बड़ौत (बागपत)। उपाध्याय गुप्ति सागर महाराज ने कहा कि जहां पंच कल्याणक होता है, वहां स्वर्ग हो जाता है। सारे दुख दूर हो जाते हैं। मनुष्य को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। मोह को छोड़ना ही मोक्ष को चाहने का भाव है।
शनिवार को दिगंबर जैन कॉलेज में पंच कल्याणक महोत्सव के पहले दिन जैन मुनि ने कहा कि धर्म ध्वजा का पूर्व दिशा में जाना बहुत शुभ संदेश है। राग का जीवन से रहित हो जाना वैराग्य का भाव समाहित हो जाना है। मोह को छोड़ना ही मोक्ष को चाहने का भाव है। यहां तक पहुंचने वाला संस्कारों को लेकर आने वाला योगी होगा, जिसका नाम सुनते ही मन प्रफुल्लित हो जाता है। नाम का आकर्षण रत्नत्रय के विशुद्ध परिणाम का प्रतिफल है, जिसे किसी ने देखा न हो, नाम सुनते ही अपने आप में धन्यता का अनुभूत अनुभव कर मन, वचन, कार्य से समाहित हो जाते हों, फिर साक्षात दर्शन की बात ही क्या है? जो भी इनके चरणों में आता है, इन्हीं का होए बिना रहता नहीं। विरोधी वैर भूल जाता है। बदले में भक्त बन भक्तपने की भेंट श्रीचरण में अर्पित कर देता है। उन्होंने सभी को आशीर्वाद देकर मंगल कामना की। इस दौरान लोग भाव विभोर हो गए।