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एक्सक्लूसिव: गुड़ में मिठास लाने के लिए मिलाई जा रही चीनी

Wed, 23 Sep 2020 06:33 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 23 Sep 2020 06:33 PM IST
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There is no recovery in sugarcane, sweetening in jaggery with sugar
गुड़ - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की चीनी मिलें पेराई सत्र की तैयारियों में जुटी हुई हैं। कोल्हुओं में गन्ना पेराई का कार्य शुरू कर दिया गया है। मगर, गन्ने में मिठास कम होने के कारण अभी रिकवरी नहीं बढ़ी है। इस कारण गुड़ बनाने के लिए चीनी का सहारा लेना पड़ रहा है। जिले में फिलहाल 20 से अधिक कोल्हू संचालित हो गए हैं। लेकिन गर्मी ने कोल्हू संचालकों का गणित बिगाड़ दिया है। पारा 35 डिग्री के ऊपर है, ऐसे में गन्ना पेराई के लिए तैयार नहीं हो पा रहा है। गन्ने में मिठास कम है और रिकवरी बेहद कम है। कोल्हू संचालकों का कहना है कि रिकवरी कम हो रही है। यही वजह है कि गुड़ बनाने के लिए चीनी का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे गुड़ की गुणवत्ता पर फर्क नहीं पड़ता है।

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एनजीटी के आदेश, आबादी से दूर लगेंगे कोल्हू
एनजीटी ने आदेश जारी किए हैं कि कोल्हू आबादी के पास नहीं लग सकेंगे। कम से कम पांच सौ मीटर दूर लगाने होंगे। पर्यावरण के लिहाज से यह कदम उठाए गए हैं। लेकिन जिले में कई जगह नियमों को ताक पर रख दिया गया है। कोल्हू आबादी, स्कूल और अस्पताल के पास ही लगाकर संचालित कर दिए गए हैं। एडीएम अमित कुमार सिंह का कहना है कि कोल्हू संचालन में एनजीटी के आदेशों का पालन कराया जाएगा। जिले में जांच होगी।
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ईंधन पर भी सख्त हुआ एनजीटी
कोल्हू में जलने वाले ईंधन पर भी एनजीटी सख्त है। पॉलिथीन, टायर या अन्य प्रतिबंधित सामान कोल्हू में नहीं जलाने दिया जाएगा। इसके लिए भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

चीनी वाला गुड़ बिगाड़ सकता है सेहत : डॉ. विभाष राजपूत
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. विभाष राजपूत का कहना है कि चीनी मिलाकर बनाया जाने वाला गुड़ सेहत खराब कर सकता है। शुगर के रोगी अगर इस तरह के गुड़ का प्रयोग करेंगे तो उन्हें नुकसान हो सकता है।

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