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जान हथेली पर रखकर उगाया धान, मगर मंडी में लुट गए किसान

Tue, 29 Sep 2020 12:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2020 12:27 AM IST
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rice farmer..
जान हथेली पर रखकर उगाया धान, मगर मंडी में लुट गए किसान
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बागपत। किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने के लिए बनाए गए कानून पर घमासान मचा है। सियासी पारा चढ़ रहा है। कानून के दाव-पेंच और राजनीतिक गुणा-भाग से दूर मेहनतकश किसान ने कोरोना काल में जान हथेली पर रखकर धान उगाया। फसल खूब लहलहाई, लेकिन मंडियों में जाते ही किसान की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
मंडी पहुंचते ही टूट गई उम्मीद
सिसाना गांव के किसान अनिल कुमार ने बताया कि 15 बीघा अगेती प्रजाति 1509 की रोपाई की थी। फसल अच्छी थी, उम्मीद थी कि पिछले साल की तरह 2800 से 3000 रुपये प्रति कुंतल का भाव भी मिला तो लागत वसूल हो जाएगी। लेकिन इस बार दिल्ली की नरेला मंडी में जाते ही जोर का झटका लगा। धान का भाव 1900 रुपये मिलना शुरू हुआ जो अब घटकर 1700 रुपये पर पहुंच गया है। जाहिर है कि पिछले साल के सापेक्ष इस बार करीब एक हजार रुपये किसान को कम मिल रहे हैं।
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औने-पौने दाम पर बेची फसल
सिसाना गांव के ही किसान प्रवीण चौहान कहते हैं कि मंडी भी वही है, खरीदार भी वही हैं। धान लेकर जाने वाले किसान भी वही हैं। कोरोना काल में पिछले साल से ज्यादा धान उगाया, लेकिन भाव नहीं मिला। इस बार लागत भी वसूल नहीं हुई। भाव बढ़ने की उम्मीद भी नहीं है। औने-पौने दाम में किसान मंडी पहुंचकर अपनी फसल बेच रहे हैं।
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मंडी तक आने-जाने में ही हजारों रुपये खर्च
किसान दिनेश कुमार का कहना है कि स्थानीय स्तर पर खरीद के इंतजाम नहीं हैं। हजारों रुपये तो नरेला मंडी तक आने-जाने में ही खर्च हो जाते हैं। पहले सोनीपत जाते थे, तब भाव नहीं मिलता था, लेकिन अब नरेला में भी यही हालात हैं। किसान का का इस बार बुरा हाल है।
चार साल से जिले में खरीद शून्य
जिले में अभी तक धान के केंद्र नहीं खोले गए हैं। जिला विपणन अधिकारी कौशल देव ने बताया कि खेकड़ा और बागपत में दो केंद्र खोले जाएंगे। लेकिन पिछले चार साल में धान की खरीद शून्य है। जिले में मोटे धान की पैदावार नहीं है।
एक हजार हेक्टेयर बढ़ गया रकबा
कोरोना काल में जिले में धान का रकबा एक हजार हेक्टेयर बढ़ गया है। पिछले सालों में पांच हजार हेक्टेयर धान होता था, इस बार रकबा छह हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया है।

इन प्रजातियों की पैदावार
जिले के किसानों ने अगेती प्रजाति पीबी 1509, पीबी 1121 और पीबी 01 अधिक लगाई है। पीबी 1121 की डिमांड ज्यादा रहती है।
खेतों में खड़ी बासमती
जिले में बासमती की पीबी 1121 वैरायटी अधिकतर खेतों में ही खड़ी है। किसान अनिल चौहान का कहना है कि अभी अगेती प्रजाति बाजार में पहुंच रही है।
इस तरह गिरे दाम
वैरायटी पिछले साल इस साल
1509 2800-3000 1500-1900
इसलिए मोटा धान नहीं उगाते किसान
सरकारी खरीद मोटे धान की होती है। लेकिन जिले में किसान मोटा धान नहीं उगाते। इसकी वजह यह है कि मोटे धान की पराली पशुओं के चारे में काम नहीं आती है। जबकि जिले में उगाए जा रहे धान की पराली किसान प्रयोग में ले लेते हैं। हरियाणा और पंजाब में मोटा धान उगाया जाता है और उसकी पराली को किसान जला देते हैं, जिसका खूब शोर मचता है। कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के वैज्ञानिक डॉ. संदीप चौधरी कहते हैं कि मोटे धान की पराली पशुओं के काम नहीं आती, जिस वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस धान को नहीं उगाए जाने का चलन बन गया है।
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