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शिवालय के नीचे हो सकता है हजारों साल पुराना मंदिर

Wed, 23 Oct 2019 12:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 23 Oct 2019 12:51 AM IST
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shivalya ke neeche ho sakata hai hazaron saal purana mandir
देखने वालों की भीड़ लगी - फोटो : अमर उजाला
शिवालय के नीचे हो सकता है हजारों साल पुराना मंदिर
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बड़ौत (बागपत)। सिनौली के प्राचीन शिवालय के फर्श के निर्माण के दौरान मिट्टी हटाते समय प्राचीन घुमावदार सीढ़ियां, ईटें और प्राचीन मृदभांड के अवशेष मिलने के बाद से इसके रहस्य जानने को हर कोई बेताब है। मंगलवार को शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन ने गांव में पहुंचकर इस स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि यहां पर कुषाणकालीन मृदभांर्ड, इंट और प्रतिहार कालीन मूर्तियों के अवशेष मंदिर के गर्भ गृह में मौजूद हैं जो यहां पर कई सभ्यताओं के होने का संकेत दे रहे हैं। संभावना है कि सिनौली सभ्यता के समाधान केंद्र की मानव बस्ती इसी स्थान पर मौजूद हो। डॉ. जैन का कहना है कि अगर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उनके प्रस्ताव को मानती है तो यहां पर ट्रायल ट्रेंच लगाकर शोध कार्य को आगे बढ़ाया जा सकता है। यह शोध करना जरूरी भी है।
इतिहासकार डॉ. जैन ने मंदिर परिसर के आसपास पहले पुरावशेषों को इकट्ठा कर इनका पुरातात्विक आधार पर निरीक्षण किया तो पाया कि यहां मिल रहे पुरावशेष मिश्रित संस्कृति के संकेत दे रहे हैं। खंडित टेराकेाटा मूर्ति का चेहरा देखकर बताया कि यह मंदिर की स्थापना काल के दौरान मंदिर के दीवारों में एक फलक की भांति लगाया गया होगा। कालांतर में खंडित होकर जमीन में दब गया। वहां से मिले मृदभांड़ के खंडित अवशेषों की जांच के बाद लगता है कि यहां पर कुषाणकालीन सभ्यता के लोगों का भी निवास रहा होगा। सृक्ष्म दृष्टि से मंदिर के गर्भगृह और स्थापत्य को देखकर बताया कि यह मंदिर करीब 300 साल प्राचीन है। लेकिन इस मंदिर के नीचे एक ओर प्राचीन मंदिर या फिर प्राचीन मानव बस्ती के प्रमाण मिल सकते हैं। आसपास बिखरे मृदभांड और पुरावशेष यहां की सभ्यता को कम से कम 2000 हजार साल पुराना होने के संकेत दे रहे हैं। एएसआई अगर यहां ट्रायल ट्रेंच लगाकर उत्खनन कराए तो यहां इस मंदिर के नीचे तीनों चरणों की खोदाई में मिले शवाधान केंद्र की मानव बस्ती भी मिल सकती है।
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कुषाणकालीन निर्माण की ही है संभावना
बड़ौत। प्राचीन मंदिर के नीचे की ओर मिल रहे फ्लोर में लगी ईंट की चौड़ाई 10 इंच, लंबाई 10 इंच और मोटाई दो इंच है। इससे संभावना है कि नीचे के फर्श का निर्माण कुषाणकाल के लोगों द्वारा किया गया था। उत्खन्न में और अधिक पुरावशेषों के मिल सकती है। यह सिद्ध करता है कि सिनौली गांव की प्राचीन सभ्यता जहां महाभारत काल से संबंधित है। पुरातत्व विशेषज्ञ शोध को आगे बढ़ाएंगे तो निश्चित रूप से रहस्यों से पर्दा उठ सकेगा। इसके लिए प्रयास जारी हैं।
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