नशे की गिरफ्त में नाैनिहाल: मानसिक रोगी बन रहे बच्चे, बागपत से सामने आई चाैंकाने वाली रिपोर्ट
चिकित्सकों के अनुसार नशा व्यक्ति का मानसिक संतुलन खो देता है। यहां तक कि बच्चे भी नशे की गिरफ्त से दूर नहीं रह पा रहे हैं। वहीं बागपत से एक चाैंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है।
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बच्चे नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं और इस कारण वह मानसिक रोगी बन रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण घर की परेशानी और गलत संगत है। 13 से 18 वर्ष के बच्चे नशे के कारण सबसे अधिक बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिला अस्पताल में एक महीने में 90 से अधिक ऐसे बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं और उनकी काउंसलिंग करने के साथ ही अन्य कई तरीकों से उपचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामूहिक परिवार नहीं होने के अलावा परिजनों के कामकाज में व्यस्त रहने के कारण बच्चे अकेले महसूस करने लगते हैं। अकेलेपन के कारण बच्चे गलत संगत में फंसकर नशा करना शुरू कर देते हैं और उससे सोचने समझने की शक्ति प्रभावित होने लगती है।
घर में परेशानी होने पर बच्चे शांति की तलाश करते है और नशे की ओर बढ़ जाते है। पहली बार नशा करने पर बच्चे आराम महसूस करते है और धीरे-धीरे नशे के आदी बन जाते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि नशा दिमाग को प्रभावित करता है। लगातार नशा करने से नींद की कमी के कारण बच्चे तनावग्रस्त हो जाते हैं।
मानसिक रोग विशेषज्ञ का कहना है कि नशा करने के लिए बच्चे नए-नए तरीके खोजते हैं। जिला अस्पताल में एक महीने में लगभग 90 बच्चे ऐसे आ रहे है जो नशे के कारण मानसिक रोग का शिकार हुए हैं। ऐसे बच्चों का काउंसिलिंग के बाद इलाज कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि नशा व्यक्ति का मानसिक संतुलन खो देता है। मरीजों की मानसिक स्थिति का अनुमान लगाने के लिए पारिवारिक स्थिति के साथ उनके आस-पास के माहौल के बारे में भी जानकारी ली जाती है। नशे के आदी हो चुके बच्चों का काउंसिलिंग के साथ दवाइयों से उपचार किया जाता है।
-नशा करने से दिल की धड़कनें धीरे-धीरे कम होने लगती हैं
-सलोचन को सूंघने से रासायनिक पदार्थ फेफड़ों और गुर्दे को प्रभावित करता है
-शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है
-नशा करने वाले व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति कम होने लगती है
-दिल की बीमारी और ब्लड प्रेशर की परेशानी बढ़ जाती है
-दिमाग में बार-बार गलत विचार आते हैं
-याद्दाश्त कमजोर होने लगती है
पारिवारिक विवाद और अकेलेपन के कारण बच्चे नशे की गिरफ्त में आ रहे है। अस्पताल में एक महीने में 90 से अधिक बच्चे काउंसलिंग के लिए आ रहे है। बच्चों की काउंसलिंग के दौरान उनके परिवार की स्थिति और माहौल के बारे में भी जानकारी ली जाती है। - डॉ. अजय कुमार, मानसिक रोग विशेषज्ञ