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आज डौला में हिंडन पुनर्जीवन सम्मेलन
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 21 Nov 2016 12:25 AM IST
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बागपत के डौला गांव में डीएम से वार्ता करते कृष्णपाल सिंह।
- फोटो : amar ujala
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बागपत। डीएम हृदय शंकर तिवारी ने कहा कि बरसात के पानी का संचयन करें। वृहद स्तर पर विविध जन जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर जल बचाने एवं उसका उचित प्रबंधन करें। पानी की बर्बादी के कारण हमारा जल स्तर दिनों दिन गिरता जा रहा है। सभी ब्लाक डार्क जोन में आ गए हैं।
डौला गांव में होने वाले हिंडन नदी पुनर्जीवन सम्मेलन के लिए कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे डीएम ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से सम्मेलन होगा। डीएम ने डौला में तालाबों की स्थिति देखी। उन्होंने कहा कि दिनो दिन गिरता जल स्तर चिंता की बात है और बागपत के सभी ब्लाक डार्क जोन में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि पानी की बर्बादी से हमारा पानी का भंडार समाप्त हो रहा है। रोजमर्रा के घरेलू कार्यों में हम पानी की बचत कर सकते हैं। स्कूलों में विचार गोष्ठियां आयोजित कर, प्रदर्शनी, पोस्टर प्रतियोगिता, रैली एवं अन्य जागरूकता वाले कार्यक्रमों को संपन्न कराया जा रहा है।
बागवानी की सिंचाई के लिए ड्रिप विधि, फसलों की सिंचाई हेतु स्प्रिंकलर विधि अपनाए जाने पर पानी की बचत होगी। अत्यधिक भूजल गिरावट वाले क्षेत्रों में फसल चक्र में परिवर्तन कर अधिक जल खपत वाली फसलें नहीं उगानी चाहिए। औद्योगिक प्रयोग में लाए गए जल का शोधन कर उसका पुर्नउपयोग करने से पानी का दोहन रुकेगा। वाटर पार्क, होटल में प्रयुक्त होने वाले जल का उपचार करके बार-बार प्रयोग में लाएं। तालाबों को अवैध कब्जों और अतिक्रमण से मुक्त कराया जा रहा है। बूंद बूंद संचय, बूंद बूंद खुशहाली के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।
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भू-गर्भ जल संरक्षण को भी संरक्षित करना है। जल को प्रदूषित न करें, जल बर्बाद न करें और जल का उचित प्रबंधन करें। सबमर्सिबल का उपयोग कम से कम करें, पानी की टोटियां खुली न छोड़ें। हर नागरिक का यह नैतिक कर्तव्य है कि अत्यधिक जल-दोहन न करें तथा संकल्प लें कि पानी को प्रदूषित नही करेंगे तथा जल-संचय करेंगे और उसका उचित प्रबंधन करेंगे। एसडीएम मनोज कुमार सिंह एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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डौला गांव में होने वाले हिंडन नदी पुनर्जीवन सम्मेलन के लिए कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे डीएम ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से सम्मेलन होगा। डीएम ने डौला में तालाबों की स्थिति देखी। उन्होंने कहा कि दिनो दिन गिरता जल स्तर चिंता की बात है और बागपत के सभी ब्लाक डार्क जोन में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि पानी की बर्बादी से हमारा पानी का भंडार समाप्त हो रहा है। रोजमर्रा के घरेलू कार्यों में हम पानी की बचत कर सकते हैं। स्कूलों में विचार गोष्ठियां आयोजित कर, प्रदर्शनी, पोस्टर प्रतियोगिता, रैली एवं अन्य जागरूकता वाले कार्यक्रमों को संपन्न कराया जा रहा है।
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बागवानी की सिंचाई के लिए ड्रिप विधि, फसलों की सिंचाई हेतु स्प्रिंकलर विधि अपनाए जाने पर पानी की बचत होगी। अत्यधिक भूजल गिरावट वाले क्षेत्रों में फसल चक्र में परिवर्तन कर अधिक जल खपत वाली फसलें नहीं उगानी चाहिए। औद्योगिक प्रयोग में लाए गए जल का शोधन कर उसका पुर्नउपयोग करने से पानी का दोहन रुकेगा। वाटर पार्क, होटल में प्रयुक्त होने वाले जल का उपचार करके बार-बार प्रयोग में लाएं। तालाबों को अवैध कब्जों और अतिक्रमण से मुक्त कराया जा रहा है। बूंद बूंद संचय, बूंद बूंद खुशहाली के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।
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भू-गर्भ जल संरक्षण को भी संरक्षित करना है। जल को प्रदूषित न करें, जल बर्बाद न करें और जल का उचित प्रबंधन करें। सबमर्सिबल का उपयोग कम से कम करें, पानी की टोटियां खुली न छोड़ें। हर नागरिक का यह नैतिक कर्तव्य है कि अत्यधिक जल-दोहन न करें तथा संकल्प लें कि पानी को प्रदूषित नही करेंगे तथा जल-संचय करेंगे और उसका उचित प्रबंधन करेंगे। एसडीएम मनोज कुमार सिंह एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।