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Baghpat News: श्रीजी का जाप्य, अभिषेक और शांतिधारा कराई
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फोटो नंबर 27केएआर 2
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। छोटा बाजार स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान में भक्तों ने श्रीजी की शांतिधारा, जाप्य, अभिषेेक और महाआरती की। वहीं बड़ागांव के श्री पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर में भक्तों ने श्रीजी की पूजा अर्चना की। आर्यिका चन्द्रमति माताजी ने मंगल प्रवचन किए।
खेकड़ा के जैन मंदिर में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान में दूसरे दिन मंगलवार को भक्तों ने सर्व प्रथम श्रीजी की नित्य नियम पूजा अर्चना की। जाप्य, श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद शुरू हुए पूजन विधान में भक्तों ने श्रीजी की महाआरती की। प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत ने विधान की सभी क्रियाएं पूर्ण कराईं। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमोंं का आयोजन हुआ। बिजनौर के कलाकारों ने श्रीजी को समर्पित मनमोहक भजन प्रस्तुत किए। भक्त भजनों पर नृत्य कर श्रीजी की जयजयकार कर झूमते रहे। मंदिर परिसर श्रीजी के जयकारों से गूंज उठा।
बडागांव स्थित जैन मंदिर में आयोजित विधान में भक्तों ने श्रीजी का विशेष पूजन किया। आर्यिका चन्द्रमति माताजी ने धर्म सभा में मंगल प्रवचन करते हुए कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान में पूजन करने से दिव्य शक्तियां प्रकट होती हैं। यह विधान सभी विधान का राजा है। सिद्ध शब्द का अर्थ है कृत्य, चक्र का अर्थ समूह और मंडल का अर्थ वृत्ताकार यंत्र से है। पुराणों के अनुसार मैना सुंदरी ने सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन कर अपने कोढ़ी पति श्रीपाल को कामदेव जैसा सुंदर बना दिया था। इस विधान में शामिल होकर पूजन करने से मनुष्य के सभी दुख दूर हो जाते हैं और जीवन खुशियों से भर जाता है। भक्तों ने श्रीजी की पूजा अर्चना कर धर्म लाभ उठाया। इस दौरान राजीव जैन, अमित जैन, आरव जैन, सुमेर जैन, अंकित जैन, यश जैन, हर्ष जैन, तुषार जैन, अर्पित जैन, सम्यक जैन, यश जैन आदि शामिल रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। छोटा बाजार स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान में भक्तों ने श्रीजी की शांतिधारा, जाप्य, अभिषेेक और महाआरती की। वहीं बड़ागांव के श्री पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर में भक्तों ने श्रीजी की पूजा अर्चना की। आर्यिका चन्द्रमति माताजी ने मंगल प्रवचन किए।
खेकड़ा के जैन मंदिर में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान में दूसरे दिन मंगलवार को भक्तों ने सर्व प्रथम श्रीजी की नित्य नियम पूजा अर्चना की। जाप्य, श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद शुरू हुए पूजन विधान में भक्तों ने श्रीजी की महाआरती की। प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत ने विधान की सभी क्रियाएं पूर्ण कराईं। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमोंं का आयोजन हुआ। बिजनौर के कलाकारों ने श्रीजी को समर्पित मनमोहक भजन प्रस्तुत किए। भक्त भजनों पर नृत्य कर श्रीजी की जयजयकार कर झूमते रहे। मंदिर परिसर श्रीजी के जयकारों से गूंज उठा।
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बडागांव स्थित जैन मंदिर में आयोजित विधान में भक्तों ने श्रीजी का विशेष पूजन किया। आर्यिका चन्द्रमति माताजी ने धर्म सभा में मंगल प्रवचन करते हुए कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान में पूजन करने से दिव्य शक्तियां प्रकट होती हैं। यह विधान सभी विधान का राजा है। सिद्ध शब्द का अर्थ है कृत्य, चक्र का अर्थ समूह और मंडल का अर्थ वृत्ताकार यंत्र से है। पुराणों के अनुसार मैना सुंदरी ने सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन कर अपने कोढ़ी पति श्रीपाल को कामदेव जैसा सुंदर बना दिया था। इस विधान में शामिल होकर पूजन करने से मनुष्य के सभी दुख दूर हो जाते हैं और जीवन खुशियों से भर जाता है। भक्तों ने श्रीजी की पूजा अर्चना कर धर्म लाभ उठाया। इस दौरान राजीव जैन, अमित जैन, आरव जैन, सुमेर जैन, अंकित जैन, यश जैन, हर्ष जैन, तुषार जैन, अर्पित जैन, सम्यक जैन, यश जैन आदि शामिल रहे।
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