बालैनी। पुरा महादेव गांव के परशुराम खेड़ा में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भगवत कथा के छठें दिन बृहस्पतिवार को कथावाचक ने कहा कि ईश्वर को जानने और पाने के लिए सबसे पहले अपने आप को समझना होगा। अपने ऊपर पड़े मोह के परदे को हटाना पड़ेगा।
कथा वाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने भगवान श्रीकृष्ण की लीला प्रसंगों को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला जीव एवं परमात्मा के मिलन का रास्ता दिखाती है। काम को पराजित करने की लीला साक्षात जीव एवं परमात्मा का मिलन है। हम परमात्मा को चाहते हैं परंतु अपने चारों ओर आडंबर फैलाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि गोपी यानी जीव, कृष्ण यानी परमात्मा, वस्त्र यानी अविद्या। जल में नग्न होकर स्नान करने से वरुण देवता का अपमान होता है। वस्त्र को चुराने की लीला के समय भगवान श्रीकृष्ण की अवस्था पांच वर्ष की थी। इस उम्र में बालक में काम वासना नहीं होती है। रासलीला वास्तव में जीव और परमात्मा के मिलन की एक आध्यात्मिक यात्रा है। जिस पर चलकर असीम शांति एवं आनंद का अनुभव प्राप्त होता है। कथा में महाराज सुरजमुनि स्वरूप, देवमुनि, पंडित जयभगवान शर्मा, ब्लॉक प्रमुख अनीश यादव, पूर्व सपा जिलाध्यक्ष डॉ. एसपी यादव, केपी सिंह, रजनीश मित्तल, देवी प्रसाद, गौरव चौधरी, ईश्वरदयाल अग्रवाल, विजय शर्मा मौजूद रहे।