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यज्ञ और योग की संस्कृति मनुष्य के लिए उपहार

Tue, 08 Oct 2019 01:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Oct 2019 01:21 AM IST
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yagya aur sanskiriti uphaar
यज्ञ और योग की संस्कृति मनुष्य के लिए उपहार
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दोघट (बागपत)। यज्ञ के ब्रह्मा स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने कहा की ऋषि-मुनियों व पूर्वजों से प्राप्त हवन एवं योग की संस्कृति मनुष्य के लिए सबसे बड़ा उपहार है। यज्ञ संसार का सर्वश्रेष्ठ कर्म है।

यज्ञशाला दाहा में चल रहे तीन दिवसीय ऋग्वेद खंड परायण यज्ञ में धर्मसभा में कहा कि यज्ञ में दी गई आहुति आम जन को सुख पहुंचाती है। जितने भी परोपकार के कार्य है, वह सभी यज्ञ की श्रेणी में आते है। निष्काम कर्मों का फल ही जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष में परमात्मा के आनंद को भोगना है। आचार्य वीरेंद्र वैदिक ने कहा कि जीवन में श्रेष्ठ कर्म करने वाला मनुष्य सदा सुखी रहता है। वर्तमान परिवेश में प्रदूषण दिनों दिन बढ़ रहा है। इसका कारण मनुष्य द्वारा प्रकृति का अत्यधिक दोहन है। सत्यपाल आर्य ने कहा की सभी को प्रतिदिन यज्ञ करना चाहिए। यज्ञ हमारे जीवन में खुशियां भरता है। यज्ञमान विवेक राणा व उनकी पत्नी उदिता राणा रहे। वेदपाठ गुरूकुल भोला झाल टीकरी के ब्रह्मचारियों ने किया। सोमपाल राणा, डॉ. चंद्रवीर राणा, श्याम सिंह, सत्यपाल, कमल राणा, सागर आर्य, राजपाल राणा, सत्यवीर, तेजवीर, जसवीर, इंद्रपाल मौजूद रहे।
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