{"_id":"69387fc534e52cc98a0835a6","slug":"wounds-received-17-years-ago-pain-still-persists-baghpat-news-c-28-1-bag1001-143208-2025-12-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Baghpat News: 17 साल पहले मिले जख्म, दर्द आज भी नहीं हुआ कम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Baghpat News: 17 साल पहले मिले जख्म, दर्द आज भी नहीं हुआ कम
विज्ञापन
पहले मिले जख्म, दर्द अब भी साल रहा की खबर से संबंधित फोटो। अंकुर शर्मा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अतीत के पन्नों से
अग्रवाल मंडी टटीरी चौहरा हत्याकांड :
- अग्रवाल मंडी टटीरी में रंगदारी नहीं देने पर दस दिसंबर 2008 को बदमाशों ने सात व्यापारियों को मारी थी गोली, चार की हो गई थी मौत
- चौहरे हत्याकांड के विरोध में व्यापारियों ने 17 दिन तक बंद रखा था बाजार, देशभर में गूंज पहुंचने पर साथ खड़े हो गए थे व्यापारी
- घटना के बाद कई बड़े व्यापारी मेरठ, दिल्ली समेत अन्य जगहों पर कर गए पलायन, आज भी घटना का दिखता है व्यापार पर असर
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत/अग्रवाल मंडी टटीरी। दस दिसंबर 2008 का दिन अग्रवाल मंडी टटीरी के व्यापारी कभी नहीं भूल पाएंगे। 17 साल पहले शाम करीब छह बजे वहां के व्यापारियों को ऐसा जख्म मिला, जिसका दर्द आज भी कम नहीं हुआ। व्यापारी किशनचंद अग्रवाल, उनके बेटे संजय गोयल, सुमंत प्रसाद, ब्रजमोहन गुप्ता की हत्या कर दी गई तो राजकुमार, नितिन और प्रमोद कुमार घायल हो गए। दहशत में पलायन करने वाले न तो व्यापारी लौटकर आए और न ही कारोबार का पहिया पटरी पर वापस चढ़ पाया।
अग्रवाल मंडी टटीरी में दस दिसंबर 2008 को रंगदारी नहीं देने पर बदमाशों ने व्यापारी किशनचंद अग्रवाल, उनके बेटे संजय गोयल, साबुन व्यापारी सुमंत प्रसाद, ब्रजमोहन गुप्ता की गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। व्यापारी राजकुमार, नरेला निवासी नितिन और प्रमोद कुमार गोली लगने से घायल हो गए थे। इसके विरोध में दो दिन तक बवाल होता रहा था और तोड़फोड़ व आगजनी तक हुई थी। व्यापारियों ने 17 दिन तक बाजार बंद रखा और इस घटना की गूंज देशभर में रही।
सपा मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव, तत्कालीन एडीजी लॉ एंड ऑर्डर बृजलाल, भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत समेत अन्य नेताओं ने टटीरी पहुंचकर विरोध जताया। व्यापारियों ने सभी बदमाशों का एनकाउंटर करने समेत अन्य मांग उठाई। पुलिस ने इस घटना में शामिल बली गांव के बदमाश वीरू और नरेंद्र उर्फ कालू के अलावा खड़खड़ी के राजेश को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। इसके बाद ही बाजार खोला गया। तब टटीरी के अन्य व्यापारियों के घरों में चिट्ठी फेंककर रंगदारी मांगी गई थी तो यहां से बड़े कारोबारी पलायन कर दिल्ली, मेरठ समेत अन्य जगहों पर चले गए। वह दोबारा यहां नहीं आए।
विज्ञापन
- ये बड़े व्यापारी कर गए पलायन
अग्रवाल मंडी टटीरी में भट्ठा मालिक हेमराज जैन के बेटे मुकेश को भी गोली मारी गई थी। इससे भयभीत हेमराज जैन अपने परिवार के साथ शाहदरा चले गए। इनके अलावा व्यापारी वीरेंद्र बंसल मेरठ चले गए और व्यापारी ओमप्रकाश मुन्नी, कृष्ण भट्ठे वाले, प्रमोद गुप्ता, यशपाल जैन समेत अन्य भी पलायन कर गए। इनमें किसी का सीमेंट का व्यापार था तो कोई पशु आहार व किरयाना की थोक की बड़ी दुकान करता था। यह जरूर अब राहत की बात है कि वर्ष 2015 के बाद किसी ने परेशान होकर पलायन नहीं किया अगर कोई यहां से गया है तो वह निजी कारणों से गया है।
- भाई और पिता की हत्या से सबकुछ बर्बाद हो गया : राजकुमार
गोली लगने से घायल हुए व्यापारी राजकुमार ने बताया कि उस घटना ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। घटना में पिता किशनचंद अग्रवाल और बड़े भाई संजय की हत्या कर दी गई और गोली लगने से वह भी घायल हो गया था। काफी समय तक अस्पताल में उपचार होता रहा। 17 दिन तक बाजार बंद रहने के कारण ग्राहकों ने बड़ौत, अमीनगर सराय, बागपत और दिल्ली की तरफ रुख कर लिया, जो 17 साल बाद भी कस्बे के बाजार में वापस नहीं आए। इसलिए व्यापार भी काफी सिमट गया। उस समय मिलने आए तत्कालीन एडीजी लॉ एंड आर्डर बृजलाल ने टटीरी में रिपोर्टिंग चौकी बनाने का वायदा किया था, लेकिन अभी तक वायदा पूरा नहीं हुआ।
- आंगन में कागज का टुकड़ा मिलते ही डर जाता था परिवार
व्यापारी अंकुर शर्मा ने बताया कि दस दिसंबर 2008 को जिस समय यह घटना हुई, अपने दोस्तों के साथ गोदाम में बैठे हुए थे। पता चलने पर साथियों के साथ दौड़कर आए तो खल-चूरी की बोरियों पर घायल पड़े पांच व्यापारियों को उठाकर अस्पताल ले जाने लगे। तभी कुछ लोगों ने शोर मचाकर दो अन्य व्यापारियों को भी गोली मारने के बारे में बताया। इस दौरान व्यापारियों के घरों में चिट्ठी फेंककर रंगदारी मांगी जाती थी। घर के आंगन में कागज का टुकड़ा भी मिलने पर पूरा परिवार भयभीत हो जाता था।
विज्ञापन
अग्रवाल मंडी टटीरी चौहरा हत्याकांड :
- अग्रवाल मंडी टटीरी में रंगदारी नहीं देने पर दस दिसंबर 2008 को बदमाशों ने सात व्यापारियों को मारी थी गोली, चार की हो गई थी मौत
- चौहरे हत्याकांड के विरोध में व्यापारियों ने 17 दिन तक बंद रखा था बाजार, देशभर में गूंज पहुंचने पर साथ खड़े हो गए थे व्यापारी
- घटना के बाद कई बड़े व्यापारी मेरठ, दिल्ली समेत अन्य जगहों पर कर गए पलायन, आज भी घटना का दिखता है व्यापार पर असर
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत/अग्रवाल मंडी टटीरी। दस दिसंबर 2008 का दिन अग्रवाल मंडी टटीरी के व्यापारी कभी नहीं भूल पाएंगे। 17 साल पहले शाम करीब छह बजे वहां के व्यापारियों को ऐसा जख्म मिला, जिसका दर्द आज भी कम नहीं हुआ। व्यापारी किशनचंद अग्रवाल, उनके बेटे संजय गोयल, सुमंत प्रसाद, ब्रजमोहन गुप्ता की हत्या कर दी गई तो राजकुमार, नितिन और प्रमोद कुमार घायल हो गए। दहशत में पलायन करने वाले न तो व्यापारी लौटकर आए और न ही कारोबार का पहिया पटरी पर वापस चढ़ पाया।
अग्रवाल मंडी टटीरी में दस दिसंबर 2008 को रंगदारी नहीं देने पर बदमाशों ने व्यापारी किशनचंद अग्रवाल, उनके बेटे संजय गोयल, साबुन व्यापारी सुमंत प्रसाद, ब्रजमोहन गुप्ता की गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। व्यापारी राजकुमार, नरेला निवासी नितिन और प्रमोद कुमार गोली लगने से घायल हो गए थे। इसके विरोध में दो दिन तक बवाल होता रहा था और तोड़फोड़ व आगजनी तक हुई थी। व्यापारियों ने 17 दिन तक बाजार बंद रखा और इस घटना की गूंज देशभर में रही।
विज्ञापन
सपा मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव, तत्कालीन एडीजी लॉ एंड ऑर्डर बृजलाल, भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत समेत अन्य नेताओं ने टटीरी पहुंचकर विरोध जताया। व्यापारियों ने सभी बदमाशों का एनकाउंटर करने समेत अन्य मांग उठाई। पुलिस ने इस घटना में शामिल बली गांव के बदमाश वीरू और नरेंद्र उर्फ कालू के अलावा खड़खड़ी के राजेश को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। इसके बाद ही बाजार खोला गया। तब टटीरी के अन्य व्यापारियों के घरों में चिट्ठी फेंककर रंगदारी मांगी गई थी तो यहां से बड़े कारोबारी पलायन कर दिल्ली, मेरठ समेत अन्य जगहों पर चले गए। वह दोबारा यहां नहीं आए।
विज्ञापन
- ये बड़े व्यापारी कर गए पलायन
अग्रवाल मंडी टटीरी में भट्ठा मालिक हेमराज जैन के बेटे मुकेश को भी गोली मारी गई थी। इससे भयभीत हेमराज जैन अपने परिवार के साथ शाहदरा चले गए। इनके अलावा व्यापारी वीरेंद्र बंसल मेरठ चले गए और व्यापारी ओमप्रकाश मुन्नी, कृष्ण भट्ठे वाले, प्रमोद गुप्ता, यशपाल जैन समेत अन्य भी पलायन कर गए। इनमें किसी का सीमेंट का व्यापार था तो कोई पशु आहार व किरयाना की थोक की बड़ी दुकान करता था। यह जरूर अब राहत की बात है कि वर्ष 2015 के बाद किसी ने परेशान होकर पलायन नहीं किया अगर कोई यहां से गया है तो वह निजी कारणों से गया है।
- भाई और पिता की हत्या से सबकुछ बर्बाद हो गया : राजकुमार
गोली लगने से घायल हुए व्यापारी राजकुमार ने बताया कि उस घटना ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। घटना में पिता किशनचंद अग्रवाल और बड़े भाई संजय की हत्या कर दी गई और गोली लगने से वह भी घायल हो गया था। काफी समय तक अस्पताल में उपचार होता रहा। 17 दिन तक बाजार बंद रहने के कारण ग्राहकों ने बड़ौत, अमीनगर सराय, बागपत और दिल्ली की तरफ रुख कर लिया, जो 17 साल बाद भी कस्बे के बाजार में वापस नहीं आए। इसलिए व्यापार भी काफी सिमट गया। उस समय मिलने आए तत्कालीन एडीजी लॉ एंड आर्डर बृजलाल ने टटीरी में रिपोर्टिंग चौकी बनाने का वायदा किया था, लेकिन अभी तक वायदा पूरा नहीं हुआ।
- आंगन में कागज का टुकड़ा मिलते ही डर जाता था परिवार
व्यापारी अंकुर शर्मा ने बताया कि दस दिसंबर 2008 को जिस समय यह घटना हुई, अपने दोस्तों के साथ गोदाम में बैठे हुए थे। पता चलने पर साथियों के साथ दौड़कर आए तो खल-चूरी की बोरियों पर घायल पड़े पांच व्यापारियों को उठाकर अस्पताल ले जाने लगे। तभी कुछ लोगों ने शोर मचाकर दो अन्य व्यापारियों को भी गोली मारने के बारे में बताया। इस दौरान व्यापारियों के घरों में चिट्ठी फेंककर रंगदारी मांगी जाती थी। घर के आंगन में कागज का टुकड़ा भी मिलने पर पूरा परिवार भयभीत हो जाता था।

पहले मिले जख्म, दर्द अब भी साल रहा की खबर से संबंधित फोटो। अंकुर शर्मा

पहले मिले जख्म, दर्द अब भी साल रहा की खबर से संबंधित फोटो। अंकुर शर्मा

पहले मिले जख्म, दर्द अब भी साल रहा की खबर से संबंधित फोटो। अंकुर शर्मा

पहले मिले जख्म, दर्द अब भी साल रहा की खबर से संबंधित फोटो। अंकुर शर्मा