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सपनों की उड़ान: मुसीबत से नहीं डिगे कदम और पायल बन गई चैंपियन, खेल से निकाल रहीं भाई और खुद की पढ़ाई का खर्च

Wed, 20 Aug 2025 02:38 PM IST
मेरठ ब्यूरो मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत/बड़ौत
मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत/बड़ौत Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 20 Aug 2025 02:38 PM IST
सार

बड़ौत की पायल ने कठिन हालातों के बीच वेट लिफ्टिंग में 12 स्वर्ण पदक जीतकर मेरठ यूनिवर्सिटी चैंपियन का खिताब हासिल किया। पिता के हादसे के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए अब वह इंटरनेशनल स्तर पर खेलने और नौकरी की तैयारी कर रही हैं।

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Badauts Payal Turns Struggles into Strength, Wins 12 Gold Medals in Weightlifting and Prepares for Internatio
एथलीट पायल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुश्किल हालात और टूटे सहारे को ताकत में बदलकर बड़ौत की पायल वेट लिफ्टिंग में मेरठ यूनिवर्सिटी चैंपियन बन गई हैं और अभी तक 12 स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। अब वह इंटरनेशनल खेलने की तैयारी के साथ ही नौकरी की तलाश कर रही हैं।

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बड़ौत की छपरौली चुंगी की रहने वाली पायल के कंधों पर उस समय परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी, तब उनके पिता नीटू का वर्ष 2015 में बस हादसे में एक पैर कट गया था। वह निजी बस पर चालक थे और फिर उनके सामने रोजी रोटी की परेशानी खड़ी हो गई थी।

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पायल ने खेल में आगे बढ़ने हिम्मत छोड़ दी थी। ऐसे में उन्होंने चार साल पहले खेल के मैदान में कदम रखा और ठान लिया कि अब हालात को हराना है। अब पायल 23 साल की हो चुकी हैं। संघर्ष पूर्ण जीवन में पायल अब तक अपनी उम्र के बराबर पदक जीत चुकी हैं। वह दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज की बीए फाइनल की छात्रा हैं।

चार साल पहले उन्होंने कॉलेज की तरफ से खेलना शुरू किया। फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 64 किलो में वह मेरठ यूनिवर्सिटी वेटलिफ्टिंग और पावरलिफ्टिंग की 2022 की चैंपियन हैं। 2023 में रस्साकशी में मेरठ इंटर यूनिवर्सिटी खिताब जीता और इंटर यूनिवर्सिटी कलिंगा भुवनेश्वर प्रतियोगिता में छह कांस्य पदक भी अपने नाम किए। मेरठ यूनिवर्सिटी में अब तक करीब 12 स्वर्ण जीत चुकी हैं।

खेलों से अपने साथ भाई की पढ़ाई का निकल रहीं खर्च
पायल अपने खेल से न केवल पढ़ाई का खर्च निकाल रही हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक मदद भी कर रही हैं। भाई आकाश भी पढ़ाई कर रहा है। पायल का कहना है मेरे लिए हर मेडल सिर्फ जीत नहीं, बल्कि अपने परिवार के लिए नई उम्मीद है। पायल की यह कहानी साबित करती है कि अगर हौसला बुलंद हो तो हालात चाहे जितने मुश्किल क्यों न हों, जीत पक्की होती है।

इंटरनेशनल खेलने के लिए कर रहीं अभ्यास
वर्तमान में पायल आठ से 10 घंटे कड़ी मेहनत करने के साथ-साथ नौकरी की तलाश कर रही हैं। पायल का इंटरनेशनल खेलने का सपना है और इसकी वह तैयारी कर रही हैं। इसके अलावा परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए पढ़ाई के साथ ही नौकरी के लिए कोचिंग कर रही हैं।

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