{"_id":"626983451aa23161da4096ec","slug":"straw-prices-skyrocket-storage-also-started-baraut-news-mrt586308533","type":"story","status":"publish","title_hn":"भूसे के दाम आसमान पर, भंडारण भी शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भूसे के दाम आसमान पर, भंडारण भी शुरू
विज्ञापन
गेहूं की थ्रेसिंग करती मशीन
- फोटो : BARAUT
1200 से 1300 क्विंटल बिक रहा भूसा, गत वर्ष 600 से 700 रुपये थी कीमत
किल्लत देख कुछ किसानों ने अवैध भंडारण भी शुरू किया, महंगी कीमत में बेच रहे
जनपद की 25 गोशालाओं में बंधे सैकड़ों बेसहारा पशुओं के चारे पर भी खड़ा संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जनपद में मवेशियों के लिए चारे का ऐसा संकट पहली बार हुआ है कि भूसा खरीदने में भी पशु पालकों के पसीने छूट रहे है। कारण है कि भूसा के दाम आसमान पर पहुंच गए है। स्थिति यह है कि इस बार भूसा गत वर्ष की तुलना में दोगुने रेट में बिक रहा है। गत वर्ष जनपद में भूसे का रेट 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि इस पर 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। इससे पशु पालकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींची है। इन बढ़ी कीमतों ने जनपद की 25 गोशालाओं में बंधे सैकड़ों बेसहारा पशुओं के चारे पर भी संकट खड़ा कर दिया है।
भूसे के रेट बढ़ने के ये बताए जा रहे कारण
1- 15 हेक्टेयर कम है इस बार गेहूं का रकबा
कृषि विभाग के अनुसार जनपद में इस बार 45 हजार हेक्टेयर गेहूं का रकबा है जबकि गत वर्ष 60 हजार हेक्टेयर रकबा था। ऐसे में 15 हेक्टेयर गेहूं का रकबा कम हो गया है। जिला कृषि अधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि इस बार सरसों की फसल की बुवाई अधिक हुई है। गत वर्ष जनपद मेें सरसों का रकबा 2500 हेक्टेयर था, जबकि इस साल 4000 हेक्टेयर है। गत वर्ष के सापेक्ष 1500 हेक्टेयर सरसों का रकबा अधिक है।
2- किसानों ने करना शुरू कर दिया भंडारण
भूसा खरीदने व बेचने का काम करने वाले लोग इस बार सीधे खेतों में जाकर किसानों से संपर्क कर रहे है। यह लोग किसानों से भूसा 700 से 800 रुपये प्रति क्विंटल खरीद रहे है। इस भूस को स्टॉक कर 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल बेच रहे है। इसके अलावा गेहूं की पैदावार कम है तो ज्यादातर किसानों को छोड़कर कुछ ही गेहूं और भूसा बेच रहे हैै। इसलिए भी भूसे के दाम में लगातार वृद्धि हो रही है।
विज्ञापन
3- कम निकल रहा भूसा और गेहूं
राजकीय बीज भंडार पर तैनात एडीओ कृषि रक्षा अधिकारी नरेश कुमार के अनुसार इस बार जनपद में गेहूं की पैदावार भी सामान्य रही है। गत वर्ष प्रति बीघा गेहूं का उत्पादन 3 से 3.5 क्विंटल था। भूसे का उत्पादन भी लगभग इतना ही था। मगर, इस बार यह घटकर तीन क्विंटल प्रति बीघा रह गया है। जिन किसानों ने समय पर गेहूं की बुवाई की है, उसका उत्पादन औसतन सवा तीन क्विंटल गेहूं और भूसा का उत्पादन भी इतना ही है।
4- पशुओं की संख्या में हुई वृद्धि तो खपत भी बढ़ी
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में मवेशियों की संख्या तकरीबन पांच लाख है। इनमें 1.5 लाख गोवंशीय और 3.5 लाख भैंस वंशीय पशु है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश चंद्रा ने बताया कि जनपद में संचालित 25 गोशालाओं में इस बार 3182 से अधिक गोवंश है, जबकि गत वर्ष 1982 पशु थे। यानी इस बार 1200 गोवंश गौशाला में बढ़ गए है। अधिकांश गोशालाओं में क्षमता से अधिक गोवंश है। सड़कों पर भी बेसहारा पशुओं की भी भीड़ है, जो लगातार बढ़ रही है। गोशालाओं में भी भूसे की व्यवस्था के लिए पशु पालन विभाग को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ये बोले किसान व पशु पालक
किसान देवराज व जयदेव का कहना है कि अब गांवों में भी भूसे की भारी किल्लत हो गई है। गांवों में भी 1000 से 1100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदना पड़ रहा है। पशु पालक ऋषिपाल का कहना है कि भूसे की ऐसी किल्लत पहली बार देखी है। पिछली साल आसानी से भूसा 650 से 750 रुपये प्रति क्विंटल मिल जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। ऐसे में जिन पशु पालकों के पास चार से पांच या अधिक पशु है, उनके सामने काफी दिक्कतें उत्पन्न हो रही है। पशु पालक मनोज का कहना है कि भूसा, पुआल, चूरी, चोकर सभी इतना महंगा हो गया है कि छोटे बड़े सभी पशुपालकों का बजट गड़बड़ा गया है। किसान का धान खुली बाजार में 1000 में बिक रहा है, मगर भूसे के दाम 1200 के पार जा रहे हैं।
भूसे के दामों में भारी वृद्धि हुई है। पिछले साल जो भूसा 650 रुपये प्रति क्विंटल मिल गया था, वह भूसा इस बार 1000 से लेकर 1100 तक खरीदना पड़ रहा है। लगातार भूसे के दाम बढ़ रहे है। - रमेश चंद्र, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
विज्ञापन
किल्लत देख कुछ किसानों ने अवैध भंडारण भी शुरू किया, महंगी कीमत में बेच रहे
जनपद की 25 गोशालाओं में बंधे सैकड़ों बेसहारा पशुओं के चारे पर भी खड़ा संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जनपद में मवेशियों के लिए चारे का ऐसा संकट पहली बार हुआ है कि भूसा खरीदने में भी पशु पालकों के पसीने छूट रहे है। कारण है कि भूसा के दाम आसमान पर पहुंच गए है। स्थिति यह है कि इस बार भूसा गत वर्ष की तुलना में दोगुने रेट में बिक रहा है। गत वर्ष जनपद में भूसे का रेट 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि इस पर 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। इससे पशु पालकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींची है। इन बढ़ी कीमतों ने जनपद की 25 गोशालाओं में बंधे सैकड़ों बेसहारा पशुओं के चारे पर भी संकट खड़ा कर दिया है।
भूसे के रेट बढ़ने के ये बताए जा रहे कारण
1- 15 हेक्टेयर कम है इस बार गेहूं का रकबा
कृषि विभाग के अनुसार जनपद में इस बार 45 हजार हेक्टेयर गेहूं का रकबा है जबकि गत वर्ष 60 हजार हेक्टेयर रकबा था। ऐसे में 15 हेक्टेयर गेहूं का रकबा कम हो गया है। जिला कृषि अधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि इस बार सरसों की फसल की बुवाई अधिक हुई है। गत वर्ष जनपद मेें सरसों का रकबा 2500 हेक्टेयर था, जबकि इस साल 4000 हेक्टेयर है। गत वर्ष के सापेक्ष 1500 हेक्टेयर सरसों का रकबा अधिक है।
विज्ञापन
2- किसानों ने करना शुरू कर दिया भंडारण
भूसा खरीदने व बेचने का काम करने वाले लोग इस बार सीधे खेतों में जाकर किसानों से संपर्क कर रहे है। यह लोग किसानों से भूसा 700 से 800 रुपये प्रति क्विंटल खरीद रहे है। इस भूस को स्टॉक कर 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल बेच रहे है। इसके अलावा गेहूं की पैदावार कम है तो ज्यादातर किसानों को छोड़कर कुछ ही गेहूं और भूसा बेच रहे हैै। इसलिए भी भूसे के दाम में लगातार वृद्धि हो रही है।
विज्ञापन
3- कम निकल रहा भूसा और गेहूं
राजकीय बीज भंडार पर तैनात एडीओ कृषि रक्षा अधिकारी नरेश कुमार के अनुसार इस बार जनपद में गेहूं की पैदावार भी सामान्य रही है। गत वर्ष प्रति बीघा गेहूं का उत्पादन 3 से 3.5 क्विंटल था। भूसे का उत्पादन भी लगभग इतना ही था। मगर, इस बार यह घटकर तीन क्विंटल प्रति बीघा रह गया है। जिन किसानों ने समय पर गेहूं की बुवाई की है, उसका उत्पादन औसतन सवा तीन क्विंटल गेहूं और भूसा का उत्पादन भी इतना ही है।
4- पशुओं की संख्या में हुई वृद्धि तो खपत भी बढ़ी
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में मवेशियों की संख्या तकरीबन पांच लाख है। इनमें 1.5 लाख गोवंशीय और 3.5 लाख भैंस वंशीय पशु है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश चंद्रा ने बताया कि जनपद में संचालित 25 गोशालाओं में इस बार 3182 से अधिक गोवंश है, जबकि गत वर्ष 1982 पशु थे। यानी इस बार 1200 गोवंश गौशाला में बढ़ गए है। अधिकांश गोशालाओं में क्षमता से अधिक गोवंश है। सड़कों पर भी बेसहारा पशुओं की भी भीड़ है, जो लगातार बढ़ रही है। गोशालाओं में भी भूसे की व्यवस्था के लिए पशु पालन विभाग को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ये बोले किसान व पशु पालक
किसान देवराज व जयदेव का कहना है कि अब गांवों में भी भूसे की भारी किल्लत हो गई है। गांवों में भी 1000 से 1100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदना पड़ रहा है। पशु पालक ऋषिपाल का कहना है कि भूसे की ऐसी किल्लत पहली बार देखी है। पिछली साल आसानी से भूसा 650 से 750 रुपये प्रति क्विंटल मिल जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। ऐसे में जिन पशु पालकों के पास चार से पांच या अधिक पशु है, उनके सामने काफी दिक्कतें उत्पन्न हो रही है। पशु पालक मनोज का कहना है कि भूसा, पुआल, चूरी, चोकर सभी इतना महंगा हो गया है कि छोटे बड़े सभी पशुपालकों का बजट गड़बड़ा गया है। किसान का धान खुली बाजार में 1000 में बिक रहा है, मगर भूसे के दाम 1200 के पार जा रहे हैं।
भूसे के दामों में भारी वृद्धि हुई है। पिछले साल जो भूसा 650 रुपये प्रति क्विंटल मिल गया था, वह भूसा इस बार 1000 से लेकर 1100 तक खरीदना पड़ रहा है। लगातार भूसे के दाम बढ़ रहे है। - रमेश चंद्र, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी