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Baghpat News: पाकिस्तान जाने वालों का मिटेगा नाम और निशान
Fri, 15 Nov 2024 01:50 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Fri, 15 Nov 2024 01:50 AM IST
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कोताना गांव में शत्रु संपति का बोर्ड लगाते लेखपाल का फाइल फोटो
बागपत। देश छोड़कर पाकिस्तान में जाकर बसे लोगों का नाम और निशान मिटाया जाएगा। इसके लिए पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के परिवार के बाद अन्य लोगों की शत्रु संपत्ति की नीलामी शुरू कर दी गई है। अब 50 बीघा से ज्यादा शत्रु संपत्ति की नीलामी करने की तैयारी की जा रही है।
यहां से काफी लोग आजादी के दौरान व उसके बाद पाकिस्तान चले गए और वहां जाकर ही बस गए। ऐसे लोगों की जमीन को चिह्नित करके सरकार ने शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया। उनकी जमीन भले ही शत्रु संपत्ति घोषित हो गई हो, मगर कागजों में आज भी उस जमीन की उनके नाम से पहचान होती है। यहां से पाकिस्तान जाने वाले इन लोगों का नाम और निशान पूरी तरह से खत्म करने के लिए जमीनों की नीलामी की जा रही है।
पहले कोताना में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के परिवार की करीब 13 बीघा जमीन नीलाम की गई। वहीं अब कोताना में करीब 50 बीघा से ज्यादा जमीन को नीलाम करने की तैयारी हो गई है। यह कोताना गांव से वर्ष 1970 में पाकिस्तान गए अब्दुल रहमान की जमीन है और इसे कुछ महीने पहले ही शत्रु संपत्ति में दर्ज किया गया है। इसके लिए शत्रु संपत्ति अभिरक्षण कार्यालय से कार्रवाई की जा रही है।
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- जमीन की नीलामी के बाद दर्ज होंगे खरीदने वालों के नाम
शत्रु संपत्ति को नीलामी किया जा रहा है और इसके लिए ऑनलाइन बोली लगवाई जाती है। जमीन के मूल्य की 25 प्रतिशत राशि को नीलामी के तुरंत बाद जमा कराया जाता है। इसके बाद बाकी पैसा जमा करने के लिए चार महीने का समय मिलता है। चार महीने में पूरा पैसा जमा होने पर राजस्व रिकार्ड में जमीन खरीदने वाले का नाम दर्ज हो जाता है। इसके बाद पाकिस्तान जाने वालों का नाम भी रिकाॅर्ड से खत्म हो जाएगा। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के परिवार वालों की जमीन की नीलामी के मामले में भी यही प्रक्रिया की जा रही है।
- शत्रु संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया शत्रु संपत्ति अभिरक्षण कार्यालय से होती है। इसके लिए ऑनलाइन बोली लगाई जाती है और राशि जमा होने पर राजस्व रिकार्ड में जमीन खरीदने वाले का नाम दर्ज कर दिया जाता है। यहां काफी शत्रु संपत्ति है और उसकी नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। - पंकज वर्मा, एडीएम
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यहां से काफी लोग आजादी के दौरान व उसके बाद पाकिस्तान चले गए और वहां जाकर ही बस गए। ऐसे लोगों की जमीन को चिह्नित करके सरकार ने शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया। उनकी जमीन भले ही शत्रु संपत्ति घोषित हो गई हो, मगर कागजों में आज भी उस जमीन की उनके नाम से पहचान होती है। यहां से पाकिस्तान जाने वाले इन लोगों का नाम और निशान पूरी तरह से खत्म करने के लिए जमीनों की नीलामी की जा रही है।
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पहले कोताना में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के परिवार की करीब 13 बीघा जमीन नीलाम की गई। वहीं अब कोताना में करीब 50 बीघा से ज्यादा जमीन को नीलाम करने की तैयारी हो गई है। यह कोताना गांव से वर्ष 1970 में पाकिस्तान गए अब्दुल रहमान की जमीन है और इसे कुछ महीने पहले ही शत्रु संपत्ति में दर्ज किया गया है। इसके लिए शत्रु संपत्ति अभिरक्षण कार्यालय से कार्रवाई की जा रही है।
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- जमीन की नीलामी के बाद दर्ज होंगे खरीदने वालों के नाम
शत्रु संपत्ति को नीलामी किया जा रहा है और इसके लिए ऑनलाइन बोली लगवाई जाती है। जमीन के मूल्य की 25 प्रतिशत राशि को नीलामी के तुरंत बाद जमा कराया जाता है। इसके बाद बाकी पैसा जमा करने के लिए चार महीने का समय मिलता है। चार महीने में पूरा पैसा जमा होने पर राजस्व रिकार्ड में जमीन खरीदने वाले का नाम दर्ज हो जाता है। इसके बाद पाकिस्तान जाने वालों का नाम भी रिकाॅर्ड से खत्म हो जाएगा। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के परिवार वालों की जमीन की नीलामी के मामले में भी यही प्रक्रिया की जा रही है।
- शत्रु संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया शत्रु संपत्ति अभिरक्षण कार्यालय से होती है। इसके लिए ऑनलाइन बोली लगाई जाती है और राशि जमा होने पर राजस्व रिकार्ड में जमीन खरीदने वाले का नाम दर्ज कर दिया जाता है। यहां काफी शत्रु संपत्ति है और उसकी नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। - पंकज वर्मा, एडीएम