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...तो पाकिस्तान घबरा गया था
ब्यूरो/अमर उजाला, बड़ौत
Updated Tue, 01 Sep 2015 12:46 AM IST
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वर्ष 1965 के युद्ध में भारत के टैंक पाकिस्तान के टैंकों पर भारी पड़े थे। इसी का परिणाम था कि पाकिस्तान की सेना को टैंकों को ईस्ट पाकिस्तान के बॉर्डर पर ही रोका दिया गया था। जब जनरल चीफ ने कहा था कि शाम का लाल प्याला लाहौर के गेस्ट हाउस में चलेगा। इससे पाकिस्तान घबरा गया था।
बावली गांव के रहने वाले रिटायर कैप्टन महेंद्र सिंह (78) वर्ष 1965 में सेना में बाग ड़ोगरा बंगाल में हवलदार पद पर तैनात थे। उस वक्त की साहसी गाथा, आज भी उन्हें देश सेवा के जज्बे से लबरेज कर देती है। बताते है कि 14 अगस्त 1965 की दोपहर एक बजे वे अपने कैंप में थे, इसी दौरान पाकिस्तान ने मोर्टार गिराए थे। इसी को देखते हुए उनके कैंप के सभी सैंनिकों को टैंकों के साथ ईस्ट पाकिस्तान के बॉर्डर पर भेजा दिया गया था। वहां सैनिकों ने बहादुरी का परिचय देते हुए बॉर्डर पर खड़े पाकिस्तानी टैंकों को खदेड़ा और कई किलोमीटर तक पाकिस्तान क्षेत्र में घुस गए। पाकिस्तान के टैंकों पर भारत के टैंक भारी पड़े थे। तभी जनरल चीफ जयंतो नाथ चौधरी ने ऐलान किया था कि बहादुर सैनिकों शाम का लाल प्याला लाहौर के गेस्ट हाउस में चलेगा। इस ऐलान से पाक के सैनिक ही नहीं पाकिस्तान की सरकार भी घबरा गई थी। उनकी सेना की गोलाबारी करने की हिम्मत नहीं हुई। उन्होंने 15 दिन तक पाकिस्तान सीमा के अंदर भूने हुए चने खाकर भूख मिटाई, मगर पाकिस्तान के सैंनिकों को भारतीय सीमा में घुसने नहीं दिया। कैप्टन महेंद्र सिंह ने 1962 में हुए चाइना युद्घ और 1971 में बांग्लादेश से हुए युद्ध वीरता का परिचय दिया था। उन्हें कई पदकों से नवाजा जा चुका है।
a देश सेवा में बावली आगे
बड़ौत। कैप्टन महेंद्र सिंह बताते है कि बावली गांव के काफी लोग आज भी फौज में है और देश की सेवा की कर रहे हैं। वह कैप्टन पद से रिटायर हुए है।
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बावली गांव के रहने वाले रिटायर कैप्टन महेंद्र सिंह (78) वर्ष 1965 में सेना में बाग ड़ोगरा बंगाल में हवलदार पद पर तैनात थे। उस वक्त की साहसी गाथा, आज भी उन्हें देश सेवा के जज्बे से लबरेज कर देती है। बताते है कि 14 अगस्त 1965 की दोपहर एक बजे वे अपने कैंप में थे, इसी दौरान पाकिस्तान ने मोर्टार गिराए थे। इसी को देखते हुए उनके कैंप के सभी सैंनिकों को टैंकों के साथ ईस्ट पाकिस्तान के बॉर्डर पर भेजा दिया गया था। वहां सैनिकों ने बहादुरी का परिचय देते हुए बॉर्डर पर खड़े पाकिस्तानी टैंकों को खदेड़ा और कई किलोमीटर तक पाकिस्तान क्षेत्र में घुस गए। पाकिस्तान के टैंकों पर भारत के टैंक भारी पड़े थे। तभी जनरल चीफ जयंतो नाथ चौधरी ने ऐलान किया था कि बहादुर सैनिकों शाम का लाल प्याला लाहौर के गेस्ट हाउस में चलेगा। इस ऐलान से पाक के सैनिक ही नहीं पाकिस्तान की सरकार भी घबरा गई थी। उनकी सेना की गोलाबारी करने की हिम्मत नहीं हुई। उन्होंने 15 दिन तक पाकिस्तान सीमा के अंदर भूने हुए चने खाकर भूख मिटाई, मगर पाकिस्तान के सैंनिकों को भारतीय सीमा में घुसने नहीं दिया। कैप्टन महेंद्र सिंह ने 1962 में हुए चाइना युद्घ और 1971 में बांग्लादेश से हुए युद्ध वीरता का परिचय दिया था। उन्हें कई पदकों से नवाजा जा चुका है।
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a देश सेवा में बावली आगे
बड़ौत। कैप्टन महेंद्र सिंह बताते है कि बावली गांव के काफी लोग आज भी फौज में है और देश की सेवा की कर रहे हैं। वह कैप्टन पद से रिटायर हुए है।