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डबल मर्डर में फैसला: दो भाइयों की गला काटकर हत्या, कोर्ट ने माफिया समेत चार को दी ये सजा
Mon, 30 Jun 2025 07:22 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Mon, 30 Jun 2025 07:22 PM IST
सार
Baghpat News: साल 2015 में लुहारा गांव के दो सगे भाइयों की गर्दन काटकर हत्या की गई थी। सिर को कपड़े में लपेटकर यमुना में फेंक दिया था। दस साल तक इस केस की सुनवाई चली।
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सजा होने के बाद जेल जाता अमरपाल लुहारा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लुहारा गांव में दो सगे भाइयों पप्पू और विकास उर्फ विक्की की गर्दन काटकर हत्या करने वाले प्रदेश स्तरीय माफिया अमरपाल लुहारा उर्फ कालू समेत चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही चारों पर 75-75 हजार रुपये अर्थदंड लगाया, जिसे अदा नहीं करने पर एक-एक साल की सजा बढ़ाई जाएगी।
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लुहारा गांव निवासी तिरसपाल ने 17 जुलाई 2015 को छपरौली थाने में अपने भाई पप्पू और विकास की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बताया था कि बदरखा गांव के यमुना घाट पर गर्दन कटे दो युवकों के शव पड़े मिले। उसने वहां जाकर दोनों की पहचान कपड़े व सामान के आधार पर अपने भाई विकास और पप्पू के रूप में की।
तिरसपाल ने बताया कि 15 जुलाई को उसके दोनों भाइयों को गांव के ही अमरपाल उर्फ कालू, उसके भाई नरेश, सुरेश, वीरसैन, शास्त्री उर्फ धर्मदत्त, अरविंद और राजपाल कोल्हू से अपने साथ ले गए। इनके साथ पुरानी रंजिश चल रही है।
तिरसपाल ने बताया कि 15 जुलाई को उसके दोनों भाइयों को गांव के ही अमरपाल उर्फ कालू, उसके भाई नरेश, सुरेश, वीरसैन, शास्त्री उर्फ धर्मदत्त, अरविंद और राजपाल कोल्हू से अपने साथ ले गए। इनके साथ पुरानी रंजिश चल रही है।
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पुरानी रंजिश में अमरपाल उर्फ कालू ने अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों की गोली मारकर और गर्दन काटकर हत्या कर दी। पुलिस की जांच में कई आरोपियों के नाम प्रकाश में आए। इसमें पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
जांच में पता चला कि हत्यारोपियों ने दोनों मृतकों की खोपड़ी कपड़े में लपेटकर यमुना में फेंक दी थी। पुलिस ने अमरपाल उर्फ कालू, धर्मदत्त शस्त्री, वीरसैन, नरेश, सुरेश, अरविंद, मुशर्रफ, संजीव पकौड़ी, नीटू के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। सुनवाई के दौरान नरेश, सुरेश और अरविंद की मौत हो गई, जबकि संजीव उर्फ पकौड़ी निवासी सरूरपुर खुर्द जिला मेरठ की पुलिस के साथ मुठभेड़ में गोली लगने से सरधना में मौत हो गई थी।
जांच में पता चला कि हत्यारोपियों ने दोनों मृतकों की खोपड़ी कपड़े में लपेटकर यमुना में फेंक दी थी। पुलिस ने अमरपाल उर्फ कालू, धर्मदत्त शस्त्री, वीरसैन, नरेश, सुरेश, अरविंद, मुशर्रफ, संजीव पकौड़ी, नीटू के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। सुनवाई के दौरान नरेश, सुरेश और अरविंद की मौत हो गई, जबकि संजीव उर्फ पकौड़ी निवासी सरूरपुर खुर्द जिला मेरठ की पुलिस के साथ मुठभेड़ में गोली लगने से सरधना में मौत हो गई थी।
25 जून को सुनवाई पूरी होने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय नीरु शर्मा नीरु शर्मा ने अमरपाल उर्फ कालू, धर्मदत्त उर्फ शास्त्री, वीरसैन और मुशर्रफ पर दोषसिद्ध कर दिया, जबकि नीटू को दोषमुक्त करा दिया।
सोमवार को न्यायाधीश ने माफिया अमरपाल उर्फ कालू, धर्मदत्त उर्फ शास्त्री, वीरसैन और मुशर्रफ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद माफिया अमरपाल को उन्नाव की फतेहगढ़ जेल भेज दिया गया।
सोमवार को न्यायाधीश ने माफिया अमरपाल उर्फ कालू, धर्मदत्त उर्फ शास्त्री, वीरसैन और मुशर्रफ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद माफिया अमरपाल को उन्नाव की फतेहगढ़ जेल भेज दिया गया।
भाइयों को न्याय दिलाने के लिए दस साल लड़ा तिरसपाल
छोटे भाइयों की हत्या के बाद उन्हें न्याय दिलाने के लिए तिरसपाल ने लंबी लड़ाई लड़ी। इसमें तिरसपाल ने अपना काम धंधा छोड़कर न्यायालय में मुकदमे की पैरवी की। तिरसपाल ने बताया कि उनका परिवार न्यायालय के फैसले से संतुष्ट है। उन्होंने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद 19 जुलाई को खेत में अमरपाल लुहारा उर्फ कालू ने साथियों के साथ मिलकर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया और मुकदमा वापस नहीं लेने पर भाइयों की तरह हत्या करने की धमकी भी दी थी। इसके बाद वर्ष 2016 में जेल से फोन कर और फिर वर्ष 2019 में जेल से जमानत पर आने के बाद हत्या की धमकी दी।
छोटे भाइयों की हत्या के बाद उन्हें न्याय दिलाने के लिए तिरसपाल ने लंबी लड़ाई लड़ी। इसमें तिरसपाल ने अपना काम धंधा छोड़कर न्यायालय में मुकदमे की पैरवी की। तिरसपाल ने बताया कि उनका परिवार न्यायालय के फैसले से संतुष्ट है। उन्होंने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद 19 जुलाई को खेत में अमरपाल लुहारा उर्फ कालू ने साथियों के साथ मिलकर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया और मुकदमा वापस नहीं लेने पर भाइयों की तरह हत्या करने की धमकी भी दी थी। इसके बाद वर्ष 2016 में जेल से फोन कर और फिर वर्ष 2019 में जेल से जमानत पर आने के बाद हत्या की धमकी दी।
पहली बार हुई सजा, दस बार हो चुका है बरी
प्रदेश के माफिया की सूची में शामिल कुख्यात अमरपाल उर्फ कालू का आपराधिक इतिहास 23 साल पुराना है। उसके खिलाफ कई जिलों में हत्या, जानलेवा हमला, लूट, रंगदारी मांगने समेत 44 मुकदमे दर्ज हैं। दस मुकदमों में गवाहों ने गवाही बदल दी और कुछ गवाही देने न्यायालय में ही नहीं पहुंचे। इसकी वजह से हत्या समेत दस मुकदमों में वह बरी हो चुका हैं, जबकि दोहरे हत्याकांड में पहली बार माफिया अमरपाल उर्फ कालू को सजा सुनाई गई। पहली बार सजा सुनाई जाते ही माफिया अमरपाल मायूस हो गया।
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