{"_id":"60e346a98ebc3e9e92248b41","slug":"scientists-gave-useful-information-to-farmers-baghpat-news-mrt546025617","type":"story","status":"publish","title_hn":"वैज्ञानिकों ने किसानों को दी उपयोगी जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वैज्ञानिकों ने किसानों को दी उपयोगी जानकारी
विज्ञापन
रमाला (बागपत)। कृषि वैज्ञानिकों ने सोमवार को सहकारी चीनी मिल, रमाला के क्षेत्र के कई गांवों का भ्रमण कर किसानों को गन्ने की फसल में लगने वाले रोगों और उनसे बचाव के बारे में बताया।
गन्ना शोध केंद्र, मुजफ्फरनगर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अवधेश कुमार और डॉ. अजय चौहान ने मिल के प्रधान प्रबंधक डॉ. आरबी राम के साथ किरठल, असारा, ककड़ीपुर, रमाला आदि गांवों में किसानों से मिलकर फसल में पक्का बोइंग एवं चोटी बेधक रोग की पहचान और रोकथाम के बारे में बताया। वैज्ञानिकों ने बताया कि मानसून आने के पूर्व ही गन्ने की फसल में रोग और कीट लगने की संभावना भी बढ़ जाती है, ऐसे में किसानों के लिए सबसे ज्यादा जानना जरूरी है कि इस समय अपनी फसल को बर्बाद होने से कैसे बचाएं।
वर्तमान समय में गन्ने की फसल पर पोक्का बोइंग, स्टेम रॉट ज्यादा लगते हैं, इससे किसान की लागत बढ़ जाती है। किसान कई बार बीमारियों की सही पहचान भी नहीं कर पाते हैं, इस कारण उन्हें नुकसान होता है। वर्तमान समय में गन्ने की किस्मों और कहीं-कहीं पर लोकेशन के हिसाब से भी रोग लगते हैं। इस समय कोशा 0238 किस्म जहां पर होगी, उसमें संभावना होगी कि वहां पोक्का बोइंग रोग लगेगा ही। इसके साथ ही टॉप बोरर, स्मट जैसी बीमारियां भी लगेगी, क्योंकि जैसे-जैसे बारिश आती है, इसी तरह ही बीमारियां भी आती हैं। जब बरसात शुरू होती है, तो वातावरण में नमी बढ़ जाती है, बीमारियों को बढ़ने को वातावरण मिल जाता है। पोक्का बोइंग रोग के शुरूआत में पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं। उन्होंने किसानों को रोगों से बचने के उपाय बताए।
विज्ञापन
विज्ञापन
गन्ना शोध केंद्र, मुजफ्फरनगर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अवधेश कुमार और डॉ. अजय चौहान ने मिल के प्रधान प्रबंधक डॉ. आरबी राम के साथ किरठल, असारा, ककड़ीपुर, रमाला आदि गांवों में किसानों से मिलकर फसल में पक्का बोइंग एवं चोटी बेधक रोग की पहचान और रोकथाम के बारे में बताया। वैज्ञानिकों ने बताया कि मानसून आने के पूर्व ही गन्ने की फसल में रोग और कीट लगने की संभावना भी बढ़ जाती है, ऐसे में किसानों के लिए सबसे ज्यादा जानना जरूरी है कि इस समय अपनी फसल को बर्बाद होने से कैसे बचाएं।
विज्ञापन
वर्तमान समय में गन्ने की फसल पर पोक्का बोइंग, स्टेम रॉट ज्यादा लगते हैं, इससे किसान की लागत बढ़ जाती है। किसान कई बार बीमारियों की सही पहचान भी नहीं कर पाते हैं, इस कारण उन्हें नुकसान होता है। वर्तमान समय में गन्ने की किस्मों और कहीं-कहीं पर लोकेशन के हिसाब से भी रोग लगते हैं। इस समय कोशा 0238 किस्म जहां पर होगी, उसमें संभावना होगी कि वहां पोक्का बोइंग रोग लगेगा ही। इसके साथ ही टॉप बोरर, स्मट जैसी बीमारियां भी लगेगी, क्योंकि जैसे-जैसे बारिश आती है, इसी तरह ही बीमारियां भी आती हैं। जब बरसात शुरू होती है, तो वातावरण में नमी बढ़ जाती है, बीमारियों को बढ़ने को वातावरण मिल जाता है। पोक्का बोइंग रोग के शुरूआत में पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं। उन्होंने किसानों को रोगों से बचने के उपाय बताए।
विज्ञापन