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यमुना का जलस्तर बढ़ा, सैकड़ों बीघा फसल डूबी
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हे.... प्रभु या खुदा ये क्या हो गया बर्बाद हो गए हम.... बागपत यमुना में फसलें जलमग्र होने के बाद मायूस ब?
- फोटो : BAGHPAT
बागपत। किसानों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्र में दो दिन तक बारिश और हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी के कारण यमुना का जलस्तर बढ़ गया है। जिले के करीब 65 किलोमीटर के एरिया में सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूब गई। गेहूं, चारे के अलावा तरबूज, खरबूजे, ककड़ी, खीरे, भिंडी और अन्य सब्जी की फसलों को नुकसान होने का खतरा है।
दो दिन तक हुई बारिश और ओलावृष्टि से अब भी मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। यमुना में बारिश के पानी के अलावा हथिनीकुंड बैराज से 352 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे यमुना का जल स्तर बढ़ गया। इससे खादर क्षेत्र में गेहूं, सरसों और चारे के अलावा प्लेज यानी खरबूजे-तरबूज व ककड़ी की फसल में पानी पहुंच गया है। कई किसानों की सैकड़ों बीघा फसल के बर्बाद होने का खतरा है। रविवार को किसान खेत में पहुंचे तो जलभराव देख परेशान हो उठे।
बस्तियों में भी घुसा पानी
जलस्तर बढ़ने के कारण यमुना नदी किनारे की बस्तियों में भी पानी घुस गया। इससे लोगों को परेशानियां उठानी पड़ रही है। इसके अलावा पाली गांव के खेतों में पानी घुस गया, जिससे फसल जलमग्न हो गई और ग्रामीणों के बिटोड़े भी पानी में डूब गए। यमुना खादर में किसानों की झोपड़ियां भी डूब गई।
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इन किसानों को हुआ नुकसान
बागपत। पुराना कस्बा निवासी मुन्ना की पांच बीघा खरबूजा, अतीक की पांच बीघा, महबूब की पांच बीघा, धर्मवीर की लोकी, तरबूज व खरबूजा की 15 बीघा, अकबर की पांच बीघा, बिट्टू की नौ बीघा, यामीन व नूरहसन की 20 बीघा, मेहरबान की 10 बीघा, हारूण की 20, याकूब की 20 बीघा, अनवर व यूसुफ की 30 बीघा, नूरदीन की 10 बीघा, इस्लाम, खलील की 60 बीघा की खरबूजे व तरबूज की फसल जलमग्न हो गई। इसके अलावा धर्मवीर, छोटेलाल, सन्नी चौहान व रहीसुद्दीन की लगभग 40 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न होने के कारण बर्बाद होने की कगार पर है।
बरसात के कारण ही यमुना का जल स्तर बढ़ा है। हथिनीकुंड से मात्र 352 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। निवाड़ा पुल पर 209 मीटर पर खतरे का निशान है। कर्मचारियों को मौके पर भेजकर सही स्थिति की जानकारियां जुटायी जा रही है। - संजीव कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग।
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दो दिन तक हुई बारिश और ओलावृष्टि से अब भी मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। यमुना में बारिश के पानी के अलावा हथिनीकुंड बैराज से 352 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे यमुना का जल स्तर बढ़ गया। इससे खादर क्षेत्र में गेहूं, सरसों और चारे के अलावा प्लेज यानी खरबूजे-तरबूज व ककड़ी की फसल में पानी पहुंच गया है। कई किसानों की सैकड़ों बीघा फसल के बर्बाद होने का खतरा है। रविवार को किसान खेत में पहुंचे तो जलभराव देख परेशान हो उठे।
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बस्तियों में भी घुसा पानी
जलस्तर बढ़ने के कारण यमुना नदी किनारे की बस्तियों में भी पानी घुस गया। इससे लोगों को परेशानियां उठानी पड़ रही है। इसके अलावा पाली गांव के खेतों में पानी घुस गया, जिससे फसल जलमग्न हो गई और ग्रामीणों के बिटोड़े भी पानी में डूब गए। यमुना खादर में किसानों की झोपड़ियां भी डूब गई।
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इन किसानों को हुआ नुकसान
बागपत। पुराना कस्बा निवासी मुन्ना की पांच बीघा खरबूजा, अतीक की पांच बीघा, महबूब की पांच बीघा, धर्मवीर की लोकी, तरबूज व खरबूजा की 15 बीघा, अकबर की पांच बीघा, बिट्टू की नौ बीघा, यामीन व नूरहसन की 20 बीघा, मेहरबान की 10 बीघा, हारूण की 20, याकूब की 20 बीघा, अनवर व यूसुफ की 30 बीघा, नूरदीन की 10 बीघा, इस्लाम, खलील की 60 बीघा की खरबूजे व तरबूज की फसल जलमग्न हो गई। इसके अलावा धर्मवीर, छोटेलाल, सन्नी चौहान व रहीसुद्दीन की लगभग 40 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न होने के कारण बर्बाद होने की कगार पर है।
बरसात के कारण ही यमुना का जल स्तर बढ़ा है। हथिनीकुंड से मात्र 352 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। निवाड़ा पुल पर 209 मीटर पर खतरे का निशान है। कर्मचारियों को मौके पर भेजकर सही स्थिति की जानकारियां जुटायी जा रही है। - संजीव कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग।