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सेना में लेफ्टिनेंट बन संगम ने दादा का सपना किया पूरा
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बागपत। दौझा गांव निवासी संगम त्यागी ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर जिले का नाम रोशन किया। उनकी इस सफलता पर परिवार में खुशी का माहौल है।
देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में शनिवार को हुई पासिंग आउट परेड के बाद संगम त्यागी ने लेफ्टिनेंट पद की शपथ ली। कोरोना के कारण इस बार पासिंग आउट परेड में कैडेटों के माता-पिता शामिल नहीं हो पाए, इसलिए पीओपी का लाइव प्रसारण किया। संगम के परिजनों ने भी टीवी पर अपने लाड़ले के कंधों पर सितारे सजते देखे।
पूरा हुआ दादा का सपना
संगम त्यागी अपनी इस सफलता का श्रेय अपने दादा स्वर्गीय त्रिलोक चंद त्यागी को देते हैं। संगम का कहना है कि उन्हें देश सेवा की प्रेरणा अपने दादा से ही मिली। उनके दादा त्रिलोक चंद त्यागी एक किसान थे और कहा करते थे कि देश से बढ़कर कुछ नहीं होता है। संगम के मुताबिक उनके दादा उन्हें सेना की वर्दी पहने देखना चाहते थे, लेकिन नवंबर 2019 में उनका देहांत हो गया। संगम ने कहा कि आज उनके दादा का सपना पूरा हुआ है।
बचपन से ही होनहार हैं संगम
संगम का परिवार मेरठ के रोहटा रोड स्थित तेज विहार कॉलोनी में रहता है। उनके पिता डॉ. बीपी त्यागी का रोहटा रोड पर क्लीनिक है। मां पवन त्यागी मेडिकल स्टोर चलाती हैं। बड़ी बहन वचना त्यागी एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। संगम कक्षा पांच तक रोहटा रोड स्थित गॉडविन पब्लिक स्कूल से पढ़े। इसके बाद उन्होंने अपनी 12वीं तक की शिक्षा सैनिक स्कूल, घोड़ा खाल (नैनीताल) से हासिल की। पढ़ाई और खेलकूद दोनों में अव्वल रहे संगम त्यागी को 26 मई 2017 को उत्तराखंड सरकार की ओर से बेस्ट कैडेट के तौर पर ’गवर्नर ट्रॉफी’ से भी नवाजा था। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के लिए संगम त्यागी का चयन साल 2017 में हुआ था। प्रवेश परीक्षा में उन्होंने देशभर में 24वां स्थान प्राप्त किया था। एनडीए में तीन साल के कड़े शिक्षण - प्रशिक्षण के बाद संगम पिछले साल आईएमए पहुंचे।
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देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में शनिवार को हुई पासिंग आउट परेड के बाद संगम त्यागी ने लेफ्टिनेंट पद की शपथ ली। कोरोना के कारण इस बार पासिंग आउट परेड में कैडेटों के माता-पिता शामिल नहीं हो पाए, इसलिए पीओपी का लाइव प्रसारण किया। संगम के परिजनों ने भी टीवी पर अपने लाड़ले के कंधों पर सितारे सजते देखे।
पूरा हुआ दादा का सपना
संगम त्यागी अपनी इस सफलता का श्रेय अपने दादा स्वर्गीय त्रिलोक चंद त्यागी को देते हैं। संगम का कहना है कि उन्हें देश सेवा की प्रेरणा अपने दादा से ही मिली। उनके दादा त्रिलोक चंद त्यागी एक किसान थे और कहा करते थे कि देश से बढ़कर कुछ नहीं होता है। संगम के मुताबिक उनके दादा उन्हें सेना की वर्दी पहने देखना चाहते थे, लेकिन नवंबर 2019 में उनका देहांत हो गया। संगम ने कहा कि आज उनके दादा का सपना पूरा हुआ है।
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बचपन से ही होनहार हैं संगम
संगम का परिवार मेरठ के रोहटा रोड स्थित तेज विहार कॉलोनी में रहता है। उनके पिता डॉ. बीपी त्यागी का रोहटा रोड पर क्लीनिक है। मां पवन त्यागी मेडिकल स्टोर चलाती हैं। बड़ी बहन वचना त्यागी एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। संगम कक्षा पांच तक रोहटा रोड स्थित गॉडविन पब्लिक स्कूल से पढ़े। इसके बाद उन्होंने अपनी 12वीं तक की शिक्षा सैनिक स्कूल, घोड़ा खाल (नैनीताल) से हासिल की। पढ़ाई और खेलकूद दोनों में अव्वल रहे संगम त्यागी को 26 मई 2017 को उत्तराखंड सरकार की ओर से बेस्ट कैडेट के तौर पर ’गवर्नर ट्रॉफी’ से भी नवाजा था। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के लिए संगम त्यागी का चयन साल 2017 में हुआ था। प्रवेश परीक्षा में उन्होंने देशभर में 24वां स्थान प्राप्त किया था। एनडीए में तीन साल के कड़े शिक्षण - प्रशिक्षण के बाद संगम पिछले साल आईएमए पहुंचे।
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