{"_id":"57faaf2e4f1c1b665228e6fc","slug":"shahpur-khurd-burd-some-unscrupulous-elements-were-found-in-the-ring-well","type":"story","status":"publish","title_hn":"असामाजिक तत्वों ने खुर्द-बुर्द किए शाहपुर में मिले रिंग वेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
असामाजिक तत्वों ने खुर्द-बुर्द किए शाहपुर में मिले रिंग वेल
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 10 Oct 2016 03:20 PM IST
विज्ञापन
जहां रिंग वेल मिले, उस जगह को देखते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
बिनौली। शाहपुर बाणगंगा गांव में हिंडन किनारे खेत में मिले बौद्ध काल के रिंग वेल (गोल कुएं) को पुलिस और प्रशासन की अनदेखी के चलते असामाजिक तत्वों ने खुर्द-बुर्द कर दिया।
रविवार को दिन निकलने पर खेत मालिक को जानकारी मिली। असामाजिक तत्वों की करतूत से इतिहास की कईं परतें खुलने से रह गई। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने मामले को गंभीरता नहीं लिया। उधर, सीओ क्राइम श्वेताभ पांडेय का कहना है कि पुलिस को किसी ने रिंग वेल मिलने की जानकारी नहीं दी थी। अगर कोई तहरीर मिलती है तो पुलिस जांच कर अपनी कार्रवाई करेगी।
बरनावा गांव के किसान राजीव त्यागी के खेत में रिंग वेल मिले थे। प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ डीवी शर्मा और डॉ केके शर्मा ने इनके बौद्धकाल के होने की पुष्टि की थी। बताया गया था कि इस तरह के रिंग वेल तब लोग अपने घरों के बाहर गंदा पानी जमा करने अथवा कूड़ा डालने के लिए बनाते थे। इनकी चौड़ाई और गहराई बहुत ज्यादा नहीं होती थी।
विज्ञापन
विशेष स्थलों पर भी इस तरह के रिंग वेल बनाए जाते थे। मौर्य वंश में इस तरह के रिंग वेल दिल्ली के पुराने किले में मिले थे। इससे पहले ऐसे रिंग वेल केवल वर्ष 1950-51 में हस्तिनापुर में ही मिले थे। शनिवार रात यहां कुछ असामाजिक तत्वों ने दो जगह मिले रिंग वेल को खुर्द-बुर्द कर दिया। अधिकतर रिंग को यहां से हटा दिया गया है। रविवार को किसान राजीव त्यागी अपने कुछ साथियों के साथ यहां पहुंचा तो उसे मामले की जानकारी मिली।
किसान का कहना था अगर पुलिस-प्रशासन खेत की सुरक्षा बढ़ाते या मामले को गंभीरता से लेते तो इतिहास की कई परतें खुल सकती थी। खेत मालिक ने अपने खेत का काफी हिस्सा छोडने का फैसला कर लिया था। उत्खनन के कार्य से जुडे रहे ऑर्कियोलॉजिस्ट डॉ डीवी शर्मा, प्रोफेसर डॉ केके शर्मा और डॉ विजय लक्ष्मी का कहना है कि रिंग वेल को इस तरह खुर्द-बुर्द किया जाना गलत है। जिन लोगों ने इस तरह का काम किया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
सिनौली में सबसे बड़ा शवदान ग्रह
हडप्पाकालीन अवशेषों की बात करें तो वर्ष 2005-06 में देश की सबसे बड़ी साइट सिनौली साबित हुआ। यहां हड़प्पाकाल का अब तक का सबसे बड़ा शवदान ग्रह मिला था। इसमें शवों का अंतिम संस्कार ठीक उसी तरह किए जाने की व्यवस्था थी, जैसे ऋग्वेद में बताई जाती है।
विज्ञापन
रविवार को दिन निकलने पर खेत मालिक को जानकारी मिली। असामाजिक तत्वों की करतूत से इतिहास की कईं परतें खुलने से रह गई। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने मामले को गंभीरता नहीं लिया। उधर, सीओ क्राइम श्वेताभ पांडेय का कहना है कि पुलिस को किसी ने रिंग वेल मिलने की जानकारी नहीं दी थी। अगर कोई तहरीर मिलती है तो पुलिस जांच कर अपनी कार्रवाई करेगी।
विज्ञापन
बरनावा गांव के किसान राजीव त्यागी के खेत में रिंग वेल मिले थे। प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ डीवी शर्मा और डॉ केके शर्मा ने इनके बौद्धकाल के होने की पुष्टि की थी। बताया गया था कि इस तरह के रिंग वेल तब लोग अपने घरों के बाहर गंदा पानी जमा करने अथवा कूड़ा डालने के लिए बनाते थे। इनकी चौड़ाई और गहराई बहुत ज्यादा नहीं होती थी।
विज्ञापन
विशेष स्थलों पर भी इस तरह के रिंग वेल बनाए जाते थे। मौर्य वंश में इस तरह के रिंग वेल दिल्ली के पुराने किले में मिले थे। इससे पहले ऐसे रिंग वेल केवल वर्ष 1950-51 में हस्तिनापुर में ही मिले थे। शनिवार रात यहां कुछ असामाजिक तत्वों ने दो जगह मिले रिंग वेल को खुर्द-बुर्द कर दिया। अधिकतर रिंग को यहां से हटा दिया गया है। रविवार को किसान राजीव त्यागी अपने कुछ साथियों के साथ यहां पहुंचा तो उसे मामले की जानकारी मिली।
किसान का कहना था अगर पुलिस-प्रशासन खेत की सुरक्षा बढ़ाते या मामले को गंभीरता से लेते तो इतिहास की कई परतें खुल सकती थी। खेत मालिक ने अपने खेत का काफी हिस्सा छोडने का फैसला कर लिया था। उत्खनन के कार्य से जुडे रहे ऑर्कियोलॉजिस्ट डॉ डीवी शर्मा, प्रोफेसर डॉ केके शर्मा और डॉ विजय लक्ष्मी का कहना है कि रिंग वेल को इस तरह खुर्द-बुर्द किया जाना गलत है। जिन लोगों ने इस तरह का काम किया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
सिनौली में सबसे बड़ा शवदान ग्रह
हडप्पाकालीन अवशेषों की बात करें तो वर्ष 2005-06 में देश की सबसे बड़ी साइट सिनौली साबित हुआ। यहां हड़प्पाकाल का अब तक का सबसे बड़ा शवदान ग्रह मिला था। इसमें शवों का अंतिम संस्कार ठीक उसी तरह किए जाने की व्यवस्था थी, जैसे ऋग्वेद में बताई जाती है।