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उधार के मजदूरों से घूम रहा फैक्टरियों का पहिया

Thu, 21 May 2020 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2020 11:48 PM IST
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Wheel of factories rotating with laborers of credit
बागपत यूपीआईडीसी स्थित फैक्ट्री में काम करते मजदूर - फोटो : BAGHPAT
बागपत। लॉकडाउन 4 में शर्तों के साथ फैक्टरियों का पहिया घूमा जरूरी है, लेकिन रफ्तार पकड़नी बाकी है। औद्योगिक एरिया में अब तक सिर्फ 15 फैक्टरियों में संचालन शुरू हुआ है। सबसे बड़ी दिक्कत प्रशिक्षित कर्मचारियों की हैं। लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर प्रशिक्षित श्रमिक अपने घरों को लौट गए हैं। काम के लिए जो श्रमिक आ रहे हैं वह अप्रशिक्षित हैं, ऐसे में उद्योग को नुकसान का खतरा है। उद्यमियों को एक-दूसरे की फैक्टरी से श्रमिक उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है। दुर्गा इंटरप्राइजेज के संचालक मोहम्मद यूसुफ का कहना है कि लॉकडाउन ने फैक्टरी संचालकों की कमर तोड़ दी है। प्रशिक्षित मजदूरों के अभाव में फैक्टरी का संचालक खुद काम करने को मजबूर हैं। दस फीसदी मजदूरों के सहारे फैक्टरी चलाई जा रही है। जो फैक्टरी बंद पड़ी है, उनके मजदूरों को बुलाकर लेकर कार्य कराया जा रहा है। फैक्टरी बंद होने के बावजूद बिजली और चौकीदार का खर्चे ने कर्जदार कर दिया है।
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इसलिए पड़ रहा अधिक असर
बागपत। दिल्ली, मेरठ व सहारनपुर में प्रवेश बंद होने के कारण फैक्टरी संचालकों को कच्चा माल नहीं मिल रहा है, जिससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। बाजार बंद होने के कारण डिमांड भी न के बराकर है, जिसके कारण अधिकांश फैक्टरियां बंद पड़ी है।
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क्या कहते हैं उद्यमी
बागपत। बागपत औद्योगिक क्षेत्र में स्वास्तिक पॉलीमर्स के संचालक दीपक कुमार का कहना है कि एक तो मजदूरों का अभाव, दूसरे दिल्ली में प्रवेश बंद होने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। न तो कच्चा माल मिल रहा है और न ही बाजार में डिमांड है, वह स्वयं मशीन ओपरेट कर पुराने कच्चे माल से नया माल तैयार कर रहे है। एक मशीन खराब हो गई है, रिपेयरिंग का सामान न मिलने के कारण मशीन बंद पड़ी है।
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ब्याज और बिजली के बिल में मिले रियायत
बागपत। यूपीएसआईडीसी बागपत इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष जयपाल प्रधान का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में 50 फैक्टरियां रेगुलर है तथा अधिकांश फैक्टरियों के मालिक दिल्ली में रहते है। सीमाएं सील होने के कारण वह बागपत नहीं आ पा रहे है, जिसके कारण औद्योगिक क्षेत्र में 10 से 15 फैक्टरियों का ही संचालन हो पा रहा है। सरकार को फैक्टरी संचालकों के बिजली के बिल में रियायत के साथ बैंक से लिए गए लोन पर राहत देनी चाहिए। फैक्टरियों के पुन: संचालन के लिए बैंक से मिलने वाले लोन में एक वर्ष तक ब्याज में राहत मिलनी चाहिए।
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