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अयोध्या के चौंकाने वाले राज खुलेंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, बड़ौत
Updated Tue, 05 Sep 2017 01:07 AM IST
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शहजाद राय शोध संस्थान में प्रोजेक्ट पर मंथन करते इतिहासकार।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नितनवीन शोध और शहजाद राय शोध संस्थान बड़ौत के निदेशक अमित राय जैन ने बताया कि संस्थान की टीम ने अयोध्या में चल रहे शोध का पहला चरण पूरा कर लिया है। उन्होंने दावा किया कि शोध में अयोध्या में जैन मंदिरों और भगवान ऋषभ देव की जन्मस्थली होने के भी साक्ष्य भी मिले हैं। शोध के नतीजों को लिपिबद्ध करने का कार्य शुरू हो गया है। यह कार्य पूरा होने के बाद संस्थान अयोध्या से जुड़े कई चौकाने वाले रहस्यों का खुलासा करेगा।
सोमवार को बड़ौत में हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि शोध में जुटी टीम में पुराविद् एवं एडीजी सुरक्षा विजय कुमार, शोध निदेशक डाक्टर कृष्णकांत शर्मा और डाक्टर आंचल जैन शामिल रहे। टीम ने अयोध्या के चारों ओर 100 किमी के दायरे के गांव दर गांव साक्ष्य जुटाने की शुरूआत की और करीब 150 स्थलों का दौरा किया है। साहित्यिक, पुरातात्विक श्रोतों एवं साक्ष्यों, दुर्लभ प्राचीन पंच मार्क मुद्राओं और ताम्र मुद्राओं का एकत्रीकरण कर लिया गया है।
प्रथम चरण पूरा होने पर दो दिन पहले बड़ौत में बैठक कर द्वितीय चरण की रूपरेखा तैयार की गई है। अमित राय जैन ने दावा किया कि प्रथम चरण में ही कुछ अत्यधिक चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। प्रोजेक्ट पूरा होने पर उन्हें जब सार्वजनिक किया जाएगा तो काफी हद तक अयोध्या के इतिहास, संस्कृति पर से पर्दा उठेगा और अयोध्या का सच सामने आएगा।
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उन्होंने बताया कि अयोध्या प्रोजेक्ट के द्वितीय चरण पूरा होने के बाद शोध के परिणामों को लिपिबद्ध करके भारत सर्वेक्षण विभाग और उच्चतम न्यायालय को भी उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने बताया कि एएसआई के उत्खनन में भी विवादित स्थल पर बौध, जैन और हिंदू मंदिर होने के साक्ष्य मिले हैं।
जैन समाज के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव सहित पांच तीर्थंकरों का जन्म अयोध्या में हुआ है। उन्होंने बताया कि भगवान राम की जन्मभूमि को लेकर कोई विवाद नहीं है, श्री राम जैन समाज को भी स्वीकार है, लेकिन उनसे भी पहले यह नगरी जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली रही है।
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सोमवार को बड़ौत में हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि शोध में जुटी टीम में पुराविद् एवं एडीजी सुरक्षा विजय कुमार, शोध निदेशक डाक्टर कृष्णकांत शर्मा और डाक्टर आंचल जैन शामिल रहे। टीम ने अयोध्या के चारों ओर 100 किमी के दायरे के गांव दर गांव साक्ष्य जुटाने की शुरूआत की और करीब 150 स्थलों का दौरा किया है। साहित्यिक, पुरातात्विक श्रोतों एवं साक्ष्यों, दुर्लभ प्राचीन पंच मार्क मुद्राओं और ताम्र मुद्राओं का एकत्रीकरण कर लिया गया है।
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प्रथम चरण पूरा होने पर दो दिन पहले बड़ौत में बैठक कर द्वितीय चरण की रूपरेखा तैयार की गई है। अमित राय जैन ने दावा किया कि प्रथम चरण में ही कुछ अत्यधिक चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। प्रोजेक्ट पूरा होने पर उन्हें जब सार्वजनिक किया जाएगा तो काफी हद तक अयोध्या के इतिहास, संस्कृति पर से पर्दा उठेगा और अयोध्या का सच सामने आएगा।
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उन्होंने बताया कि अयोध्या प्रोजेक्ट के द्वितीय चरण पूरा होने के बाद शोध के परिणामों को लिपिबद्ध करके भारत सर्वेक्षण विभाग और उच्चतम न्यायालय को भी उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने बताया कि एएसआई के उत्खनन में भी विवादित स्थल पर बौध, जैन और हिंदू मंदिर होने के साक्ष्य मिले हैं।
जैन समाज के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव सहित पांच तीर्थंकरों का जन्म अयोध्या में हुआ है। उन्होंने बताया कि भगवान राम की जन्मभूमि को लेकर कोई विवाद नहीं है, श्री राम जैन समाज को भी स्वीकार है, लेकिन उनसे भी पहले यह नगरी जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली रही है।