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श्रीकृष्ण जन्मोत्सव सुन झूम उठे श्रद्धालु
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बड़ौत। नगर के एक विवाह मंडप में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में रविवार को कथा व्यास द्वारा भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का वृतांत सुनाकर सभी को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। सभी भगवान श्रीकृष्ण की जय-जयकार कर झूम उठे।
रविवार को भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण की जन्म कथा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। कथा व्यास पवन आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने भक्तों का उद्धार व पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग व उनके जन्म लेने के गूढ़ रहस्यों को कथा व्यास ने बेहद संजीदगी के साथ सुनाया। कथा प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान श्रीकृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए।
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कथा का संगीतमयी वर्णन सुन श्रद्धालुगण झूमने लगे। कथा व्यास पवन आचार्य ने कहा कि भगवान की सच्चे मन से भक्ति और प्रार्थना करने से मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की मनमोहक झांकियां भी कार्यक्रम में प्रदर्शित की र्गइं। इस अवसर पर आनंद वर्मा, सुरेंद्र कश्यप, आसाराम, सुंदरपाल सैनी, कृष्णपाल शर्मा, महेंद्र, रामपाल, राजकुमार, डॉ. ब्रजमोहन, हरीश मोहन, अंजलि देवी, सुशीला, रामवती गर्ग, श्यामलता, रामकुमार शर्मा, मंसाराम, अशोक, बृजेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
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रविवार को भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण की जन्म कथा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। कथा व्यास पवन आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने भक्तों का उद्धार व पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं।
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भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग व उनके जन्म लेने के गूढ़ रहस्यों को कथा व्यास ने बेहद संजीदगी के साथ सुनाया। कथा प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान श्रीकृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए।
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कथा का संगीतमयी वर्णन सुन श्रद्धालुगण झूमने लगे। कथा व्यास पवन आचार्य ने कहा कि भगवान की सच्चे मन से भक्ति और प्रार्थना करने से मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की मनमोहक झांकियां भी कार्यक्रम में प्रदर्शित की र्गइं। इस अवसर पर आनंद वर्मा, सुरेंद्र कश्यप, आसाराम, सुंदरपाल सैनी, कृष्णपाल शर्मा, महेंद्र, रामपाल, राजकुमार, डॉ. ब्रजमोहन, हरीश मोहन, अंजलि देवी, सुशीला, रामवती गर्ग, श्यामलता, रामकुमार शर्मा, मंसाराम, अशोक, बृजेश शर्मा आदि मौजूद रहे।