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Baghpat News: घंटों करते हैं इंतजार, फिर खड़े-खड़े करनी पड़ती है यात्रा
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-महिलाओं और युवतियों को उठानी पड़ रही ज्यादा दिक्कतें
फोटो संख्या 9
बड़ौत। डिपो की रोडवेज बसों में अब सुविधाजनक सफर नहीं रह गया है। पूरा किराया देने के बाद भी ज्यादातर यात्रियों को सीटें नसीब नहीं होती हैं, उन्हें मुख्य रास्तों पर बसों के अभाव के चलते खड़ा होकर ही सफर करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं व युवतियों को उठानी पड़ती है।
बड़ौत डिपो के आंकड़ों के मुताबिक 64 निगम व 59 निगम की बसें संचालित हैं। मगर इसके बावजूद दिल्ली-सहारनपुर हाईवे, बड़ौत-मुजफ्फरनगर मार्ग सहित अन्य मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों को दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है। अरुण, अनुज, अनित, नरेन्द्र का कहना है कि रोडवेज बस परिचालक किराया तो पूरा ले लेते हैं, लेकिन सीटें नहीं मिलती हैं। वहीं महिला यात्री सुधा, मोनिका, आरती, ओमवती का कहना है कि बस में चढ़ते ही परिचालक पूरा किराया वसूल लेता है, लेकिन जब उन्हें सीट दिलाने के लिए कहते हैं तो कहते हैं कि बस में 60 ही सीटे हैं और कहा से लाऊं। आगे कोई यात्री उतरेगा, तो सीट मिल जाएगी। बताया कि बसों के अभाव और सीट न मिलने के कारण यात्रियों को निजी बसों या डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। पहले घंटों बसों का इंतजार करते रहो, जब बस आती है तो यात्रियों से खचाखच भरी हुई आती है। इससे यात्रियों को खड़े-खड़े यात्रा करनी पड़ रही है। निजी बस संचालकों की मनमानी से यात्री परेशान हैं।
वर्जन-- --
जल्द ही सभी मार्गों पर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके लिए आरएम मेरठ से बातचीत की जा रही है। रामदास एआरएम बड़ौत।
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फोटो संख्या 9
बड़ौत। डिपो की रोडवेज बसों में अब सुविधाजनक सफर नहीं रह गया है। पूरा किराया देने के बाद भी ज्यादातर यात्रियों को सीटें नसीब नहीं होती हैं, उन्हें मुख्य रास्तों पर बसों के अभाव के चलते खड़ा होकर ही सफर करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं व युवतियों को उठानी पड़ती है।
बड़ौत डिपो के आंकड़ों के मुताबिक 64 निगम व 59 निगम की बसें संचालित हैं। मगर इसके बावजूद दिल्ली-सहारनपुर हाईवे, बड़ौत-मुजफ्फरनगर मार्ग सहित अन्य मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों को दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है। अरुण, अनुज, अनित, नरेन्द्र का कहना है कि रोडवेज बस परिचालक किराया तो पूरा ले लेते हैं, लेकिन सीटें नहीं मिलती हैं। वहीं महिला यात्री सुधा, मोनिका, आरती, ओमवती का कहना है कि बस में चढ़ते ही परिचालक पूरा किराया वसूल लेता है, लेकिन जब उन्हें सीट दिलाने के लिए कहते हैं तो कहते हैं कि बस में 60 ही सीटे हैं और कहा से लाऊं। आगे कोई यात्री उतरेगा, तो सीट मिल जाएगी। बताया कि बसों के अभाव और सीट न मिलने के कारण यात्रियों को निजी बसों या डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। पहले घंटों बसों का इंतजार करते रहो, जब बस आती है तो यात्रियों से खचाखच भरी हुई आती है। इससे यात्रियों को खड़े-खड़े यात्रा करनी पड़ रही है। निजी बस संचालकों की मनमानी से यात्री परेशान हैं।
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वर्जन
जल्द ही सभी मार्गों पर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके लिए आरएम मेरठ से बातचीत की जा रही है। रामदास एआरएम बड़ौत।