{"_id":"5f29af028ebc3e3cc05a2e76","slug":"worshiping-ram-temple-bhoomi-in-ravan-village-baghpat-news-mrt4946131105","type":"story","status":"publish","title_hn":"राम मंदिर भूमि पूजन से रावण गांव में खुशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राम मंदिर भूमि पूजन से रावण गांव में खुशी
विज्ञापन
बड़ा गांव में उर्फ रावण के ग्रामीण बोले इंतजार खत्म हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
खेकड़ा (बागपत)। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन से जिलेभर में खुशी है। लंकापति रावण के नाम पर जिले में रावण उर्फ बड़ागांव बसा है। यहां के ग्रामीणों में भी खुशी का माहौल है। ग्रामीण कहते हैं कि लंबे समय से चला आ रहा इंतजार पूरा हो गया।
ग्राम प्रधान रीना देवी का कहना है कि मंदिर निर्माण की मांग पूरी हो गई है। उन्हें बेहद खुशी है। गांव में भी दीये जलाए जाएंगे। शशिकांत शर्मा का कहना है कि उनके गांव का नाम रावण के नाम पर जरूर है, लेकिन ग्रामीण भगवान राम को भी मानते हैं। मंदिर निर्माण से गांव में खुशी का माहौल है। राजपाल त्यागी का कहना है कि अयोध्या जैसी खुशी पूरे देश में है। ऐसे में उनके गांव में भी खुशी का माहौल है। सुरेश कुमार का कहना है कि मंदिर निर्माण की मांग पुरानी थी। अब निर्माण की शुरूआत हो जाएगी। यह खुशी की बात है।
क्या है कथा
खेकड़ा। कहते हैं कि लंकापति रावण घोर तपस्या के बाद मंशा देवी की मूर्ति को लेकर लंका वापस लौट रहा था। मंशा देवी ने कहा था कि जहां मूर्ति रख दी जाएगी, वहीं स्थापित हो जाएगी। बड़ा गांव में आकर रावण लघुशंका के लिए रूक गया। रावण ने चरवाहे को मूर्ति दे दी। लेकिन चरवाहे ने मूर्ति को जमीन पर रख दिया। तभी से गांव में मंशा देवी का एतिहासिक मंदिर है और गांव का नाम भी रावण उर्फ बड़ागांव पड़ गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
खेकड़ा (बागपत)। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन से जिलेभर में खुशी है। लंकापति रावण के नाम पर जिले में रावण उर्फ बड़ागांव बसा है। यहां के ग्रामीणों में भी खुशी का माहौल है। ग्रामीण कहते हैं कि लंबे समय से चला आ रहा इंतजार पूरा हो गया।
ग्राम प्रधान रीना देवी का कहना है कि मंदिर निर्माण की मांग पूरी हो गई है। उन्हें बेहद खुशी है। गांव में भी दीये जलाए जाएंगे। शशिकांत शर्मा का कहना है कि उनके गांव का नाम रावण के नाम पर जरूर है, लेकिन ग्रामीण भगवान राम को भी मानते हैं। मंदिर निर्माण से गांव में खुशी का माहौल है। राजपाल त्यागी का कहना है कि अयोध्या जैसी खुशी पूरे देश में है। ऐसे में उनके गांव में भी खुशी का माहौल है। सुरेश कुमार का कहना है कि मंदिर निर्माण की मांग पुरानी थी। अब निर्माण की शुरूआत हो जाएगी। यह खुशी की बात है।
विज्ञापन
क्या है कथा
खेकड़ा। कहते हैं कि लंकापति रावण घोर तपस्या के बाद मंशा देवी की मूर्ति को लेकर लंका वापस लौट रहा था। मंशा देवी ने कहा था कि जहां मूर्ति रख दी जाएगी, वहीं स्थापित हो जाएगी। बड़ा गांव में आकर रावण लघुशंका के लिए रूक गया। रावण ने चरवाहे को मूर्ति दे दी। लेकिन चरवाहे ने मूर्ति को जमीन पर रख दिया। तभी से गांव में मंशा देवी का एतिहासिक मंदिर है और गांव का नाम भी रावण उर्फ बड़ागांव पड़ गया।
विज्ञापन