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दुख-दर्द में शामिल होने वाला ही सच्चा इंसान : राम रहीम
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बिनौली (बागपत)। डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने कहा कि किसी के भी दुख-दर्द में शामिल होकर उसके कष्ट दूर करने की कोशिश करने वाला ही सच्चा इंसान कहलाता है।
उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वीडियो के माध्यम से आमजन व युवा पीढ़ी को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। कहा कि यदि कोई सड़क पर घायल अवस्था में पड़ा है, तो लोग उसे देखकर निकल जाते हैं। कोई किसी को पीट रहा है, तो उन्हें छुड़ाने के बजाय उनकी वीडियो बनाने लगते हैं। जो लोग किसी को दुखी देखकर ठहाके लगाते हैं, खुशी मनाते हैं वह इंसान नहीं। उसे हमारे धर्मों में शैतान या राक्षस कहा जाता है। ऐसे लोग बेहद की स्वार्थी होते हैं। उनके अंदर इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं होती।
उन्होंने कहा कि हमारी जात इंसान है, इसे बदनाम ना कीजिए। हम सब एक मालिक की औलाद हैं, हमारे धर्मों में इंसान को सर्वश्रेष्ठ कहा गया। सच्चा इंसान वही होता है, जो किसी के दुख दर्द में शामिल होकर उसके कष्टों को दूर करने की कोशिश करता है, इसे ही इंसानियत कहते है। यह सब इंसानियत के कर्म करने से ही होगा, ओम, हरि, अल्लाह, वाहे गुरु, गौड़, राम नाम का नित्य नियम सुमिरन करने से इंसान इंसानियत की बुलंदियों पर पहुंचता है। वही सुरक्षा की दृष्टि से आश्रम के सभी गेटों पर पुलिस का सख्त पहरा था। किसी भी अनुयायी को डेरे के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।
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उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वीडियो के माध्यम से आमजन व युवा पीढ़ी को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। कहा कि यदि कोई सड़क पर घायल अवस्था में पड़ा है, तो लोग उसे देखकर निकल जाते हैं। कोई किसी को पीट रहा है, तो उन्हें छुड़ाने के बजाय उनकी वीडियो बनाने लगते हैं। जो लोग किसी को दुखी देखकर ठहाके लगाते हैं, खुशी मनाते हैं वह इंसान नहीं। उसे हमारे धर्मों में शैतान या राक्षस कहा जाता है। ऐसे लोग बेहद की स्वार्थी होते हैं। उनके अंदर इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं होती।
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उन्होंने कहा कि हमारी जात इंसान है, इसे बदनाम ना कीजिए। हम सब एक मालिक की औलाद हैं, हमारे धर्मों में इंसान को सर्वश्रेष्ठ कहा गया। सच्चा इंसान वही होता है, जो किसी के दुख दर्द में शामिल होकर उसके कष्टों को दूर करने की कोशिश करता है, इसे ही इंसानियत कहते है। यह सब इंसानियत के कर्म करने से ही होगा, ओम, हरि, अल्लाह, वाहे गुरु, गौड़, राम नाम का नित्य नियम सुमिरन करने से इंसान इंसानियत की बुलंदियों पर पहुंचता है। वही सुरक्षा की दृष्टि से आश्रम के सभी गेटों पर पुलिस का सख्त पहरा था। किसी भी अनुयायी को डेरे के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।
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