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Baghpat News: मोह माया त्यागने पर होती है वैराग्य की उत्पत्ति
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-जैन मंदिरों में दशलक्षण पर्व के चलते उत्तम आकिंचन धर्म और सम्यक ज्ञान की हुई पूजा
फोटो - 2
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत/अमीनगर सराय/अग्रवाल मंडी टटीरी। जैन मंदिरों में चल रहे दशलक्षण पर्व पर सोमवार को उत्तम आकिंचन धर्म और सम्यक ज्ञान की पूजा हुई। श्रद्धालुओं ने श्रीजी का अभिषेक के बाद शांतिधारा कराई। साथ ही श्रीजी को अर्घ्य अर्पित किए।
शहर के जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में अनिकेत शास्त्री, चैतन्य शास्त्री और मयंक जैन शास्त्री के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने श्रीजी को 317 अर्घ्य अर्पित किए। अनिकेत शास्त्री ने कहा कि परिग्रह के चौबीस भेद और त्याग हैं। 24 प्रकार के भेदों को त्याग करने पर ही मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की सीख दी। शाम काे आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष पंकज जैन के अलावा पीयूष जैन, बिजेंद्र जैन, अतुल जैन, मयंक जैन शास्त्री, यश जैन, ऋषभ जैन,मंजू जैन, पूनम जैन, सुषमा जैन, कामिनी जैन, मीनू जैन, आस्था जैन मौजूद रहीं।
अमीनगर सराय में चल रहे दशलक्षण पर्व में सोमवार को पंडित प्रदीप शास्त्री के निर्देशन में श्रद्घालुओं ने श्रीजी को 324 अर्घ्य अर्पित किए। पंडित प्रदीप शास्त्री ने कहा कि संसार में ईश्वर को छोड़कर सब कुछ नश्वर है। मनुष्य मोह माया के कारण बंधनों में बंधा रहता है। मोह माया को त्यागने पर वैराग्य की उत्पत्ति होती है। इस मौके पर विनोद जैन, अरुण जैन, दिनेश जैन, मयंक, प्रशुख, विपुल मौजूद रहे। अग्रवाल मंडी टटीरी में चल रहे दशलक्षण पर्व पर मंदिर में सिद्ध चक्र विधान का पाठ हुआ। पंडित राजेंद्र कुमार ने पूजन कराया। इस मौके पर संजय जैन, ऋषभ जैन, महेश जैन, वासु जैन, प्रमोद जैन, जिनेंद्र जैन, सुधा जैन मौजूद रहीं।
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बागपत/अमीनगर सराय/अग्रवाल मंडी टटीरी। जैन मंदिरों में चल रहे दशलक्षण पर्व पर सोमवार को उत्तम आकिंचन धर्म और सम्यक ज्ञान की पूजा हुई। श्रद्धालुओं ने श्रीजी का अभिषेक के बाद शांतिधारा कराई। साथ ही श्रीजी को अर्घ्य अर्पित किए।
शहर के जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में अनिकेत शास्त्री, चैतन्य शास्त्री और मयंक जैन शास्त्री के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने श्रीजी को 317 अर्घ्य अर्पित किए। अनिकेत शास्त्री ने कहा कि परिग्रह के चौबीस भेद और त्याग हैं। 24 प्रकार के भेदों को त्याग करने पर ही मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की सीख दी। शाम काे आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष पंकज जैन के अलावा पीयूष जैन, बिजेंद्र जैन, अतुल जैन, मयंक जैन शास्त्री, यश जैन, ऋषभ जैन,मंजू जैन, पूनम जैन, सुषमा जैन, कामिनी जैन, मीनू जैन, आस्था जैन मौजूद रहीं।
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अमीनगर सराय में चल रहे दशलक्षण पर्व में सोमवार को पंडित प्रदीप शास्त्री के निर्देशन में श्रद्घालुओं ने श्रीजी को 324 अर्घ्य अर्पित किए। पंडित प्रदीप शास्त्री ने कहा कि संसार में ईश्वर को छोड़कर सब कुछ नश्वर है। मनुष्य मोह माया के कारण बंधनों में बंधा रहता है। मोह माया को त्यागने पर वैराग्य की उत्पत्ति होती है। इस मौके पर विनोद जैन, अरुण जैन, दिनेश जैन, मयंक, प्रशुख, विपुल मौजूद रहे। अग्रवाल मंडी टटीरी में चल रहे दशलक्षण पर्व पर मंदिर में सिद्ध चक्र विधान का पाठ हुआ। पंडित राजेंद्र कुमार ने पूजन कराया। इस मौके पर संजय जैन, ऋषभ जैन, महेश जैन, वासु जैन, प्रमोद जैन, जिनेंद्र जैन, सुधा जैन मौजूद रहीं।
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