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हिंदी के जरिए सरल बन रही रोजगार की राह

Sat, 28 Aug 2021 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 28 Aug 2021 11:39 PM IST
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The path of employment is becoming easier through Hindi
हिंदी हैं हम
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उद्योगपतियों और देश के दूसरे राज्यों से आए श्रमिकों के बीच संवाद की भाषा बनी हिंदी
झारखंड, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों से सैकड़ों श्रमिक यहां करते हैं काम
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। उद्योग रोजगार का प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। रोजी रोटी की तलाश में जनपद में आए देश के अन्य राज्यों के श्रमिक वर्ग के सैकड़ों लोग औद्योगिक इकाइयों में काम कर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। इनमें गैर हिंदी भाषा वाले राज्यों के श्रमिक भी शामिल है। उद्योगपतियों के लिए इन श्रमिकों के साथ संवाद की भाषा हिंदी ही है। यहीं वो भाषा है, जिसके जरिए ही संवाद कर गैर हिंदी भाषी राज्य का श्रमिक अपने रोजगार की राह सरल बनाता है।
हिन्दी के जरिए समझाई जा रही जरूरतें
निशांत इंजीनियरिंग वर्क्स बड़ौत के संचालक सुरेंद्र मित्तल का कहना है कि उद्योग की वास्तविक पूंजी श्रमिक होते हैं। जिनकी मेहनत व कुशलता के बूते औद्योगिक इकाइयां उत्पादन बढ़ाती हैं। झारखंड, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार सहित अन्य राज्यों से बहुत से श्रमिक यहां पर कामकाज के लिए आते है। हिंदी के जरिए ही इन श्रमिकों को उत्पादन की जरूरतों व अन्य कामों को समझाया जा सकता है। कहा जाए तो हिंदी उद्योगों के लिए रीढ़ है।
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पूरे देश को जोड़ती हैं हिंदी
कलश कृषि उद्योग से ललित जैन व अनिल इंडस्ट्री से अर्पित जैन उर्फ टीनू का कहना है कि हिंदी के बिना औद्योगिक इकाई को चला पाना असंभव है। अधिकांश कामगार हिंदी भाषी राज्यों से आते हैं। लिहाजा उनके साथ संवाद हिंदी में ही होता है। संवाद की सहज भाषा होने के कारण हिंदी की अपनी अहमियत है। हिंदी पूरे देश को जोड़ती है।
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देशभक्ति की भावना पैदा करती हैं हिंदी
इंडस्ट्रीज ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. योगेश जिंदल व कपिल एग्रो इंडस्ट्रीज के मालिक कपिल पंवार का कहना है कि अधिकतर कामगार हिंदी ही समझते हैं। लिहाजा उनके साथ संवाद के लिए हिंदी का ही प्रयोग होता है। कहा कि हिंदी पूरे देश को एक सूत्र में पिरोती है। हिंदी हमें हिंदुस्तानी होने का गर्व देती है, हमारे भीतर देशभक्ति की भावना पैदा करती है। औद्योगिक इकाईयों के भीतर श्रमिकों से संवाद हिंदी में ही होता है।

15 से 20 हजार मजदूर करते है काम
बागपत जनपद में रिम-धूरा उद्योग, हैंडलूम, कृषि यंत्र उद्योग, निरपुड़ा गांव का कंबल उद्योग, भड़ल गांव सहित अन्य कई जगहों पर चमड़े का कारोबार, गत्ते का लघु उद्योग, चीनी उद्योग आदि प्रमुख उद्योग है। यहां पर लगभग 15 से 20 हजार मजदूर काम करते है।
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