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Baghpat News: संविधान पार्क में केवल सेहत ही नहीं सुधरेगी, यहां ज्ञान भी बढ़ेगा
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बड़ौत/लखनऊ। बड़ौत नगर पालिका परिसर में ऐसा पार्क विकसित किया गया है, जिसमें घूमकर केवल सेहत ही नहीं सुधरेगी। इस संविधान पार्क में घूमते हुए बच्चे, बड़े सभी अपना ज्ञान भी बढ़ा सकेंगे। इसके लिए यहां संविधान की किताब की 600 किलो की बड़ी कलाकृति बनाई गई है और उस पर संविधान की मूल प्रस्तावना लिखी गई है। इसके साथ ही वहां बुक प्वाइंट भी बनाया गया, जहां से किताबों को लेकर पढ़ सकते हैं।
संविधान पार्क विकसित करने में अधिकतर उस सामान का इस्तेमाल किया गया है, जो कबाड़ हो गया था। उनसे ही पार्क में 11 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ाई की संविधान की किताब की कलाकृति बनाई गई है। पार्क में आते ही यह सबसे अलग दिखाई देती है और उस पर लिखी गई संविधान की प्रस्तावना हर कोई पढ़ता है। इस पार्क में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चरखे की बड़ी कलाकृति भी बनवाई गई है। इसके साथ ही महात्मा गांधी की मूर्ति लगी है। बागपत का पुराना नाम व्याघप्रस्थ था और उसको देखते हुए ही वाटर कियोस्क लगवाया गया है। पार्क में कुछ किताबों को रखा गया है, जिनसे इतिहास के बारे में जानकारी मिल सके। वहां घूमने आने वाले लोग उन किताबों से इतिहास की जानकारी ले सकते हैं। यह केवल इसलिए किया गया है, जिससे यहां सेहत सुधारने के साथ ही देश व संविधान से जुड़ा जरूरी ज्ञान भी लोग ले सकें।
-संविधान व इतिहास के बारे में सभी को जानकारी होना जरूरी
डीएम अस्मिता लाल का कहना है कि हमारे देश के संविधान व इतिहास की जानकारी सभी को होनी जरूरी है। इसलिए ही इस संविधान पार्क को विकसित करने की योजना बनाई गई। जिस जगह पर यह पार्क विकसित किया गया है, वह बड़ौत शहर के बीच में है और वहां काफी संख्या में बच्चे, महिलाएं व पुरुष घूमने आते हैं। वहां उनको घूमने के साथ ही संविधान की मूल प्रस्तावना की जानकारी मिल मिल रही है। इसमें भी वेस्ट मेटीरियल का इस्तेमाल किया गया है। इस तरह के पार्क अन्य जगहों पर भी विकसित होने चाहिएं, जिससे लोगों को उनका फायदा मिल सके।
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वर्जन
नगर पालिका बड़ौत की अध्यक्ष बबीता तोमर के अनुसार यह एक अच्छी पहल है और हम इसमें सहयोगी बने हैं। प्रशासन के साथ मिलकर पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई थी, जो अब बनकर तैयार हो गया।
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संविधान पार्क विकसित करने में अधिकतर उस सामान का इस्तेमाल किया गया है, जो कबाड़ हो गया था। उनसे ही पार्क में 11 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ाई की संविधान की किताब की कलाकृति बनाई गई है। पार्क में आते ही यह सबसे अलग दिखाई देती है और उस पर लिखी गई संविधान की प्रस्तावना हर कोई पढ़ता है। इस पार्क में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चरखे की बड़ी कलाकृति भी बनवाई गई है। इसके साथ ही महात्मा गांधी की मूर्ति लगी है। बागपत का पुराना नाम व्याघप्रस्थ था और उसको देखते हुए ही वाटर कियोस्क लगवाया गया है। पार्क में कुछ किताबों को रखा गया है, जिनसे इतिहास के बारे में जानकारी मिल सके। वहां घूमने आने वाले लोग उन किताबों से इतिहास की जानकारी ले सकते हैं। यह केवल इसलिए किया गया है, जिससे यहां सेहत सुधारने के साथ ही देश व संविधान से जुड़ा जरूरी ज्ञान भी लोग ले सकें।
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-संविधान व इतिहास के बारे में सभी को जानकारी होना जरूरी
डीएम अस्मिता लाल का कहना है कि हमारे देश के संविधान व इतिहास की जानकारी सभी को होनी जरूरी है। इसलिए ही इस संविधान पार्क को विकसित करने की योजना बनाई गई। जिस जगह पर यह पार्क विकसित किया गया है, वह बड़ौत शहर के बीच में है और वहां काफी संख्या में बच्चे, महिलाएं व पुरुष घूमने आते हैं। वहां उनको घूमने के साथ ही संविधान की मूल प्रस्तावना की जानकारी मिल मिल रही है। इसमें भी वेस्ट मेटीरियल का इस्तेमाल किया गया है। इस तरह के पार्क अन्य जगहों पर भी विकसित होने चाहिएं, जिससे लोगों को उनका फायदा मिल सके।
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नगर पालिका बड़ौत की अध्यक्ष बबीता तोमर के अनुसार यह एक अच्छी पहल है और हम इसमें सहयोगी बने हैं। प्रशासन के साथ मिलकर पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई थी, जो अब बनकर तैयार हो गया।