 101 आशियानों में से 65 आवासीय मकान होने की पुष्टि तहसीलदार डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी ने की है। इन मकानों में रहने वाले 600 से अधिक लोग खुले आसमान तले गुजर-बसर करने को मजबूर हो गए हैं।
अपनी पूरी संपत्ति को जला देखकर महिलाओं के आंसू थम नहीं रहे हैं। अग्निकांड में झुलसे ग्रामीणों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाकर प्राथमिक उपचार कराया गया है। पीड़ित परिवारों के पास न तो खाने को अनाज बचा न ही ठंड से बचने के लिए बिस्तर।
चार बार हुए धमाके
मकान जब जल रहे थे तो रह-रह कर चार बार धमाके हुए। यह धमाके गांव निवासी विनोद कुुमार व रामू के घरों में हुए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोनों घरों में रसोई गैस सिलेंडर फटने के चलते धमाका हुआ। हालांकि, इन धमाकों में कोई घायल नहीं हुआ।
वर्ष 2008 में जले थे 130 मकान
जरवलरोड का पश्चिमी हिस्सा बाढ़ व कटान प्रभावित है। बीते वर्षों में अहाता, नासिरगंज और रेतीहाता गांव में बाढ़ व कटान पीड़ित परिवारों ने आदमपुर रेवली तटबंध के पास बरवलिया घाट पर शरण ली थी।
बरवलियाघाट गांव को वर्ष 1995 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत परसा परिक्षेेत्र में ग्राम समाज की जमीन पर बसाया था।
इसके बाद लगभग 165 परिवारों ने अपना आशियाना बरवलिया घाट पर बना लिया। आधे दशक से बरवलियाघाट गांव आबाद है। इस गांव में ज्यादातर मकान फूस के हैं। मार्च 2008 में भी अग्निकांड की घटना हुई थी, जिसमें 130 मकान जले थे।