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जिला पर्यावरण योजना पर चल रहा काम, हटेगा प्रदूषण का नामोनिशान
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बड़ौत के गांधी रोड़ पर पड़ा कूड़ा।
- फोटो : BARAUT
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संयोजन और एनजीटी के निर्देश पर तैयार की जा रही योजना
वायु, जल और कचरे से होने वाले प्रदूषण को न्यूनतम स्तर पर लाने की कवायद
प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य, उर्जा निगम और वन विभाग सहित डेढ़ दर्ज विभाग मिलकर कर रहे काम
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जिले में पर्यावरण को साफ सुथरा बनाने की दिशा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संयोजन और एनजीटी के आदेशों के बाद जिला पर्यावरण योजना तैयार की जा रही है। इसमें प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य, उर्जा निगम और वन विभाग सहित डेढ़ दर्जन विभाग जुटे हुए हैं। सभी विभागों की योजनाएं तैयार करके एक जिला स्तरीय योजना तैयार होगी। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी इसकी लगातार मॉनिटरिंग करेगी और योजना को अंतिम रुप देगी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी के आदेशों पर यह जिला स्तरीय प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें मेडिकल वेस्ट, वायु प्रदूषण, नहरों व नदी में बहने वाले गंदे पानी, भूजल, मिट्टी, इलेक्ट्रानिक उपकरणों के वेस्ट और कचरा प्रबंधन, अंधाधुंध जल दोहन और पेड़ कटान आदि बिंदुओं को ध्यान में रखकर शून्य प्रदूषण की स्थिति की योजना तैयार की जा रही है। जिलास्तरीय प्लान में सबसे अहम भूमिका प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है।
400 तक पहुंचा जाता है जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक
गत वर्ष दिवाली के बाद से एक्यूआई 400 से ऊपर पहुंच गया था। इससे सांस, आंख में जलन के साथ ही गले में समस्या होने के मरीज लगातार बढ़ जाते है। आलम यह है कि वायु प्रदूषण के चलते जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या 1200 से अधिक पहुंच जाती है।
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रोजाना निकलता है सैकड़ों मीट्रिक टन कूड़ा
जनपद में रोजाना सैकड़ों मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। नगरपालिका बड़ौत में रोजाना 50 और बागपत नगरपालिका से 25 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसके अलावा नगर पंचायतें सहित अन्य विभाग भी है, जहां से रोजना सैकड़ों मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। हैरानी की बात यह है कि अभी तक सहीं ढंग से कूडे़ के निस्तारण की व्यवस्था नहीं बन पाई है। यहीं वजह है कि जनपद में पूरे-पूरे दिन नगर व देहात क्षेत्र की गलियों में कूडे़ के ढेर लगे रहते है।
ये विभाग कर रहे मिलकर काम
जिला स्तरीय प्लान तैयार करने में नगरपालिका बड़ौत, बागपत व खेकड़ा के अलावा दोघट, टीकरी सहित अन्य नगर पंचायत द्वारा एकत्रित किए जाने वाले डोर टू डोर कचरे के प्रबंधन की योजना है। स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग, ऊर्जा निगम, परिवहन विभाग, कृषि, उद्योग, सिंचाई विभाग करीब डेढ़ दर्जन विभाग इस प्लान में शामिल हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार एनजीटी ने ये आदेश जारी किए हैं। इसमें इन सभी विभागों की अलग-अलग कार्य योजना मांगी गई है। सभी विभाग मिलकर इस पर कार्य कर रहे है। - सुभाष सिंह, एसडीएम
जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए जिला पर्यावरण योजना बनाई जा रही है। शहरों से कचरे, मेडिकल वेस्ट, ई-वेस्ट, पानी की स्वच्छता, हवा की स्वच्छता सहित अन्य पैरामीर्ट्स को लेकर कई विभागों के साथ मिलकर कार्य योजना तैयार की जा रही है। - अनुज कौशिक, ईओ, बड़ौत पालिका
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व एनजीटी के आदेश मिलने के बाद यह प्लान तैयार किया जा रहा है। सभी विभाग अपनी-अपनी योजनाएं दे रहे हैं। - राजपाल सिंह, वन क्षेत्राधिकारी बड़ौत
इन कारणों से फैलता है वायु प्रदूषण
1- ईट भट्ठों से निकले वाला धुआं।
2- कूड़ा-कचरा को जलाकर नष्ट करना।
3- किसी भी प्रकार के धुआं को वायु में मिश्रित करना।
4- अंधाधुंध पेड़ कटान व वृक्षारोपण में सहयोग ना करना।
5- फसलों के अवशेषों को जलाना।
6- समय अवधि पूरी करने के उपरांत सड़कों पर दौड़ रही बसों के धुएं से।
7- अंधाधुंध जल दोहन करना।
8- पॉलीथिन व प्लाटिस्क को जलाने से
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वायु, जल और कचरे से होने वाले प्रदूषण को न्यूनतम स्तर पर लाने की कवायद
प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य, उर्जा निगम और वन विभाग सहित डेढ़ दर्ज विभाग मिलकर कर रहे काम
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जिले में पर्यावरण को साफ सुथरा बनाने की दिशा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संयोजन और एनजीटी के आदेशों के बाद जिला पर्यावरण योजना तैयार की जा रही है। इसमें प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य, उर्जा निगम और वन विभाग सहित डेढ़ दर्जन विभाग जुटे हुए हैं। सभी विभागों की योजनाएं तैयार करके एक जिला स्तरीय योजना तैयार होगी। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी इसकी लगातार मॉनिटरिंग करेगी और योजना को अंतिम रुप देगी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी के आदेशों पर यह जिला स्तरीय प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें मेडिकल वेस्ट, वायु प्रदूषण, नहरों व नदी में बहने वाले गंदे पानी, भूजल, मिट्टी, इलेक्ट्रानिक उपकरणों के वेस्ट और कचरा प्रबंधन, अंधाधुंध जल दोहन और पेड़ कटान आदि बिंदुओं को ध्यान में रखकर शून्य प्रदूषण की स्थिति की योजना तैयार की जा रही है। जिलास्तरीय प्लान में सबसे अहम भूमिका प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है।
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400 तक पहुंचा जाता है जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक
गत वर्ष दिवाली के बाद से एक्यूआई 400 से ऊपर पहुंच गया था। इससे सांस, आंख में जलन के साथ ही गले में समस्या होने के मरीज लगातार बढ़ जाते है। आलम यह है कि वायु प्रदूषण के चलते जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या 1200 से अधिक पहुंच जाती है।
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रोजाना निकलता है सैकड़ों मीट्रिक टन कूड़ा
जनपद में रोजाना सैकड़ों मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। नगरपालिका बड़ौत में रोजाना 50 और बागपत नगरपालिका से 25 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसके अलावा नगर पंचायतें सहित अन्य विभाग भी है, जहां से रोजना सैकड़ों मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। हैरानी की बात यह है कि अभी तक सहीं ढंग से कूडे़ के निस्तारण की व्यवस्था नहीं बन पाई है। यहीं वजह है कि जनपद में पूरे-पूरे दिन नगर व देहात क्षेत्र की गलियों में कूडे़ के ढेर लगे रहते है।
ये विभाग कर रहे मिलकर काम
जिला स्तरीय प्लान तैयार करने में नगरपालिका बड़ौत, बागपत व खेकड़ा के अलावा दोघट, टीकरी सहित अन्य नगर पंचायत द्वारा एकत्रित किए जाने वाले डोर टू डोर कचरे के प्रबंधन की योजना है। स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग, ऊर्जा निगम, परिवहन विभाग, कृषि, उद्योग, सिंचाई विभाग करीब डेढ़ दर्जन विभाग इस प्लान में शामिल हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार एनजीटी ने ये आदेश जारी किए हैं। इसमें इन सभी विभागों की अलग-अलग कार्य योजना मांगी गई है। सभी विभाग मिलकर इस पर कार्य कर रहे है। - सुभाष सिंह, एसडीएम
जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए जिला पर्यावरण योजना बनाई जा रही है। शहरों से कचरे, मेडिकल वेस्ट, ई-वेस्ट, पानी की स्वच्छता, हवा की स्वच्छता सहित अन्य पैरामीर्ट्स को लेकर कई विभागों के साथ मिलकर कार्य योजना तैयार की जा रही है। - अनुज कौशिक, ईओ, बड़ौत पालिका
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व एनजीटी के आदेश मिलने के बाद यह प्लान तैयार किया जा रहा है। सभी विभाग अपनी-अपनी योजनाएं दे रहे हैं। - राजपाल सिंह, वन क्षेत्राधिकारी बड़ौत
इन कारणों से फैलता है वायु प्रदूषण
1- ईट भट्ठों से निकले वाला धुआं।
2- कूड़ा-कचरा को जलाकर नष्ट करना।
3- किसी भी प्रकार के धुआं को वायु में मिश्रित करना।
4- अंधाधुंध पेड़ कटान व वृक्षारोपण में सहयोग ना करना।
5- फसलों के अवशेषों को जलाना।
6- समय अवधि पूरी करने के उपरांत सड़कों पर दौड़ रही बसों के धुएं से।
7- अंधाधुंध जल दोहन करना।
8- पॉलीथिन व प्लाटिस्क को जलाने से