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Baghpat News: वाटर कूलर के तीन करोड़ रुपये के घपले में 105 सचिवों व एडीओ का वेतन रोका
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बागपत। गांवों में बिना आरओ सिस्टम के लोकल वाटर कूलर लगवाकर तीन करोड़ रुपये के घपले के मामले में 105 सचिवों व एडीओ का वेतन रोक दिया गया है। घपला सामने आने के बाद जांच के लिए फाइल मांगने पर इन्होंने डीपीआरओ की चकरघिन्नी बना दी, इसलिए फाइल जमा कराने के बाद ही वेतन जारी होगा।
विकास कार्य कराने के लिए गांवों के खातों में 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट था। अब प्रधानों का कार्यकाल का एक साल बचा हुआ है और बजट भी इतना ज्यादा बाकी था। इसको देखते हुए सचिवों व प्रधानों ने गांवों में लोगों की प्यास बुझाने के लिए वाटर कूलर लगवा दिए। एक वाटर कूलर का भुगतान सवा लाख रुपये तक हुआ, जबकि बाजार में बिना आरओ के लोकल वाटर कूलर की जीएसटी के साथ अधिकतम 40 हजार रुपये तक कीमत है। यह भी घपला किया गया कि निविदा जारी करते हुए वाटर कूलर के साथ आरओ को शामिल किया गया लेकिन गांवों में आरओ के नाम पर टंकी लगे स्टील के डिब्बे रखवा दिए गए और वे खराब भी होने लगे।
इस तरह हुआ घपला
गांवों में करीब 355 वाटर कूलर लगवाए गए हैं। इन वाटर कूलर की बाजार में कीमत लगभग 1,42,00,000 रुपये है और इनके लिए 4,43,75,000 रुपये खर्च कर दिए गए। इस तरह 3,01,75,000 रुपये ज्यादा निकाले गए हैं।
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डीपीआरओ ने मांगी फाइल, किसी ने जवाब तक नहीं दिया
डीपीआरओ अरुण अत्री ने यह घपला सामने आने के बाद सभी से वाटर कूलर लगवाने की फाइल मांगी लेकिन किसी ने फाइल देना तो दूर, उनके पत्र का जवाब तक नहीं दिया। डीपीआरओ के तीन बार पत्र जारी करने के बाद भी उनको सभी घुमाते रहे। अब आखिरी पत्र जारी किया गया है, जिसमें सभी का वेतन रोकने के आदेश हैं।
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गांवों में वाटर कूलर लगवाने में गड़बड़ी करने का पता चला तो सभी से फाइल मांगी गई है। अब फाइल आने पर पूरी जांच कराई जाएगी। अभी फाइल नहीं देने पर सभी का वेतन रोक दिया गया है। इसकी पूरी जांच होने के बाद ही पता चलेगा कि किसने क्या गड़बड़ी की है।
-अरुण अत्री, जिला पंचायत राज अधिकारी
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विकास कार्य कराने के लिए गांवों के खातों में 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट था। अब प्रधानों का कार्यकाल का एक साल बचा हुआ है और बजट भी इतना ज्यादा बाकी था। इसको देखते हुए सचिवों व प्रधानों ने गांवों में लोगों की प्यास बुझाने के लिए वाटर कूलर लगवा दिए। एक वाटर कूलर का भुगतान सवा लाख रुपये तक हुआ, जबकि बाजार में बिना आरओ के लोकल वाटर कूलर की जीएसटी के साथ अधिकतम 40 हजार रुपये तक कीमत है। यह भी घपला किया गया कि निविदा जारी करते हुए वाटर कूलर के साथ आरओ को शामिल किया गया लेकिन गांवों में आरओ के नाम पर टंकी लगे स्टील के डिब्बे रखवा दिए गए और वे खराब भी होने लगे।
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इस तरह हुआ घपला
गांवों में करीब 355 वाटर कूलर लगवाए गए हैं। इन वाटर कूलर की बाजार में कीमत लगभग 1,42,00,000 रुपये है और इनके लिए 4,43,75,000 रुपये खर्च कर दिए गए। इस तरह 3,01,75,000 रुपये ज्यादा निकाले गए हैं।
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डीपीआरओ ने मांगी फाइल, किसी ने जवाब तक नहीं दिया
डीपीआरओ अरुण अत्री ने यह घपला सामने आने के बाद सभी से वाटर कूलर लगवाने की फाइल मांगी लेकिन किसी ने फाइल देना तो दूर, उनके पत्र का जवाब तक नहीं दिया। डीपीआरओ के तीन बार पत्र जारी करने के बाद भी उनको सभी घुमाते रहे। अब आखिरी पत्र जारी किया गया है, जिसमें सभी का वेतन रोकने के आदेश हैं।
गांवों में वाटर कूलर लगवाने में गड़बड़ी करने का पता चला तो सभी से फाइल मांगी गई है। अब फाइल आने पर पूरी जांच कराई जाएगी। अभी फाइल नहीं देने पर सभी का वेतन रोक दिया गया है। इसकी पूरी जांच होने के बाद ही पता चलेगा कि किसने क्या गड़बड़ी की है।
-अरुण अत्री, जिला पंचायत राज अधिकारी