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अधूरे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर दौड़ रहे वाहन
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Tue, 19 Dec 2017 01:36 AM IST
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बागपत में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से गुजरते वाहन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का निर्माण आधा अधूरा है, लेकिन इससे वाहन गुजरने शुरू हो गए हैं। बागपत के मवी कलां के निकट कट से चालक एक्सप्रेस-वे पर वाहनों को चढ़ाकर सोनीपत के कुंडली तक ले जा रहे हैं।
हालांकि कुंडली में ओवरब्रिज नहीं बना है। सर्विस रोड भी कच्चा है, लेकिन इसके बाद भी एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की संख्या बढ़ने लगी है। बागपत से दिल्ली जाने वाले या बाघा बार्डर तक जाने वाले लोग इस एक्सप्रेस-वे से गुजर रहे हैं। हालांकि इससे गुजरना अभी खतरे से खाली नहीं है। एक ही साइड चालू होने से खतरा अधिक है। हाईवे के लोकसभा चुनाव से पहल शुरू हो जाने की उम्मीद है। बागपत में इसका करीब 21 किमी का टुकड़ा है और यहां से कुंडल तक जाने में वाहन चालकों को करीब 20 से 25 मिनट तक खर्च होंगे। दिल्ली पर वाहनों का दबाव कम करने में एक्सप्रेस-वे लाभदायक होगा।
क्या होगा फायदा
बागपत। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का जहाजरानी, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 28 अप्रैल को निरीक्षण किया था। उन्होंने बताया था कि पीएम नरेंद्र मोदी वर्ष 2018 की शुरूआत में ही हाईवे का उद्घाटन करेंगे।
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दिल्ली पर वाहनों का बोझ कम होगा, प्रदूषण भी कम हो जाएगा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जाने के लिए अब लोगों को दिल्ली से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उद्योग स्थापित होंगे, जिनसे क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। एक्सप्रेस-वे के निर्माण की लागत से कहीं ज्यादा किसानों को मुआवजा दिया गया है। पूरे क्षेत्र का विकास होगा।
ऐसा है ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे
बागपत। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 135 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य करा रहा है। इसका निर्माण 14 सितंबर 2015 को शुरू हुआ। इस पर चार बड़े पुल हैं, इनमें दो पुल यमुना नदी पर, एक हिंडन और एक आगरा में है। इसके अलावा 45 छोटे पुल, रेलवे ओवर ब्रिज आठ हैं। फ्लाईओवर चार, अंडर पास की संख्या करीब तीन सौ से ज्यादा है।
सात हाईवे से गुजरेगा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे
बागपत। एक्सप्रेस-वे सात हाईवे से कनेक्ट होगा। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर मवी कलां गांव में, दिल्ली-मेरठ पर दुहाई गांव में, दिल्ली-हापुड़ पर डासना में, गाजियाबाद-अलीगढ़ पर गांव अकबरपुर में, कासना-बुलंदशहर पर गांव सिरसा में और दिल्ली-आगरा में पलवल में कनेक्ट होगा।
बागपत में 20 किमी का टुकड़ा
बागपत। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का बागपत में करीब 20.125 किमी का टुकड़ा है। एक्सप्रेस-वे जिले के काठा, मवी कलां, खेकड़ा, रावण उर्फ बड़ा गांव, नंगला बहेड़ी, लहचौड़ा, गौना, सिंगौली तगा, सरफाबाद, आलमगिरपुर उर्फ टुकाली एवं फुलैरा गांव से होकर गुजरता है।
बागपत जिले का कितना क्षेत्रफल
बागपत। जिले के किसानों ने 219.97 हेक्टेयर भूमि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लिए दी है। भूमि के जाने से 2221 किसान प्रभावित हुए, जिनके 869 खसरा संख्या से इसके लिए जमीन ली गई है।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, इसका लोगों को बड़ा फायदा होगा।
- डॉ. सत्यपाल सिंह, केंद्रीय मानव संसाधन, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरोद्धार राज्यमंत्री
एक्सप्रेस-वे से बागपत का विकास होगा। उद्योग लगेंगे और लोगों का समय बचेगा। लोगों को सफर करने में भी आसानी होगी।
- योगेश धामा, भाजपा के बागपत विधायक
कल से यमुना एक्सप्रेस-वे पर होगा डायवर्जन
ग्रेटर नोएडा।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे को मार्च तक चालू करने के मद्देनजर जगनपुर अफजलपुर के पास फ्लाईओवर बनाने का काम तेज हो गया है। बुधवार (20 दिसंबर) से यमुना एक्सप्रेस-वे पर डायवर्जन भी होगा।
एनएचएआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 तक अंतिम डेडलाइन तय की है, लेकिन इसे मार्च तक बनाकर चालू करने की दिशा में काम चल रहा है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का 85 से 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
बचा हुआ काम भी अगले तीन माह में पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद इसे वाहन चालकों के लिए खोल दिया जाएगा। फ्लाईओवर बनाने के लिए कल से यमुना एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक डायवर्जन भी होगा। ग्रेटर नोएडा से आगरा जाते समय जीरो प्वाइंट से पांच किलोमीटर पर शुरू होगा और 10 किलोमीटर तक रहेगा।
जहां पर फ्लाईओवर बन रहा है, वह 8.5 किलोमीटर पर है। एक्सप्रेस-वे पर एक तरफ से वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। दूसरी तरफ से दो-दो लेन चालू रहेगी, जिसमें से दो लेन आने वाले और दो लेन जाने वाले वाहनों के लिए होगा। ग्रेटर नोएडा से जाते समय पांच और 10 किमी पर पहले से कट है।
उसी का इस्तेमाल कर लिया जाएगा। डायवर्जन से पहले सुरक्षा के तमाम उपाय अपनाए जाएंगे। ट्रायल भी किया जाएगा। उसमें जो भी खामियां होंगी, उनको दूर किया जाएगा। इधर से जाने वाले वाहनों को जीरो प्वाइंट और आगरा से आने वाले वाहन चालकों को जेवर टोल प्लाजा पर जागरूक किया जाएगा।
जल्द ही जाम से मुक्ति दिला सकता है ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे
गाजियाबाद। शहर के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को जल्द ही जाम से मुक्ति मिल सकेगी। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का काम अब अंतिम दौर में है। सोनीपत (हरियाणा) के कोंडली से दुहाई तक के हिस्से का करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
उधर, बताया जा रहा है कि दुहाई से पलवल (हरियाणा) तक का काम मार्च 2018 तक पूरा हो जाएगा लेकिन उससे पहले ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के एक हिस्से पर वाहन दौड़ने शुरू हो सकते हैं, जिससे गाजियाबाद के साथ ही दिल्ली के एक हिस्से को जाम से मुक्ति मिल सकती है।
एनसीआर को जाम से मुक्ति दिलाने में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे को सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जो हरियाणा सोनीपत के कोंडली से शुरू होकर बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर से होता हुआ हरियाणा के पलवल तक जाएगा। ईस्टर्न पेरिफेरल की कुल लंबाई 135 किलोमीटर है, जिसमें से 24.5 किमी का हिस्सा गाजियाबाद से होकर गुजर रहा है। ईस्टर्न पेरिफेरल का काम समय पर पूरा हो सके इसके लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने टुकड़ों में टेंडर जारी कर कंपनियों को काम सौंपा।
पैकेज-1 में कोंडली से हिंडन तक और पैकेज-2 में हिंडन से दुहाई फ्लाईओवर तक का काम सद्भाव इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है जबकि दुहाई से नोएडा तक का काम जेपी ग्रुप के पास है।
बताया जा रहा है कि पैकेज-1 और पैकेज -2 का करीब 36 किमी का काम सबसे पहले पूरा होगा। कंपनी छह लेन एक्सप्रेस-वे के एक तरफ (तीन लेन) का काम इसी महीन के अंत तक पूरा हो जाएगा। अब अगर एनएचएआई चाहता है तो सोनीपत से दुहाई तक के एक हिस्से को जनवरी में यातायात के लिए खोला जा सकता है।
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हालांकि कुंडली में ओवरब्रिज नहीं बना है। सर्विस रोड भी कच्चा है, लेकिन इसके बाद भी एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की संख्या बढ़ने लगी है। बागपत से दिल्ली जाने वाले या बाघा बार्डर तक जाने वाले लोग इस एक्सप्रेस-वे से गुजर रहे हैं। हालांकि इससे गुजरना अभी खतरे से खाली नहीं है। एक ही साइड चालू होने से खतरा अधिक है। हाईवे के लोकसभा चुनाव से पहल शुरू हो जाने की उम्मीद है। बागपत में इसका करीब 21 किमी का टुकड़ा है और यहां से कुंडल तक जाने में वाहन चालकों को करीब 20 से 25 मिनट तक खर्च होंगे। दिल्ली पर वाहनों का दबाव कम करने में एक्सप्रेस-वे लाभदायक होगा।
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क्या होगा फायदा
बागपत। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का जहाजरानी, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 28 अप्रैल को निरीक्षण किया था। उन्होंने बताया था कि पीएम नरेंद्र मोदी वर्ष 2018 की शुरूआत में ही हाईवे का उद्घाटन करेंगे।
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दिल्ली पर वाहनों का बोझ कम होगा, प्रदूषण भी कम हो जाएगा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जाने के लिए अब लोगों को दिल्ली से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उद्योग स्थापित होंगे, जिनसे क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। एक्सप्रेस-वे के निर्माण की लागत से कहीं ज्यादा किसानों को मुआवजा दिया गया है। पूरे क्षेत्र का विकास होगा।
ऐसा है ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे
बागपत। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 135 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य करा रहा है। इसका निर्माण 14 सितंबर 2015 को शुरू हुआ। इस पर चार बड़े पुल हैं, इनमें दो पुल यमुना नदी पर, एक हिंडन और एक आगरा में है। इसके अलावा 45 छोटे पुल, रेलवे ओवर ब्रिज आठ हैं। फ्लाईओवर चार, अंडर पास की संख्या करीब तीन सौ से ज्यादा है।
सात हाईवे से गुजरेगा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे
बागपत। एक्सप्रेस-वे सात हाईवे से कनेक्ट होगा। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर मवी कलां गांव में, दिल्ली-मेरठ पर दुहाई गांव में, दिल्ली-हापुड़ पर डासना में, गाजियाबाद-अलीगढ़ पर गांव अकबरपुर में, कासना-बुलंदशहर पर गांव सिरसा में और दिल्ली-आगरा में पलवल में कनेक्ट होगा।
बागपत में 20 किमी का टुकड़ा
बागपत। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का बागपत में करीब 20.125 किमी का टुकड़ा है। एक्सप्रेस-वे जिले के काठा, मवी कलां, खेकड़ा, रावण उर्फ बड़ा गांव, नंगला बहेड़ी, लहचौड़ा, गौना, सिंगौली तगा, सरफाबाद, आलमगिरपुर उर्फ टुकाली एवं फुलैरा गांव से होकर गुजरता है।
बागपत जिले का कितना क्षेत्रफल
बागपत। जिले के किसानों ने 219.97 हेक्टेयर भूमि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लिए दी है। भूमि के जाने से 2221 किसान प्रभावित हुए, जिनके 869 खसरा संख्या से इसके लिए जमीन ली गई है।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, इसका लोगों को बड़ा फायदा होगा।
- डॉ. सत्यपाल सिंह, केंद्रीय मानव संसाधन, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरोद्धार राज्यमंत्री
एक्सप्रेस-वे से बागपत का विकास होगा। उद्योग लगेंगे और लोगों का समय बचेगा। लोगों को सफर करने में भी आसानी होगी।
- योगेश धामा, भाजपा के बागपत विधायक
कल से यमुना एक्सप्रेस-वे पर होगा डायवर्जन
ग्रेटर नोएडा।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे को मार्च तक चालू करने के मद्देनजर जगनपुर अफजलपुर के पास फ्लाईओवर बनाने का काम तेज हो गया है। बुधवार (20 दिसंबर) से यमुना एक्सप्रेस-वे पर डायवर्जन भी होगा।
एनएचएआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 तक अंतिम डेडलाइन तय की है, लेकिन इसे मार्च तक बनाकर चालू करने की दिशा में काम चल रहा है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का 85 से 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
बचा हुआ काम भी अगले तीन माह में पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद इसे वाहन चालकों के लिए खोल दिया जाएगा। फ्लाईओवर बनाने के लिए कल से यमुना एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक डायवर्जन भी होगा। ग्रेटर नोएडा से आगरा जाते समय जीरो प्वाइंट से पांच किलोमीटर पर शुरू होगा और 10 किलोमीटर तक रहेगा।
जहां पर फ्लाईओवर बन रहा है, वह 8.5 किलोमीटर पर है। एक्सप्रेस-वे पर एक तरफ से वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। दूसरी तरफ से दो-दो लेन चालू रहेगी, जिसमें से दो लेन आने वाले और दो लेन जाने वाले वाहनों के लिए होगा। ग्रेटर नोएडा से जाते समय पांच और 10 किमी पर पहले से कट है।
उसी का इस्तेमाल कर लिया जाएगा। डायवर्जन से पहले सुरक्षा के तमाम उपाय अपनाए जाएंगे। ट्रायल भी किया जाएगा। उसमें जो भी खामियां होंगी, उनको दूर किया जाएगा। इधर से जाने वाले वाहनों को जीरो प्वाइंट और आगरा से आने वाले वाहन चालकों को जेवर टोल प्लाजा पर जागरूक किया जाएगा।
जल्द ही जाम से मुक्ति दिला सकता है ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे
गाजियाबाद। शहर के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को जल्द ही जाम से मुक्ति मिल सकेगी। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का काम अब अंतिम दौर में है। सोनीपत (हरियाणा) के कोंडली से दुहाई तक के हिस्से का करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
उधर, बताया जा रहा है कि दुहाई से पलवल (हरियाणा) तक का काम मार्च 2018 तक पूरा हो जाएगा लेकिन उससे पहले ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के एक हिस्से पर वाहन दौड़ने शुरू हो सकते हैं, जिससे गाजियाबाद के साथ ही दिल्ली के एक हिस्से को जाम से मुक्ति मिल सकती है।
एनसीआर को जाम से मुक्ति दिलाने में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे को सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जो हरियाणा सोनीपत के कोंडली से शुरू होकर बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर से होता हुआ हरियाणा के पलवल तक जाएगा। ईस्टर्न पेरिफेरल की कुल लंबाई 135 किलोमीटर है, जिसमें से 24.5 किमी का हिस्सा गाजियाबाद से होकर गुजर रहा है। ईस्टर्न पेरिफेरल का काम समय पर पूरा हो सके इसके लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने टुकड़ों में टेंडर जारी कर कंपनियों को काम सौंपा।
पैकेज-1 में कोंडली से हिंडन तक और पैकेज-2 में हिंडन से दुहाई फ्लाईओवर तक का काम सद्भाव इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है जबकि दुहाई से नोएडा तक का काम जेपी ग्रुप के पास है।
बताया जा रहा है कि पैकेज-1 और पैकेज -2 का करीब 36 किमी का काम सबसे पहले पूरा होगा। कंपनी छह लेन एक्सप्रेस-वे के एक तरफ (तीन लेन) का काम इसी महीन के अंत तक पूरा हो जाएगा। अब अगर एनएचएआई चाहता है तो सोनीपत से दुहाई तक के एक हिस्से को जनवरी में यातायात के लिए खोला जा सकता है।