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रमजान में तरावीह पढ़ने का मिलता है सबाब
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संवाद न्यूज एजेंसी
अग्रवाल मंडी टटीरी। कस्बे की देशवाल पट्टी स्थित मस्जिद में सुबह नमाज के बाद तकरीर करते हुए मौलवी हाजी जहीर अहमद ने कहा की रमजान माह खुदा की इबादत का महीना है। इस महीने में की जाने वाली इबादत सबसे अफजल है। तरावीह पढ़ने का सबाब मिलता है।
इस महीने में की जाने वाली इबादत का सबाब अन्य दिनों से की जाने वाली इबादत से कई गुना ज्यादा मिलता है। इस महीने में नफील इबादत का सवाब फर्ज इबादत के बराबर तथा फर्ज इबादत का सवाब 70 गुना अधिक मिलता है। इस महीने कुरान-ए-पाक नाजिल हुआ। इसलिए इस महीने में कुरान की ज्यादा से ज्यादा तिलावत करनी चाहिए। अल्लाह के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। हदीस में आया है कि बंदा जब मुझे याद करता है और मेरे जिक्र से उसके होंठ चलते हैं तो मैं उसके साथ होता हूं। रमजान माह में रोजे रखने चाहिए। साथ-साथ पांचों वक्त की नमाज पढ़नी चाहिए। नमाज के पाबंद होकर ही आखिरत बनाई जा सकती है।
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अग्रवाल मंडी टटीरी। कस्बे की देशवाल पट्टी स्थित मस्जिद में सुबह नमाज के बाद तकरीर करते हुए मौलवी हाजी जहीर अहमद ने कहा की रमजान माह खुदा की इबादत का महीना है। इस महीने में की जाने वाली इबादत सबसे अफजल है। तरावीह पढ़ने का सबाब मिलता है।
इस महीने में की जाने वाली इबादत का सबाब अन्य दिनों से की जाने वाली इबादत से कई गुना ज्यादा मिलता है। इस महीने में नफील इबादत का सवाब फर्ज इबादत के बराबर तथा फर्ज इबादत का सवाब 70 गुना अधिक मिलता है। इस महीने कुरान-ए-पाक नाजिल हुआ। इसलिए इस महीने में कुरान की ज्यादा से ज्यादा तिलावत करनी चाहिए। अल्लाह के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। हदीस में आया है कि बंदा जब मुझे याद करता है और मेरे जिक्र से उसके होंठ चलते हैं तो मैं उसके साथ होता हूं। रमजान माह में रोजे रखने चाहिए। साथ-साथ पांचों वक्त की नमाज पढ़नी चाहिए। नमाज के पाबंद होकर ही आखिरत बनाई जा सकती है।
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