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लाड़ला मोबाइल में करता क्या हैं
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:52 AM IST
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भवानी सिंह खंगारौत, डीएम बागपत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिंदगी की भागदौड़ में उलझे लोगों के लिए अपनों से भी अपना साबित हो रहा मोबाइल और इंटरनेट अब जानलेवा बनने लगा है। ब्लू व्हेल गेम के अंजाम ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। लाड़लों को आधुनिक तकनीक से रूबरू कराने की ललक के चलते उनके हाथ में दिया मोबाइल ही दुश्मन साबित हो रहा है।
नए दौर की शिक्षा व्यवस्था ऐसी है, इसमें किशोरों को इंटरनेट के नजदीक जाने की छूट देना शिक्षकों और अभिभावकों की मजबूरी हैं। देखते ही देखते ही इंटरनेट के जाल में उलझे किशोर उन चीजों की तरफ भी चले जाते हैं, जिनके अंजाम का उन्हें पता ही नहीं है। विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों को अकेले रहना या हर वक्त मोबाइल, कंप्यूटर या गेम में उलझे रहना खतरनाक है। ऐसी स्थिति अगर कहीं है तो अभिभावकों को खतरा भांप लेना चाहिए।
ब्लू व्हेल गेम खेलने इसे पाने की ललक अब भी बच्चों में देखने को मिल रही है। टास्क को पूरा करने के लिए जिज्ञासा का भाव जाग्रत होता है और किशोर उलझते चले जाते हैं। सिर्फ यही नहीं अन्य भी ऐसे कई गेम हैं जो मानसिक रूप से अपने कब्जे में कर लेता है।
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श्री यमुना इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य जयपाल शर्मा कहते हैं कि ऐसे गेम का पहला टास्क पूरी करते ही किशोरों को यह मामूली बात लगने लगती है। बाद में उसकी जकड़ हो जाते हैं। जैसा गेम करने के लिए बोलता है, बच्चे ऐसा ही करते हैं। माता-पिता को यह देखने की जरूरत है कि बालक के स्वभाव में कोई बदलाव तो नहीं हो रहा है। समय-समय पर बातचीत करने रहना चाहिए।
किसने क्या कहा
भूपेंद्र चौहान उर्फ मोनू ने कहा ब्लू व्हेल गेम देखने और एक बार खेलने की बच्चों में जिज्ञासा बढ़ रही है। इसके बाद वह उसमें ही उलझकर रह जाते हैं। साइंस के अलावा अन्य विषय के छात्र इससे दूर हैं, क्योंकि उनका आध्यात्मिक जुड़ाव है। तनाव दिखाई दें तो अभिभावक बच्चों से दोस्त जैसा व्यवहार करें।
मनीष गुर्जर ने कहा वह अपने दोस्तों से गेम न खेलने के लिए हमेशा कहता है, क्योंकि उसे पता है यह जानलेवा है। आसपास के बच्चों को भी इसके लिए जागरूक करता है। युवाओं को चाहिए कि वह अपने आसपास के माहौल में जागरूकता फैलाएं और किशोरों को टास्क वाले गेम से दूर रहने की प्रेरणा दें।
बागपत सीएचसी अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने कहा रात में यदि बच्चा मोबाइल चलाता मिलता है जांच पड़ताल करें, वह क्या कर रहा है। कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। अकेलापन ही जान का दुश्मन है। अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों के दोस्त बनें। अगर किशोरी किसी निगेटिव साइट पर मिलता भी है तो उसे उसके नुकसान समझाएं।
संयुक्त परिवार टूटने से बढ़ी मुसीबत
बागपत। फतेहपुर पुट्ठी के राजकीय कन्या हाईस्कूल की प्रधानाचार्य रेखा सिंह कहती है कि संयुक्त परिवार टूट गए हैं, ऐसे में बच्चों का रिश्ता केवल मोबाइल और इंटरनेट से ही रह गया है। कहीं खेती की वजह से, कहीं नौकरी की वजह से, कहीं मजदूरी की वजह से वर्तमान में मां-बाप के पास बच्चों के लिए समय कम होता जा रहा है। इस स्थिति को बदलना होगा। बच्चों से बात करें और उन्हें विश्वास दिलाएं कि वही उनके सबसे अच्छे दोस्त हैं।
डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने कहा बीएसए और डीआईओएस को निर्देश दिए जाएंगे स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाएं। बच्चों को जागरूक करें और अभिभावकों को भी मोबाइल और इंटरनेट के विषय में बताएं।
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नए दौर की शिक्षा व्यवस्था ऐसी है, इसमें किशोरों को इंटरनेट के नजदीक जाने की छूट देना शिक्षकों और अभिभावकों की मजबूरी हैं। देखते ही देखते ही इंटरनेट के जाल में उलझे किशोर उन चीजों की तरफ भी चले जाते हैं, जिनके अंजाम का उन्हें पता ही नहीं है। विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों को अकेले रहना या हर वक्त मोबाइल, कंप्यूटर या गेम में उलझे रहना खतरनाक है। ऐसी स्थिति अगर कहीं है तो अभिभावकों को खतरा भांप लेना चाहिए।
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ब्लू व्हेल गेम खेलने इसे पाने की ललक अब भी बच्चों में देखने को मिल रही है। टास्क को पूरा करने के लिए जिज्ञासा का भाव जाग्रत होता है और किशोर उलझते चले जाते हैं। सिर्फ यही नहीं अन्य भी ऐसे कई गेम हैं जो मानसिक रूप से अपने कब्जे में कर लेता है।
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श्री यमुना इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य जयपाल शर्मा कहते हैं कि ऐसे गेम का पहला टास्क पूरी करते ही किशोरों को यह मामूली बात लगने लगती है। बाद में उसकी जकड़ हो जाते हैं। जैसा गेम करने के लिए बोलता है, बच्चे ऐसा ही करते हैं। माता-पिता को यह देखने की जरूरत है कि बालक के स्वभाव में कोई बदलाव तो नहीं हो रहा है। समय-समय पर बातचीत करने रहना चाहिए।
किसने क्या कहा
भूपेंद्र चौहान उर्फ मोनू ने कहा ब्लू व्हेल गेम देखने और एक बार खेलने की बच्चों में जिज्ञासा बढ़ रही है। इसके बाद वह उसमें ही उलझकर रह जाते हैं। साइंस के अलावा अन्य विषय के छात्र इससे दूर हैं, क्योंकि उनका आध्यात्मिक जुड़ाव है। तनाव दिखाई दें तो अभिभावक बच्चों से दोस्त जैसा व्यवहार करें।
मनीष गुर्जर ने कहा वह अपने दोस्तों से गेम न खेलने के लिए हमेशा कहता है, क्योंकि उसे पता है यह जानलेवा है। आसपास के बच्चों को भी इसके लिए जागरूक करता है। युवाओं को चाहिए कि वह अपने आसपास के माहौल में जागरूकता फैलाएं और किशोरों को टास्क वाले गेम से दूर रहने की प्रेरणा दें।
बागपत सीएचसी अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने कहा रात में यदि बच्चा मोबाइल चलाता मिलता है जांच पड़ताल करें, वह क्या कर रहा है। कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। अकेलापन ही जान का दुश्मन है। अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों के दोस्त बनें। अगर किशोरी किसी निगेटिव साइट पर मिलता भी है तो उसे उसके नुकसान समझाएं।
संयुक्त परिवार टूटने से बढ़ी मुसीबत
बागपत। फतेहपुर पुट्ठी के राजकीय कन्या हाईस्कूल की प्रधानाचार्य रेखा सिंह कहती है कि संयुक्त परिवार टूट गए हैं, ऐसे में बच्चों का रिश्ता केवल मोबाइल और इंटरनेट से ही रह गया है। कहीं खेती की वजह से, कहीं नौकरी की वजह से, कहीं मजदूरी की वजह से वर्तमान में मां-बाप के पास बच्चों के लिए समय कम होता जा रहा है। इस स्थिति को बदलना होगा। बच्चों से बात करें और उन्हें विश्वास दिलाएं कि वही उनके सबसे अच्छे दोस्त हैं।
डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने कहा बीएसए और डीआईओएस को निर्देश दिए जाएंगे स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाएं। बच्चों को जागरूक करें और अभिभावकों को भी मोबाइल और इंटरनेट के विषय में बताएं।