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बागपत को इस साल भी नहीं मिला बस अड्डा, रोडवेज बसों का टोटा दूर नहीं हुआ
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बागपत/बड़ौत। बागपत जिला बनने के 24 साल बाद भी परिवहन सुविधाएं बेहतर नहीं हो सकी हैं। हालात ये हैं कि इस साल भी बागपत को बस अड्डा नहीं मिल सका है। वहीं, रोडवेज बसों का टोटा भी दूर नहीं हुआ। इससे परिवहन व्यवस्था डग्गामार वाहनों के भरोसे है।
वर्ष 2021 में उम्मीद थी कि जिला मुख्यालय पर बस अड्डा बन जाएगा। हर बार की तरह इस बार भी उम्मीद टूट गई। इस बार बस अड्डे के लिए चमरावल रोड पर दुड़भा के समीप जमीन जरूर चिह्नित की गई है। बस अड्डा नहीं होने से यात्रियों को अलग-अलग स्थानों पर दौड़ना पड़ता है। मेरठ जाने के लिए मेरठ रोड पर बसें खड़ी होती हैं। वहीं, दिल्ली के लिए राष्ट्र वंदना चौक से बसें मिलती हैं। सोनीपत जाने के लिए सिसाना रोड पर यात्रियों को प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
शाम सात बजते ही बंद हो जाते हैं कई रूट
बड़ौत डिपो में निगम की 67 और 48 अनुबंधित बसें हैं। तीन माह पूर्व निगम की 16 बसें दस साल पूरा कर लेने के चलते बंद कर दी गई थीं। जिला मुख्यालय से सात बजे के बाद मेरठ के लिए बसें नहीं मिलती हैं। वहीं, अन्य कई रूट भी बंद हो जाते हैं। लोगों को मेरठ जाने के लिए ट्रक या डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
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डग्गामार वाहनों में सफर करने को मजबूर
बसों की कमी के चलते बागपत-मुरादनगर, बागपत-रटौल, बागपत-निरौजपुर, बड़ौत-कोताना, बड़ौत-अमीनगर सराय, बड़ौत-छपरौली, बड़ौत-बडक़ा-हिलवाड़ी-फतेहपुर पुटठी मार्ग पर बसों का संचालन नहीं है। लोगों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इनके अतिरिक्त अंतर्राज्यीय परिवहन व्यवस्था भी बदहाल है। हरियाणा से केवल तीन बसें आती हैं।
नेशनल हाईवे की हालत भी नहीं सुधरी
इस साल भी नेशनल हाईवे की हालत नहीं सुधर सकी। मेरठ-बागपत व दिल्ली से खेकड़ा तक नेशनल हाईवे में गड्ढों के कारण बुरे हालात हैं। उन पर कार्य जरूर किया जा रहा है।
कार्यकाल पूरा होने के कारण 16 बसों का संचालन बंद है। इनके स्थान पर अभी नई बसें नहीं मिली हैं। डिपो को 30 बसों की जरूरत है।-नरेंद्र मान, बड़ौत डिपो प्रभारी
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वर्ष 2021 में उम्मीद थी कि जिला मुख्यालय पर बस अड्डा बन जाएगा। हर बार की तरह इस बार भी उम्मीद टूट गई। इस बार बस अड्डे के लिए चमरावल रोड पर दुड़भा के समीप जमीन जरूर चिह्नित की गई है। बस अड्डा नहीं होने से यात्रियों को अलग-अलग स्थानों पर दौड़ना पड़ता है। मेरठ जाने के लिए मेरठ रोड पर बसें खड़ी होती हैं। वहीं, दिल्ली के लिए राष्ट्र वंदना चौक से बसें मिलती हैं। सोनीपत जाने के लिए सिसाना रोड पर यात्रियों को प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
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शाम सात बजते ही बंद हो जाते हैं कई रूट
बड़ौत डिपो में निगम की 67 और 48 अनुबंधित बसें हैं। तीन माह पूर्व निगम की 16 बसें दस साल पूरा कर लेने के चलते बंद कर दी गई थीं। जिला मुख्यालय से सात बजे के बाद मेरठ के लिए बसें नहीं मिलती हैं। वहीं, अन्य कई रूट भी बंद हो जाते हैं। लोगों को मेरठ जाने के लिए ट्रक या डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
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डग्गामार वाहनों में सफर करने को मजबूर
बसों की कमी के चलते बागपत-मुरादनगर, बागपत-रटौल, बागपत-निरौजपुर, बड़ौत-कोताना, बड़ौत-अमीनगर सराय, बड़ौत-छपरौली, बड़ौत-बडक़ा-हिलवाड़ी-फतेहपुर पुटठी मार्ग पर बसों का संचालन नहीं है। लोगों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इनके अतिरिक्त अंतर्राज्यीय परिवहन व्यवस्था भी बदहाल है। हरियाणा से केवल तीन बसें आती हैं।
नेशनल हाईवे की हालत भी नहीं सुधरी
इस साल भी नेशनल हाईवे की हालत नहीं सुधर सकी। मेरठ-बागपत व दिल्ली से खेकड़ा तक नेशनल हाईवे में गड्ढों के कारण बुरे हालात हैं। उन पर कार्य जरूर किया जा रहा है।
कार्यकाल पूरा होने के कारण 16 बसों का संचालन बंद है। इनके स्थान पर अभी नई बसें नहीं मिली हैं। डिपो को 30 बसों की जरूरत है।-नरेंद्र मान, बड़ौत डिपो प्रभारी