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औषधीय खेती और ड्रिप इरिगेशन से पर्यावरण प्रहरी बने विनोद
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बागपत। कोरोना संक्रमण की वजह से औषधीय खेती की तरफ किसानों का रूझान बढ़ा है। इसके चलते ग्राम पिलाना निवासी विनोद त्यागी काफी पहले ही इसके फायदे समझ चुके हैं। वह 2014 से औषधीय खेती कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने जल संरक्षण की भी मुहिम चला रखी है।
बागपत डार्क जोन में शामिल है। ऐसे में वह पानी का महत्व समझते हुए ड्रिप इरिगेशन करते हैं। वह गांव के 15 से 20 किसानों को भी प्रेरित कर चुके हैं। इसके चलते विनोद त्यागी को जनपद स्तर से मंडल स्तर तक कई पुरस्कार मिल चुके हैं। कई प्रतियोगिताओं में भी उन्हें पुरस्कृत किया जा चुका है। वह मुख्य रूप से हल्दी की खेती करते हैं। उनकी सारी हल्दी स्थानीय बाजार में बिक जाती है। इसके अतिरिक्त अदरक, राई, ऐलोवेरा आदि की भी खेती कर चुके हैं। इनका बाजार आसपास न होने के कारण उन्होंने हल्दी की खेती पर ध्यान केंद्रितकिया।
दिव्यांग होने के बावजूद इरादे के पक्के
विनोद त्यागी 70 फीसदी दिव्यांग हैं। वह सामान्य तरीके से चल नहीं पाते हैं। इसके बावजूद उनमें जज्बा है। वह खेतों में मेहनत करते हैं। इसके अतिरिक्त दूसरे किसानों को औषधि की खेती से संबंधित टिप्स भी देते हैं।
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सहफसली खेती से बढ़ाई आमदनी
विनोद त्यागी बताते हैं कि किसान की आमदनी बढ़ाने के दो ही तरीके हैं। उत्पादन बढ़े या फिर लागत घटे। इसके लिए सहफसली खेती सबसे बेहतर है। वह अक्टूबर में गन्ने की फसल के साथ सरसों की बुआई करते हैं। कभी गन्ने की फसल के साथ मिर्च की भी बुआई करते हैं। इससे लागत में कमी और आमदनी में बढ़ोतरी होती है।
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बागपत डार्क जोन में शामिल है। ऐसे में वह पानी का महत्व समझते हुए ड्रिप इरिगेशन करते हैं। वह गांव के 15 से 20 किसानों को भी प्रेरित कर चुके हैं। इसके चलते विनोद त्यागी को जनपद स्तर से मंडल स्तर तक कई पुरस्कार मिल चुके हैं। कई प्रतियोगिताओं में भी उन्हें पुरस्कृत किया जा चुका है। वह मुख्य रूप से हल्दी की खेती करते हैं। उनकी सारी हल्दी स्थानीय बाजार में बिक जाती है। इसके अतिरिक्त अदरक, राई, ऐलोवेरा आदि की भी खेती कर चुके हैं। इनका बाजार आसपास न होने के कारण उन्होंने हल्दी की खेती पर ध्यान केंद्रितकिया।
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दिव्यांग होने के बावजूद इरादे के पक्के
विनोद त्यागी 70 फीसदी दिव्यांग हैं। वह सामान्य तरीके से चल नहीं पाते हैं। इसके बावजूद उनमें जज्बा है। वह खेतों में मेहनत करते हैं। इसके अतिरिक्त दूसरे किसानों को औषधि की खेती से संबंधित टिप्स भी देते हैं।
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सहफसली खेती से बढ़ाई आमदनी
विनोद त्यागी बताते हैं कि किसान की आमदनी बढ़ाने के दो ही तरीके हैं। उत्पादन बढ़े या फिर लागत घटे। इसके लिए सहफसली खेती सबसे बेहतर है। वह अक्टूबर में गन्ने की फसल के साथ सरसों की बुआई करते हैं। कभी गन्ने की फसल के साथ मिर्च की भी बुआई करते हैं। इससे लागत में कमी और आमदनी में बढ़ोतरी होती है।